Matthew · chapter 22 · verse 15
Matthew 22:15 in Hindi
तब फरीसियों ने जाकर आपस में विचार किया, कि उस को किस प्रकार बातों में फंसाएं।
Tab phareesiyom ne jaakar aapas mem vichaar kiyaa, ki us ko kis prakaar baatom mem phansaaen.
Matthew 22:15 in English
- King James Version (KJV)
- Then went the Pharisees, and took counsel how they might entangle him in [his] talk.
- World English Bible (WEB)
- Then the Pharisees went and took counsel how they might entrap him in his talk.
- American Standard Version (ASV)
- Then went the Pharisees, and took counsel how they might ensnare him in [his] talk.
- Bible in Basic English (BBE)
- Then the Pharisees went and had a meeting to see how they might make use of his words to take him.
- Darby Translation (DBY)
- Then went the Pharisees and held a council how they might ensnare him in speaking.
- Webster's Bible (WBS)
- Then went the Pharisees, and took counsel how they might entangle him in [his] talk.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Then the Pharisees having gone, took counsel how they might ensnare him in words,
Read in context
- 13तब राजा ने सेवकों से कहा, इस के हाथ पांव बान्धकर उसे बाहर अन्धियारे में डाल दो, वहां रोना, और दांत पीसना होगा।
- 14क्योंकि बुलाए हुए तो बहुत परन्तु चुने हुए थोड़े हैं।।
- 15तब फरीसियों ने जाकर आपस में विचार किया, कि उस को किस प्रकार बातों में फंसाएं।
- 16सो उन्हों ने अपने चेलों को हेरोदियों के साथ उसके पास यह कहने को भेजा, कि हे गुरू; हम जानते हैं, कि तू सच्चा है; और परमेश्वर का मार्ग सच्चाई से सिखाता है; और किसी की परवा नहीं करता, क्योंकि तू मनुष्यों का मुंह देखकर बातें नही करता।
- 17इस लिये हमें बता तू क्या समझता है? कैसर को कर देना उचित है, कि नहीं।
Cross references
- Luke 20:20–26 लूका 20:20–26और वे उस की ताक में लगे और भेदिये भेजे, कि धर्म का भेष धरकर उस की कोई न कोई बात पकड़ें, कि उसे हाकिम के हाथ और अधिकार में सौंप दें। उन्हों ने उस से यह पूछा, कि हे गुरू, हम जानते हैं कि तू ठीक कहता, और सिखाता भी है, और किसी का पक्षपात नहीं करता; बरन परमेश्वर का मार्ग सच्चाई से बताता है। क्या हमें कैसर को कर देना उचित है, कि नहीं। उस ने उन की चतुराई को ताड़कर उन से कहा; एक दीनार मुझे दिखाओ। इस पर किस की मूर्त्ति और नाम है? उन्हों ने कहा, कैसर का। उस ने उन से कहा; तो जो कैसर का है, वह कैसर को दो और जो परमेश्वर का है, वह परमेश्वर को दो। वे लोगोें के साम्हने उस बात को पकड़ न सके, बरन उसके उत्तर से अचम्भित होकर चुप रह गए।
- Mark 12:13–17 मरकुस 12:13–17तब उन्हों ने उसे बातों में फंसाने के लिये कई एक फरीसियों और हेरोदियों को उसके पास भेजा। और उन्हों ने आकर उस से कहा; हे गुरू, हम जानते हैं, कि तू सच्चा है, और किसी की परवा नहीं करता; क्योंकि तू मनुष्यों का मुंह देख कर बातें नहीं करता, परन्तु परमेश्वर का मार्ग सच्चाई से बताता है। तो क्या कैसा को कर देना उचित है, कि नहीं? हम दें, या न दें? उस ने उन का कपट जानकर उन से कहा; मुझे क्यों परखते हो? एक दीनार मेरे पास लाओ, कि मैं देखूं। वे ले आए, और उस ने उन से कहा; यह मूर्ति और नाम किस का है? उन्हों ने कहा, कैसर का। यीशु ने उन से कहा; जो कैसर का है वह कैसर को, और जो परमेश्वर का है परमेश्वर को दो: तब वे उस पर बहुत अचम्भा करने लगे।।
- Psalm 56:5–7 भजन संहिता 56:5–7वे दिन भर मेरे वचनों को, उलटा अर्थ लगा लगाकर मरोड़ते रहते हैंद्ध उनकी सारी कल्पनाएं मेरी ही बुराई करने की होती है। वे सब मिलकर इकट्ठे होते हैं और छिपकर बैठते हैं; वे मेरे कदमों को देखते भालते हैं मानों वे मेरे प्राणों की घात में ताक लगाए बैठें हों। क्या वे बुराई करके भी बच जाएंगे? हे परमेश्वर, अपने क्रोध से देश देश के लोगों को गिरा दे!
- Psalm 2:2 भजन संहिता 2:2यहोवा के और उसके अभिषिक्त के विरूद्ध पृथ्वी के राजा मिलकर, और हाकिम आपस में सम्मति करके कहते हैं, कि
- Psalm 59:3 भजन संहिता 59:3क्योंकि देख, वे मेरी घात में लगे हैं; हे यहोवा, मेरा कोई दोष वा पाप नहीं है, तौभी बलवन्त लोग मेरे विरूद्ध इकट्ठे होते हैं।
- Jeremiah 18:18 यिर्मयाह 18:18तब वे कहने लगे, चलो, यिर्मयाह के विरूद्ध युक्ति करें, क्योंकि न याजक से व्यवस्था, न ज्ञानी से सम्मति, न भविष्यद्वक्ता से वचन दूर होंगे। आओ, हम उसकी कोई बात पकड़कर उसको नाश कराएं और फिर उसकी किसी बात पर ध्यान न दें।
- Isaiah 29:21 यशायाह 29:21और जो सभा में उलहना देते उनके लिये फंदा लगाते, और धर्म को व्यर्थ बात के द्वारा बिगाड़ देते हैं, वे सब मिट जाएंगे।।
- Luke 11:53–54 लूका 11:53–54जब वह वहां से निकला, तो शास्त्री और फरीसी बहुत पीछे पड़ गए और छेड़ने लगे, कि वह बहुत सी बातों की चर्चा करे। और उस की घात में लगे रहे, कि उसके मुंह की कोई बात पकड़ें।।
- Hebrews 12:3 इब्रानियों 12:3इसलिये उस पर ध्यान करो, जिस ने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद- विवाद सह लिया कि तुम निराश होकर हियाव न छोड़ दो।
- Psalm 57:6 भजन संहिता 57:6उन्हों ने मेरे पैरों के लिये जाल लगाया है; मेरा प्राण ढला जाता है। उन्हों ने मेरे आगे गड़हा खोदा, परन्तु आप ही उस में गिर पड़े।।
- Jeremiah 20:10 यिर्मयाह 20:10मैं ने बहुतों के मुंह से अपना अपवाद सुना है। चारों ओर भय ही भय है! मेरी जान पहचान के सब जो मेरे ठोकर खाने की बाट जोहते हैं, वे कहते हैं, उसके दोष बताओ, तब हम उनकी चर्चा फैला देंगे। कदाचित वह धोखा खाए, तो हम उस पर प्रबल होकर, उस से बदला लेंगे।
- Psalm 41:6 भजन संहिता 41:6और जब वह मुझ से मिलने को आता है, तब वह व्यर्थ बातें बकता है, जब कि उसका मन अपने अन्दर अधर्म की बातें संचय करता है; और बाहर जाकर उनकी चर्चा करता है।