Mark · chapter 12 · verse 13
Mark 12:13 in Hindi
तब उन्हों ने उसे बातों में फंसाने के लिये कई एक फरीसियों और हेरोदियों को उसके पास भेजा।
Tab unhom ne use baatom mem phansaane ke liye kaee ek phareesiyom aur herodiyom ko usake paas bhejaa.
Mark 12:13 in English
- King James Version (KJV)
- And they send unto him certain of the Pharisees and of the Herodians, to catch him in [his] words.
- World English Bible (WEB)
- They sent some of the Pharisees and the Herodians to him, that they might trap him with words.
- American Standard Version (ASV)
- And they send unto him certain of the Pharisees and of the Herodians, that they might catch him in talk.
- Bible in Basic English (BBE)
- Then they sent to him certain of the Pharisees and the Herodians, so that they might make use of his words to take him by a trick.
- Darby Translation (DBY)
- And they send to him certain of the Pharisees and of the Herodians, that they might catch him in speaking.
- Webster's Bible (WBS)
- And they sent to him certain of the Pharisees, and of the Herodians, to catch him in [his] words.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and they send unto him certain of the Pharisees and of the Herodians, that they may ensnare him in discourse,
Read in context
- 11यह प्रभु की ओर से हुआ, और हमारी दुष्टि मे अद्भुत है।
- 12तब उन्हों ने उसे पकड़ना चाहा; क्योंकि समझ गए थे, कि उस ने हमारे विरोध में यह दृष्टान्त कहा है: पर वे लोगों से डरे; और उसे छोड़ कर चले गए।।
- 13तब उन्हों ने उसे बातों में फंसाने के लिये कई एक फरीसियों और हेरोदियों को उसके पास भेजा।
- 14और उन्हों ने आकर उस से कहा; हे गुरू, हम जानते हैं, कि तू सच्चा है, और किसी की परवा नहीं करता; क्योंकि तू मनुष्यों का मुंह देख कर बातें नहीं करता, परन्तु परमेश्वर का मार्ग सच्चाई से बताता है।
- 15तो क्या कैसा को कर देना उचित है, कि नहीं? हम दें, या न दें? उस ने उन का कपट जानकर उन से कहा; मुझे क्यों परखते हो? एक दीनार मेरे पास लाओ, कि मैं देखूं।
Cross references
- Luke 20:20–26 लूका 20:20–26और वे उस की ताक में लगे और भेदिये भेजे, कि धर्म का भेष धरकर उस की कोई न कोई बात पकड़ें, कि उसे हाकिम के हाथ और अधिकार में सौंप दें। उन्हों ने उस से यह पूछा, कि हे गुरू, हम जानते हैं कि तू ठीक कहता, और सिखाता भी है, और किसी का पक्षपात नहीं करता; बरन परमेश्वर का मार्ग सच्चाई से बताता है। क्या हमें कैसर को कर देना उचित है, कि नहीं। उस ने उन की चतुराई को ताड़कर उन से कहा; एक दीनार मुझे दिखाओ। इस पर किस की मूर्त्ति और नाम है? उन्हों ने कहा, कैसर का। उस ने उन से कहा; तो जो कैसर का है, वह कैसर को दो और जो परमेश्वर का है, वह परमेश्वर को दो। वे लोगोें के साम्हने उस बात को पकड़ न सके, बरन उसके उत्तर से अचम्भित होकर चुप रह गए।
- Mark 3:6 मरकुस 3:6तब फरीसी बाहर जाकर तुरन्त हेरोदियों के साथ उसके विरोध में सम्मति करने लगे, कि उसे किस प्रकार नाश करें।।
- Luke 11:54 लूका 11:54और उस की घात में लगे रहे, कि उसके मुंह की कोई बात पकड़ें।।
- Mark 8:15 मरकुस 8:15और उस ने उन्हें चिताया, कि देखो, फरीसियों के खमीर और हेरोदेस के खमीर से चौकस रहो।
- Matthew 16:6 मत्ती 16:6यीशु ने उन से कहा, देखो; फरीसियों और सदूकियों के खमीर से चौकस रहना।
- Psalm 140:5 भजन संहिता 140:5घमण्डियों ने मेरे लिये फन्दा और पासे लगाए, और पथ के किनारे जाल बिछाया है; उन्हों ने मेरे लिये फन्दे लगा रखे हैं।।
- Psalm 38:12 भजन संहिता 38:12मेरे प्राण के ग्राहक मेरे लिये जाल बिछाते हैं, और मेरी हाति के यत्न करनेवाले दुष्टता की बातें बोलते, और दिन भर छल की युक्ति सोचते हैं।
- Matthew 22:15–22 मत्ती 22:15–22तब फरीसियों ने जाकर आपस में विचार किया, कि उस को किस प्रकार बातों में फंसाएं। सो उन्हों ने अपने चेलों को हेरोदियों के साथ उसके पास यह कहने को भेजा, कि हे गुरू; हम जानते हैं, कि तू सच्चा है; और परमेश्वर का मार्ग सच्चाई से सिखाता है; और किसी की परवा नहीं करता, क्योंकि तू मनुष्यों का मुंह देखकर बातें नही करता। इस लिये हमें बता तू क्या समझता है? कैसर को कर देना उचित है, कि नहीं। यीशु ने उन की दुष्टता जानकर कहा, हे कपटियों; मुझे क्यों परखते हो? कर का सिक्का मुझे दिखाओ: तब वे उसके पास एक दीनार ले आए। उस ने, उन से पूछा, यह मूर्त्ति और नाम किस का है? उन्हों ने उस से कहा, कैसर का; तब उस ने, उन से कहा; जो कैसर का है, वह कैसर को; और जो परमेश्वर का है, वह परमेश्वर को दो। यह सुनकर उन्हों ने अचम्भा किया, और उसे छोड़कर चले गए।।
- Psalm 56:5–6 भजन संहिता 56:5–6वे दिन भर मेरे वचनों को, उलटा अर्थ लगा लगाकर मरोड़ते रहते हैंद्ध उनकी सारी कल्पनाएं मेरी ही बुराई करने की होती है। वे सब मिलकर इकट्ठे होते हैं और छिपकर बैठते हैं; वे मेरे कदमों को देखते भालते हैं मानों वे मेरे प्राणों की घात में ताक लगाए बैठें हों।
- Isaiah 29:21 यशायाह 29:21और जो सभा में उलहना देते उनके लिये फंदा लगाते, और धर्म को व्यर्थ बात के द्वारा बिगाड़ देते हैं, वे सब मिट जाएंगे।।
- Jeremiah 18:18 यिर्मयाह 18:18तब वे कहने लगे, चलो, यिर्मयाह के विरूद्ध युक्ति करें, क्योंकि न याजक से व्यवस्था, न ज्ञानी से सम्मति, न भविष्यद्वक्ता से वचन दूर होंगे। आओ, हम उसकी कोई बात पकड़कर उसको नाश कराएं और फिर उसकी किसी बात पर ध्यान न दें।
Original words (Greek)
- And · G2532καί kaí
- send · G649ἀποστέλλω apostéllō
- unto · G4314πρός prós
- him · G846αὐτός autós
- certain · G5100τὶς tìs
- Pharisees · G5330Φαρισαῖος Pharisaîos
- and · G2532καί kaí
- Herodians · G2265Ἡρωδιανοί Hērōdianoí
- to · G2443ἵνα hína
- catch · G64ἀγρεύω agreúō
- him · G846αὐτός autós
- in · G3056λόγος lógos
- words · G3056λόγος lógos