Proverbs · chapter 17 · verse 16
Proverbs 17:16 in Hindi
बुद्धि मोल लेने के लिये मूर्ख अपने हाथ में दाम क्यों लिए हैं? वह उसे चाहता ही नहीं।
Buddhi mol lene ke liye moorkh apane haath mem daam kyom lie haim? Vah use chaahataa hee naheen.
Proverbs 17:16 in English
- King James Version (KJV)
- Wherefore [is there] a price in the hand of a fool to get wisdom, seeing [he hath] no heart [to it]?
- World English Bible (WEB)
- Why is there money in the hand of a fool to buy wisdom, since he has no understanding?
- American Standard Version (ASV)
- Wherefore is there a price in the hand of a fool to buy wisdom, Seeing he hath no understanding?
- Bible in Basic English (BBE)
- How will money in the hand of the foolish get him wisdom, seeing that he has no sense?
- Darby Translation (DBY)
- To what purpose is there a price in the hand of a fool to get wisdom, seeing [he] hath no sense?
- Webster's Bible (WBS)
- Why [is there] a price in the hand of a fool to get wisdom, seeing [he hath] no heart [to it] ?
- Young's Literal Translation (YLT)
- Why [is] this — a price in the hand of a fool to buy wisdom, And a heart there is none?
Read in context
- 14झगड़े का आरम्भ बान्ध के छेद के समान है, झगड़ा बढ़ने से पहिले उसको छोड़ देता उचित है।
- 15जो दोषी को निर्दोष, और जो निर्दोष को दोषी ठहराता है, उन दोनों से यहोवा घृणा करता है।
- 16बुद्धि मोल लेने के लिये मूर्ख अपने हाथ में दाम क्यों लिए हैं? वह उसे चाहता ही नहीं।
- 17मित्रा सब समयों में प्रेम रखता है, और विपत्ति के दिन भाई बन जाता है।
- 18निर्बुद्धि मनुष्य हाथ पर हाथ मारता है, और अपने पड़ोसी के सामने उत्तरदायी होता है।
Cross references
- Proverbs 21:25–26 नीतिवचन 21:25–26आलसी अपनी लालसा ही में मर जाता है, क्योंकि उसके हाथ काम करने से इन्कार करते हैं। कोई ऐसा है, जो दिन भर लालसा ही किया करता है, परन्तु धर्मी लगातार दान करता रहता है।
- Proverbs 23:23 नीतिवचन 23:23सच्चाई को मोल लेना, बेचना नहीं; और बुद्धि और शिक्षा और समझ को भी मोल लेना।
- Proverbs 8:4–5 नीतिवचन 8:4–5हे मनुष्यों, मैं तुम को पुकारती हूं, और मेरी बात सब आदमियों के लिये है। हे भोलो, चतुराई सीखो; और हे मूर्खों, अपने मन में समझ लों
- Acts 28:26–27 प्रेरितों के काम 28:26–27कि सुनते तो रहोगे, परन्तु न समझोगे, और देखते तो रहोगे, परन्तु न बुझोगे। क्योंकि इन लोगों का मन मोटा, और उन के कान भारी हो गए, और उन्हों ने अपनी आंखें बन्द की हैं, ऐसा न हो कि वे कभी आंखों से देखें, और कानों से सुनें, और मन से समझें और फिरें, और मैं उन्हें चंगा करूं।
- Deuteronomy 5:29 व्यवस्थाविवरण 5:29भला होता कि उनका मन सदैव ऐसा ही बना रहे, कि वे मेरा भय मानते हुए मेरी सब आज्ञाओं पर चलते रहें, जिस से उनकी और उनके वंश की सदैव भलाई होती रहे!
- Proverbs 18:15 नीतिवचन 18:15समझवाले का मन ज्ञान प्राप्त करता है; और बुद्धिमान ज्ञान की बात की खोज में रहते हैं।
- 2 Corinthians 6:1 2 कुरिन्थियों 6:1और हम जो उसके सहकर्मी हैं यह भी समझाते हैं, कि परमेश्वर का अनुगंह जो तुम पर हुआ, व्यर्थ न रहने दो।
- Isaiah 55:1–3 यशायाह 55:1–3अहो सब प्यासे लोगो, पानी के पास आओ; और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो। जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे। कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहेागे; और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात् दाऊद पर की अटल करूणा की वाचा।
- Acts 13:46 प्रेरितों के काम 13:46तब पोलुस और बरनबास ने निडर होकर कहा, अवश्य था, कि परमेश्वर का वचन पहिले तुम्हें सुनाया जाता: परन्तु जब कि तुम उसे दूर करते हो, और अपने को अनन्त जीवन के योग्य नहीं ठहराते, तो देखो, हम अन्यजातियों की ओर फिरते हैं।
- Proverbs 1:22–23 नीतिवचन 1:22–23हे भोले लोगो, तुम कब तक भोलेपन से प्रीति रखोगे? और हे ठट्ठा करनेवालो, तुम कब तक ठट्ठा करने से प्रसन्न रहोगे? और हे मूर्खों, तुम कब तक ज्ञान से बैर रखोगे? तुम मेरी डांट सुनकर मन फिराओ; सुनो, मैं अपनी आत्मा तुम्हारे लिये उण्डेल दूंगी; मैं तुम को अपने वचन बताऊंगी।
- Proverbs 9:4–6 नीतिवचन 9:4–6जो कोई भोला हे वह मुड़कर यहीं आए! और जो निर्बुद्धि है, उस से वह कहती है, आओ, मेरी रोटी खाओ, और मेरे मसाला मिलाए हुए दाखमधु को पीओ। भोलों का संग छोड़ो, और जीवित रहो, समझ के मार्ग में सीधे चलो।
- Psalm 81:11–13 भजन संहिता 81:11–13परन्तु मेरी प्रजा ने मेरी न सुनी; इस्त्राएल ने मुझ को न चाहा। इसलिये मैं ने उसको उसके मन के हठ पर छोड़ दिया, कि वह अपनी ही युक्तियों के अनुसार चले। यदि मेरी प्रजा मेरी सुने, यदि इस्त्राएल मेरे मार्गों पर चले,