Proverbs · chapter 20 · verse 3
Proverbs 20:3 in Hindi
मुक में से हाथ उठाना, पुरूष की महिमा ठहरती है; परन्तु सब मूढ़ झगड़ने को तैयार होते हैं।
Muk mem se haath uthaanaa, puroosh kee mahimaa thaharatee hai; parantu sab moodh jhagadane ko taiyaar hote hain.
Proverbs 20:3 in English
- King James Version (KJV)
- [It is] an honour for a man to cease from strife: but every fool will be meddling.
- World English Bible (WEB)
- It is an honor for a man to keep aloof from strife, but every fool will be quarreling.
- American Standard Version (ASV)
- It is an honor for a man to keep aloof from strife; But every fool will be quarrelling.
- Bible in Basic English (BBE)
- It is an honour for a man to keep from fighting, but the foolish are ever at war.
- Darby Translation (DBY)
- It is an honour for a man to cease from strife; but every fool rusheth into it.
- Webster's Bible (WBS)
- [It is] an honor for a man to cease from strife: but every fool will be meddling.
- Young's Literal Translation (YLT)
- An honour to a man is cessation from strife, And every fool intermeddleth.
Read in context
- 1दाखमधु ठट्ठा करनेवाला और मदिरा हल्ला मचानेवाली है; जो कोई उसके कारण चूक करता है, वह बुद्धिमान नहीं।
- 2राजा का भय दिखाना, सिंह का गरजना है; जो उस पर रोष करता, वह अपने प्राण का अपराधी होता है।
- 3मुक में से हाथ उठाना, पुरूष की महिमा ठहरती है; परन्तु सब मूढ़ झगड़ने को तैयार होते हैं।
- 4आलसी मनुष्य शीत के कारण हल नहीं जोतता; इसलिये कटनी के समय वह भीष मांगता, और कुछ नहीं पाता।
- 5मनुष्य के मन की युक्ति अथाह तो है, तौभी समझवाला मनुष्य उसको निकाल लेता है।
Cross references
- Proverbs 16:32 नीतिवचन 16:32विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है।
- Proverbs 17:14 नीतिवचन 17:14झगड़े का आरम्भ बान्ध के छेद के समान है, झगड़ा बढ़ने से पहिले उसको छोड़ देता उचित है।
- Proverbs 19:11 नीतिवचन 19:11जो मनुष्य बुद्धि से चलता है वह विलम्ब से क्रोध करता है, और अपराध को झुलाना उसको सोहता है।
- Proverbs 18:6 नीतिवचन 18:6बात बढ़ाने से मूर्ख मुक मा खड़ा करता है, और अपने को मार खाने के योग्य दिखाता है।
- Proverbs 14:29 नीतिवचन 14:29जो विलम्ब से क्रोध करनेवाला है वह बड़ा समझवाला है, परन्तु जो अधीर है, वह मूढ़ता की बढ़ती करता है।
- James 4:1 याकूब 4:1तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख- विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते- भिड़ते हैं?
- Proverbs 14:17 नीतिवचन 14:17जो झट क्रोध करे, वह मूढ़ता का काम भी करेगा, और जो बुरी युक्तियां निकालता है, उस से लोग बैर रखते हैं।
- James 3:14 याकूब 3:14पर यदि तुम अपने अपने मन में कड़वी डाह और विरोध रखते हो, तो सत्य के विरोध में घमण्ड न करना, और न तो झूठ बोलना।
- Proverbs 21:24 नीतिवचन 21:24जो अभिमन से रोष में आकर काम करता है, उसका नाम अभिमानी, और अंहकारी ठट्ठा करनेवाला पड़ता है।
- Ephesians 1:6–8 इफिसियों 1:6–8कि उसके उस अनुग्रह की महिमा की स्तुति हो, जिसे उस ने हमें उस प्यारे में सेंत मेंत दिया। हम को उस में उसके लोहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात् अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है। जिसे उस ने सारे ज्ञान और समझ सहित हम पर बहुतायत से किया।
- Proverbs 25:8–10 नीतिवचन 25:8–10झगड़ा करने में जल्दी न करना नहीं तो अन्त में जब तेरा पड़ोसी तेरा मुंह काला करे तब तू क्या कर सकेगा? अपने पडोसी के साथ वादविवाद एकान्त में करना और पराये का भेद न खोलना; ऐसा न हो कि सुननेवाला तेरी भी निन्दा करे, और तेरा अपवाद बना रहे।।