Proverbs · chapter 26 · verse 2
Proverbs 26:2 in Hindi
जैसे गौरिया घूमते घूमते और सूपाबेनी उड़ते- उड़ते नहीं बैठती, वैसे ही व्यर्थ शाप नहीं पड़ता।
Jaise gauriyaa ghoomate ghoomate aur soopaabenee udate- udate naheem baithatee, vaise hee vyarth shaap naheem padataa.
Proverbs 26:2 in English
- King James Version (KJV)
- As the bird by wandering, as the swallow by flying, so the curse causeless shall not come.
- World English Bible (WEB)
- Like a fluttering sparrow, like a darting swallow, so the undeserved curse doesn’t come to rest.
- American Standard Version (ASV)
- As the sparrow in her wandering, as the swallow in her flying, So the curse that is causeless alighteth not.
- Bible in Basic English (BBE)
- As the sparrow in her wandering and the swallow in her flight, so the curse does not come without a cause.
- Darby Translation (DBY)
- As the sparrow for flitting about, as the swallow for flying, so a curse undeserved shall not come.
- Webster's Bible (WBS)
- As the bird by wandering, as the swallow by flying, so the curse causeless shall not come.
- Young's Literal Translation (YLT)
- As a bird by wandering, as a swallow by flying, So reviling without cause doth not come.
Read in context
- 1जैसा धूपकाल में हिम का, और कटनी के समय जल का पड़ना, वैसा ही मूर्ख की महिमा भी ठीक नहीं होती।
- 2जैसे गौरिया घूमते घूमते और सूपाबेनी उड़ते- उड़ते नहीं बैठती, वैसे ही व्यर्थ शाप नहीं पड़ता।
- 3घोड़े के लिये कोड़ा, गदहे के लिये बाग, और मूर्खों की पीठ के लिये छड़ी है।
- 4मूर्ख को उसको मूर्खता के अनुसार उत्तर न देना ऐसा न हो कि तू भी उसके तुल्य ठहरे।
Cross references
- Numbers 23:8 गिनती 23:8परन्तु जिन्हें ईश्वर ने नहीं शाप दिया उन्हें मैं क्यों शाप दूं? और जिन्हें यहोवा ने धमकी नहीं दी उन्हें मैं कैसे धमकी दूं?
- Nehemiah 13:2 नहेमायाह 13:2क्योंकि उन्हों ने अन्न जल लेकर इस्राएलियों से भेंट नहीं की, वरन बिलाम को उन्हें शाप देने के लिये दक्षिणा देकर बुलवाया था-- तौभी हमारे परमेश्वर ने उस शाप को आशीष से बदल दिया।
- Psalm 109:28 भजन संहिता 109:28वे कोसते तो रहें, परन्तु तू आशीष दे! वे तो उठते ही लज्जित हों, परन्तु तेरा दास आनन्दित हो!
- 2 Samuel 16:12 2 शमूएल 16:12कदाचित् यहोवा इस उपद्रव पर, जो मुझ पर हो रहा है, दृष्टि करके आज के शाप की सन्ती मुझे भला बदला दे।
- Deuteronomy 23:4–5 व्यवस्थाविवरण 23:4–5इस कारण से कि जब तुम मि से निकलकर आते थे तब उन्हों ने अन्न जल लेकर मार्ग में तुम से भेंट नहीं की, और यह भी कि उन्हों ने अरम्नहरैम देश के पतोर नगरवाले बोर के पुत्रा बिलाम को तुझे शाप देने के लिये दक्षिणा दी। परन्तु तेरे परमेश्वर यहोवा ने तेरे निमित्त उसके शाप को आशीष से पलट दिया, इसलिये कि तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से प्रेम रखता था।
- 1 Samuel 17:43 1 शमूएल 17:43तब पलिश्ती ने दाऊद से कहा, क्या मैं कुत्ता हूं, कि तू लाठी लेकर मेरे पास आता है? तब पलिश्ती अपने देवताओं के नाम लेकर दाऊद को कोसने लगा।
- 1 Samuel 14:28–29 1 शमूएल 14:28–29तब लोगों में से एक मनुष्य ने कहा, तेरे पिता ने लोगों को दृढ़ता से शपथ धरा के कहा, शापित हो वह, जो आज कुछ खाए। और लोग थके मांदे थे। योनातान ने कहा, मेरे पिता ने लोगों को कष्ट दिया है; देखो, मैं ने इस मधु को थोड़ा सा चखा, और मुझे आंखों से कैसा सूझने लगा।
- Proverbs 27:8 नीतिवचन 27:8स्थान छोड़कर घूमनेवाला मनुष्य उस चिड़िया के समान है, जो घोंसला छोड़कर उड़ती फिरती है।