Proverbs · chapter 26 · verse 1
Proverbs 26:1 in Hindi
जैसा धूपकाल में हिम का, और कटनी के समय जल का पड़ना, वैसा ही मूर्ख की महिमा भी ठीक नहीं होती।
Jaisaa dhoopakaal mem him kaa, aur katanee ke samay jal kaa padanaa, vaisaa hee moorkh kee mahimaa bhee theek naheem hotee.
Proverbs 26:1 in English
- King James Version (KJV)
- As snow in summer, and as rain in harvest, so honour is not seemly for a fool.
- World English Bible (WEB)
- Like snow in summer, and as rain in harvest, so honor is not fitting for a fool.
- American Standard Version (ASV)
- As snow in summer, and as rain in harvest, So honor is not seemly for a fool.
- Bible in Basic English (BBE)
- Like snow in summer and rain when the grain is being cut, so honour is not natural for the foolish.
- Darby Translation (DBY)
- As snow in summer, and as rain in harvest, so honour beseemeth not a fool.
- Webster's Bible (WBS)
- As snow in summer, and as rain in harvest; so honor is not seemly for a fool.
- Young's Literal Translation (YLT)
- As snow in summer, and as rain in harvest, So honour [is] not comely for a fool.
Read in context
- 1जैसा धूपकाल में हिम का, और कटनी के समय जल का पड़ना, वैसा ही मूर्ख की महिमा भी ठीक नहीं होती।
- 2जैसे गौरिया घूमते घूमते और सूपाबेनी उड़ते- उड़ते नहीं बैठती, वैसे ही व्यर्थ शाप नहीं पड़ता।
- 3घोड़े के लिये कोड़ा, गदहे के लिये बाग, और मूर्खों की पीठ के लिये छड़ी है।
Cross references
- Proverbs 19:10 नीतिवचन 19:10जब सुख में रहना मूर्ख को नहीं फबता, तो हाकिमों पर दास का प्रभुता करना कैसे फबे!
- Proverbs 28:16 नीतिवचन 28:16जो प्रधान मन्दबुद्धि का होता है, वही बहुत अन्धेर करता है; और जो लालच का बैरी होता है वह दीर्घायु होता है।
- 1 Samuel 12:17–18 1 शमूएल 12:17–18आज क्या गेहूं की कटनी नहीं हो रही? मैं यहोवा को पुकारूंगा, और वह मेघ गरजाएगा और मेंह बरसाएगा; तब तुम जान लोगे, और देख भी लोगे, कि तुम ने राजा मांगकर यहोवा की दृष्टि में बहुत बड़ी बुराई की है। तब शमूएल ने यहोवा का पुकारा, और यहोवा ने उसी दिन मेघ गरजाया और मेंह बरसाया; और सब लोग यहोवा से और शमूएल से अत्यन्त डर गए।
- Psalm 15:4 भजन संहिता 15:4वह जिसकी दृष्टि में निकम्मा मनुष्य तुच्छ है, और जो यहोवा के डरवैयों का आदर करता है, जो शपथ खाकर बदलता नहीं चाहे हानि उठाना पड़े;
- Psalm 12:8 भजन संहिता 12:8जब मनुष्यों में नीचपन का आदर होता है, तब दुष्ट लोग चारों ओर अकड़ते फिरते हैं।।
- Esther 3:1–15 एस्तेर 3:1–15इन बातों के बाद राजा क्षयर्ष ने अगामी हम्मदाता के पुत्रा हामान को उन्च पद दिया, और उसको महत्व देकर उसके लिये उसके साथी हाकिमों के सिंहासनों से ऊंचा सिंहासन ठहराया। और राजा के सब कर्मचारी जो राजभवन के फाटक में रहा करते थे, वे हामान के साम्हने झुककर दणडवत किया करते थे क्योंकि राजा ने उसके विषय ऐसी ही आज्ञा दी थी; परन्तु मोर्दकै न तो झुकता था और न उसको दणडवत करता था। तब राजा के कर्मचारी जो राजभवन के फाटक में रहा करते थे, उन्हों ने मोर्दकै से पूछा, तू राजा की आज्ञा क्यों उलंघन करता है? जब वे उस से प्रतिदिन ऐसा ही कहते रहे, और उस ने उनकी एक न मानी, तब उन्हों ने यह देखने की इच्छा से कि मोर्दकै की यह बात चलेगी कि नहीं, हामान को बता दिया; उस ने तो उनको बता दिया था कि मैं यहूदी हूँ। जब हामान ने देखा, कि मोर्दकै नहीं झुकता, और न मुझ को दणडवत करता है, तब हामान बहुत ही क्रोधित हुआ। उस ने केवल मोर्दकै पर हाथ चलाना अपनी मर्यादा के नीचे जाना। क्योंकि उन्हों ने हामान को यह बता दिया था, कि मोर्दकै किस जाति का है, इसलिये हामान ने क्षयर्ष के साम्राज्य में रहनेवाले सारे यहूदियों को भी मोर्दकै की जाति जानकर, विनाश कर डालने की युक्ति निकाली। राजा क्षयर्ष के बारहवें वर्ष के नीसान नाम पहिले महीने में, हामान ने अदार नाम बारहवें महीने तक के एक एक दिन और एक एक महीने के लिये "पूर" अर्थात् चिट्ठी अपने साम्हने डलवाई। और हामान ने राजा क्षयर्ष से कहा, तेरे राज्य के सब प्रान्तों में रहनेवाले देश देश के लोगों के मध्य में तितर बितर और छिटकी हुई एक जाति है, जिसके नियम और सब लोगों के नियमों से भिन्न हैं; और वे राजा के कानून पर नहीं चलते, इसलिये उन्हें रहने देना राजा को लाभदायक नहीं है। यदि राजा को स्वीकार हो तो उन्हें नष्ट करने की आज्ञा लिखी जाए, और मैं राज के भणडारियों के हाथ में राजभणडार में पहुंचाने के लिलये, दस हजार किक्कार चान्दी दूंगा। तब राजा ने अपनी अंगूठी अपने हाथ से उतारकर अगागी हम्मदाता के पुत्रा हामान को, जो यहूदियों का वैरी था दे दी। और राजा ने हामान से कहा, वह चान्दी तुझे दी गई है, और वे लोग भी, ताकि तू उन से जैसा तेरा जी चाहे वैसा ही व्यवहार करे। यों उसी पहिले महीने के तेरहवें दिन को राजा के लेखक बुलाए गए, और हामान की आज्ञा के अनुसार राजा के सब अधिपतियों, और सब प्रान्तों के प्रधानों, और देश देश के लोगों के हाकिमों के लिये चिटि्ठयां, एक एक प्रान्त के अक्षरों में, और एक एक देश के लोगों की भाषा में राजा क्षयर्ष के नाम से लिखी गई; और उन में राजा की अंगूठी की छाप लगाई गई। और राज्य के सब प्रान्तों में इस आशय की चिटि्ठयां हर डाकियों के द्वारा भेजी गई कि एक ही दिन में, अर्थात् अदार नाम बारहवें महीने के तेरहवें दिन को, क्या जवान, क्या बूढ़ा, क्या स्त्री, क्या बालक, सब यहूदी विध्वंसघात और नाश किए जाएं; और उनकी धन सम्मत्ति लूट ली जाए। उस आज्ञा के लेख की नकलें सब प्रान्तों में खुली हुई भेजी गई कि सब देशों के लोग उस दिन के लिये तैयार हो जाएं। यह आज्ञा शूशन गढ़ में दी गई, और डाकिए राजा की आज्ञा से तुरन्त निकल गए। और राजा और हामान तो जेवनार में बैठ गए; परन्तु शूशन नगर में घबराहट फैल गई।
- Esther 4:6 एस्तेर 4:6तब हताक नगर के उस चौक में, जो राजभवन के फाटक के साम्हने था, मोर्दकै के पास निकल गया।
- Proverbs 26:8 नीतिवचन 26:8जैसे पत्थरों के ढेर में मणियों की थैली, वैसे ही मूर्ख को महिमा देनी होती है।
- Esther 4:9 एस्तेर 4:9तब हताक ने एस्तेर के पास जाकर मोर्दकै की बातें कह सुनाई।
- Ecclesiastes 10:5–7 सभोपदेशक 10:5–7एक बुराई है जो मैं ने सूर्य के नीचे देखी, वह हाकिम की भूल से होती है: अर्थात् मूर्ख बड़ी प्रतिष्ठा के स्थानों में ठहराए जाते हैं, और धनवाल लोग नीचे बैठते हैं। मैं ने दासों को घोड़ों पर चढ़े, और रईसों को दासों की नाई भूमि पर चलते हुए देखा है।।
- Psalm 52:1 भजन संहिता 52:1हे वीर, तू बुराई करने पर क्यों घमण्ड करता है? ईश्वर की करूणा तो अनन्त है।
- Proverbs 17:7 नीतिवचन 17:7मूढ़ तो उत्तम बात फबती नहीं, और अधिक करके प्रधान को झूठी बात नहीं फबती।