Psalms · chapter 122 · verse 8
Psalm 122:8 in Hindi
अपने भाइयों और संगियों के निमित्त, मैं कहूंगा कि तुझ में शान्ति होवे!
Apane bhaaiyom aur sangiyom ke nimitt, maim kahoongaa ki tujh mem shaanti hove!
Psalm 122:8 in English
- King James Version (KJV)
- For my brethren and companions’ sakes, I will now say, Peace [be] within thee.
- World English Bible (WEB)
- For my brothers’ and companions’ sakes, I will now say, “Peace be within you.”
- American Standard Version (ASV)
- For my brethren and companions’ sakes, I will now say, Peace be within thee.
- Bible in Basic English (BBE)
- Because of my brothers and friends, I will now say, Let peace be with you.
- Darby Translation (DBY)
- For my brethren and companions' sakes I will say, Peace be within thee!
- Webster's Bible (WBS)
- For my brethren and companions' sake, I will now say, Peace [be] within thee.
- Young's Literal Translation (YLT)
- For the sake of my brethren and my companions, Let me speak, I pray thee, 'Peace [be] in thee.'
Read in context
- 6यरूशलेम की शान्ति का वरदान मांगो, तेरे प्रेमी कुशल से रहें!
- 7तेरी शहरपनाह के भीतर शान्ति, और तेरे महलों में कुशल होवे!
- 8अपने भाइयों और संगियों के निमित्त, मैं कहूंगा कि तुझ में शान्ति होवे!
- 9अपने परमेश्वर यहोवा के भवन के निमित्त, मैं तेरी भलाई का यत्न करूंगा।।
Cross references
- 1 Samuel 25:6 1 शमूएल 25:6और उस से यों कहो, कि तू चिरंजीव रहे, तेरा कल्याण हो, और तेरा घराना कल्याण से रहे, और जो कुछ तेरा है वह कल्याण से रहे।
- Philippians 2:2–5 फिलिप्पियों 2:2–5तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्ता करे। जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो।
- Psalm 42:4 भजन संहिता 42:4मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करनेवाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण करके मेरा प्राण शोकित हो जाता है।
- Psalm 16:3 भजन संहिता 16:3पृथ्वी पर जो पवित्रा लोग हैं, वे ही आदर के योग्य हैं, और उन्हीं से मैं प्रसन्न हूं।
- Psalm 119:63 भजन संहिता 119:63जितने तेरा भय मानते और तेरे उपदेशों पर चलते हैं, उनका मैं संगी हूं।
- James 3:13–18 याकूब 3:13–18तुम में ज्ञानवान और समझदार कौन है? जो ऐसा हो वह अपने कामों को अच्छे चालचलन से उस नम्रता सहित प्रगट करे जो ज्ञान से उत्पन्न होती है। पर यदि तुम अपने अपने मन में कड़वी डाह और विरोध रखते हो, तो सत्य के विरोध में घमण्ड न करना, और न तो झूठ बोलना। यह ज्ञान वह नहीं, जो ऊपर से उतरता है बरन सांसारिक, और शारीरिक, और शैतानी है। इसलिये कि जहां डाह और विरोध होता है, वहां बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्कर्म भी होता है। पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्रा होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है। और मिलाप करानेवालों के लिये धार्मिकता का फल मेल- मिलाप के साथ बोया जाता है।।
- Ephesians 4:4–6 इफिसियों 4:4–6एक ही देह है, और एक ही आत्मा; जैसे तुम्हें जो बुलाए गए थे अपने बुलाए जाने से एक ही आशा है। एक ही प्रभु है, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा। और सब का एक ही परमेश्वर और पिता है, जो सब के ऊपर और सब के मध्य में, और सब में है।