Psalms · chapter 129 · verse 6
Psalm 129:6 in Hindi
वे छत पर की घास के समान हों, जो बढ़ने से पहिले सूख जाती है;
Ve chhat par kee ghaas ke samaan hom, jo badhane se pahile sookh jaatee hai;
Psalm 129:6 in English
- King James Version (KJV)
- Let them be as the grass [upon] the housetops, which withereth afore it groweth up:
- World English Bible (WEB)
- Let them be as the grass on the housetops, which withers before it grows up,
- American Standard Version (ASV)
- Let them be as the grass upon the housetops, Which withereth before it groweth up;
- Bible in Basic English (BBE)
- Let them be like the grass on the house-tops, which is dry before it comes to full growth.
- Darby Translation (DBY)
- Let them be as the grass upon the house-tops, which withereth before it is plucked up,
- Webster's Bible (WBS)
- Let them be as the grass [upon] the house-tops, which withereth before it groweth up:
- Young's Literal Translation (YLT)
- They are as grass of the roofs, That before it was drawn out withereth,
Read in context
- 4यहोवा धर्मी है; उस ने दुष्टों के फन्दों को काट डाला है।
- 5जितने सिरयोन से बैर रखते हैं, उन सभों की आशा टूटे, ओर उनको पीछे हटना पड़े!
- 6वे छत पर की घास के समान हों, जो बढ़ने से पहिले सूख जाती है;
- 7जिस से कोई लवैया अपनी मुट्ठी नहीं भरता, न पूलियों का कोई बान्धनेवाला अपनी अंकवार भर पाता है,
- 8और न आने जानेवाले यह कहते हैं, कि यहोवा की आशीष तुम पर होवे! हम तुम को यहोवा के नाम से आशीर्वाद देते हैं!
Cross references
- Psalm 37:2 भजन संहिता 37:2क्योंकि वे घास की नाई झट कट जाएंगे, और हरी घास की नाई मुर्झा जाएंगे।
- Psalm 92:7 भजन संहिता 92:7कि दुष्ट जो घास की नाईं फूलते- फलते हैं, और सब अनर्थकारी जो प्रफुल्लित होते हैं, यह इसलिये होता है, कि वे सर्वदा के लिये नाश हो जाएं,
- Isaiah 37:27 यशायाह 37:27इसी कारण उनके रहनेवालों का बल घट गया और वे विस्मित और लज्जित हुए: वे मैदान के छोटे छोटे पेड़ों और हरी घास और छत पर की घास और ऐसे अनाज के समान हो गए जो बढ़ने से पहिले ही सूख जाता है।।
- Matthew 13:6 मत्ती 13:6पर सूरज निकलने पर वे जल गए, और जड़ न पकड़ने से सूख गए।
- 2 Kings 19:26 2 राजा 19:26इसी कारण उनके रहनेवालों का बल घट गया; वे विस्मित और लज्जित हुए; वे मैदान के छोटे छोटे पेड़ों और हरी घास और छत पर की घास, और ऐसे अनाज के समान हो गए, जो बढ़ने से पहिले सूख जाता है।
- Jeremiah 17:5–6 यिर्मयाह 17:5–6यहोवा यों कहता है, स्रापित है वह पुरूष जो मनुष्य पर भरोसा रखता है, और उसका सहारा लेता है, जिसका मन यहोवा से भटक जाता है। वह निर्जल देश के अधमूए पेड़ के समान होगा और कभी भलाई न देखेगा। वह निर्जल और निर्जन तथा लोनछाई भूमि पर बसेगा।