Psalms · chapter 144 · verse 12
Psalm 144:12 in Hindi
जब हमारे बेटे जवानी के समय पौधों की नाईं बढ़े हुए हों, और हमारी बेटियां उन कोनेवाले पत्थरों के समान हों, जो मन्दिर के पत्थरों की नाईं बनाए जाएं;
Jab hamaare bete javaanee ke samay paudhom kee naaeem badhe hue hom, aur hamaaree betiyaam un konevaale pattharom ke samaan hom, jo mandir ke pattharom kee naaeem banaae jaaem;
Psalm 144:12 in English
- King James Version (KJV)
- That our sons [may be] as plants grown up in their youth; [that] our daughters [may be] as corner stones, polished [after] the similitude of a palace:
- World English Bible (WEB)
- Then our sons will be like well-nurtured plants, our daughters like pillars carved to adorn a palace.
- American Standard Version (ASV)
- When our sons shall be as plants grown up in their youth, And our daughters as corner-stones hewn after the fashion of a palace;
- Bible in Basic English (BBE)
- Our sons are like tall young plants; and our daughters like the shining stones of a king's house;
- Darby Translation (DBY)
- That our sons may be as plants grown up in their youth; our daughters as corner-columns, sculptured after the fashion of a palace:
- Webster's Bible (WBS)
- That our sons [may be] as plants grown up in their youth; [that] our daughters [may be] as corner stones, polished [after] the similitude of a palace:
- Young's Literal Translation (YLT)
- Because our sons [are] as plants, Becoming great in their youth, Our daughters as hewn stones, Polished — the likeness of a palace,
Read in context
- 10तू राजाओं का उद्धार करता है, और अपने दास दाऊद को तलवार की मार से बचाता है।
- 11तू मुझ को उबार और परदेशियों के वश से छुड़ा ले, जिन के मुंह से व्यर्थ बातें निकलती हैं, और जिनका दहिना हाथ झूठ का दहिना हाथ है।।
- 12जब हमारे बेटे जवानी के समय पौधों की नाईं बढ़े हुए हों, और हमारी बेटियां उन कोनेवाले पत्थरों के समान हों, जो मन्दिर के पत्थरों की नाईं बनाए जाएं;
- 13जब हमारे खत्ते भरे रहें, और उन में भांति भांति का अन्न धरा जाए, और हमारी भेड़- बकरियों हमारे मैदानों में हजारों हजार बच्चे जनें;
- 14जब हमारे बैल खूब लदे हुए हों; जब हमें न विध्न हो और न हमारा कहीं जाना हो, और न हमारे चौकों में रोना- पीटना हो,
Cross references
- Psalm 128:3 भजन संहिता 128:3तेरे घर के भीतर तेरी स्त्री फलवन्त दाखलता सी होगी; तेरी मेज के चारों ओर तेरे बालक जलपाई के पौधे से होंगे।
- Isaiah 44:3–5 यशायाह 44:3–5क्योंकि मैं प्यासी भूमि पर जल और सूखी भूमि पर धाराएं बहाऊंगा; मैं तेरे वंश पर अपनी आत्मा और तेरी सन्तान पर अपनी आशीष उण्डेलूंगा। वे उन मजनुओं की नाईं बढ़ेंगे जो धाराओं के पास घास के बीच में होते हैं। कोई कहेगा, मैं यहोवा का हूं, कोई अपना नाम याकूब रखेगा, कोई अपने हाथ पर लिखेगा, मैं यहोवा का हूं, और अपना कुलनाम इस्राएली बताएगा।।
- 1 Peter 3:3–6 1 पतरस 3:3–6और तुम्हारा सिंगार, दिखावटी न हो, अर्थात् बाल गूंथने, और सोने के गहने, या भांति भांति के कपड़े पहिनना। बरन तुम्हारा छिपा हुआ और गुप्त मनुष्यत्व, नम्रता और मन की दीनता की अविनाशी सजावट से सुसज्जित रहे, क्योंकि परमेश्वर की दृष्टि में इसका मूल्य बड़ा है। और पूर्वकाल में पवित्रा स्त्रियां भी, जो परमेश्वर पर आशा रखती थीं, अपने आप को इसी रीति से संवारती और अपने अपने पति के आधीन रहती थीं। जैसे सारा इब्राहीम की आज्ञा में रहती और उसे स्वामी कहती थी: सो तुम भी यदि भलाई करो, और किसी प्रकार के भय से भयभीत न हो तो उस की बेंटियां ठहरोगी।।
- Psalm 115:14–15 भजन संहिता 115:14–15यहोवा तुम को और तुम्हारे लड़कों को भी अधिक बढ़ाता जाए! यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है, उसकी ओर से तुम अशीष पाए हो।।
- Job 42:15 अय्यूब 42:15और उस सारे देश में एंसी स्त्रियां कहीं न थीं, जो अरयूब की बेटियों के समान सुन्दर हों, और उनके पिता ने उनको उनके भाइयों के संग ही सम्पत्ति दी।
- Song of Solomon 8:8–9 श्रेष्ठगीत 8:8–9हमारी एक छोटी बहिन है, जिसकी छातियां अभी नहीं उभरी। जिस दिन हमारी बहिन के ब्याह की बात लगे, उस दिन हम उसके लिये क्या करें? यदि वह शहरपनाह हो तो हम उस पर चान्दी का कंगूरा बनाएंगे; और यदि वह फाटक का किवाड़ हो, तो हम उस पर देवदारू की लकड़ी के पटरे लगाएंगे॥
- Lamentations 4:2 विलापगीत 4:2सिरयोन के उत्तम पुत्रा जो कुन्दन के तुल्य थे, वे कुम्हार के बनाए हुए मिट्टी के घड़ों के समान कैसे तुच्छ गिने गए हैं!
- Isaiah 3:16–24 यशायाह 3:16–24यहोवा ने यह भी कहा है, क्योंकि सिरयोन की स्त्रियां घमण्ड करतीं और सिर ऊंचे किये आंखें मटकातीं और घुंघुरूओं को छमछमाती हुई ठुमुक ठुमुक चलती हैं, इसलिये प्रभु यहोवा उनके सिर को गंजा करेगा, और उनके तन को उघरवाएगा।। उस समय प्रभु घुंघुरूओं, जालियों, चंद्रहारों, झुमकों, कड़ों, घूंघटों, पगड़ियों, पैकरियों, पटुकों, सुगन्धपात्रों, गण्डों, अंगूठियों, नत्थों, सुन्दर वस्त्रों, कुत्तियों, च रों, बटुओं, दर्पणों, मलमल के वस्त्रों, बुन्दियों, दुपट्टों इन सभों की शोभा को दूर करेगा। और सुगन्ध की सन्ती सड़ाहट, सुन्दर कर्घनी की सन्ती बन्धन की रस्सी, गुंथें हुए बालों की सन्ती गंजापन, सुन्दर पटुके की सन्ती टाट की पेटी, और सुन्दरता की सन्ती दाग होंगे।
- Psalm 127:4–5 भजन संहिता 127:4–5जैसे वीर के हाथ में तीर, वैसे ही जवानी के लड़के होते हैं। क्या ही धन्य है वह पुरूष जिस ने अपने तर्कश को उन से भर लिया हो! वह फाटक के पास शत्रुओं से बातें करते संकोच न करेगा।।
- Proverbs 31:10–27 नीतिवचन 31:10–27भली पत्नी कौन पा सकता है? क्योंकि उसका मूल्य मूंगों से भी बहुत अधिक है। उसके पति के मन में उसके प्रति विश्वास है। और उसे लाभ की घटी नहीं होती। वह अपने जीवन के सारे दिनों में उस से बुरा नहीं, वरन भला ही व्यवहार करती है। वह ऊन और सन ढूंढ़ ढूंढ़कर, अपने हाथों से प्रसन्नता के साथ काम करती है। वह व्योपार के जहाजों की नाई अपनी भोजनवस्तुएं दूर से मंगवाती हैं। वह रात ही को उठ बैठती है, और अपने घराने को भोजन खिलाती है और अपनी लौण्डियों को अलग अलग काम देती है। वह किसी खेत के विषय में सोच विचार करती है और उसे मोल ले लेती है; और अपने परिश्रम के फल से दाख की बारी लगाती है। वह अपनी कटि को बल के फेंटे से कसती है, और अपनी बाहों को दृढ़ बनाती है। वह परख लेती है कि मेरा व्योपार लाभदायक है। रात को उसका दिया नहीं बुझता। वह अटेरन में हाथ लगाती है, और चरखा पकड़ती है। वह दीन के लिये मुट्ठी खोलती है, और दरिद्र के संभालने को हाथ बढ़ाती है। वह अपने घराने के लिये हिम से नहीं डरती, क्योंकि उसके घर के सब लोग लाल कपड़े पहिनते हैं। वह तकिये बना लेती है; उसके वस्त्रा सूक्ष्म सन और बैंजनी रंग के होते हैं। जब उसका पति सभा में देश के पुरनियों के संग बैठता है, तब उसका सन्मान होता है। वह सन के वस्त्रा बनाकर बेचती है; और व्योपारी को कमरबन्द देती है। वह बल और प्रताप का पहिरावा पहिने रहती है, और आनेवाले काल के विषय पर हंसती है। वह बुद्धि की बात बोलती है, और उसके वचन कृपा की शिक्षा के अनुसार होते हैं। वह अपने घराने के चालचलन को ध्यान से देखती है, और अपनी रोटी बिना परिश्रम नहीं खाती।