Psalms · chapter 49 · verse 12
Psalm 49:12 in Hindi
परन्तु मनुष्य प्रतिष्ठा पाकर भी स्थिर नहीं रहता, वह पशुओं के समान होता है, जो मर मिटते हैं।।
Parantu manushy pratishthaa paakar bhee sthir naheem rahataa, vah pashuom ke samaan hotaa hai, jo mar mitate hain..
Psalm 49:12 in English
- King James Version (KJV)
- Nevertheless man [being] in honour abideth not: he is like the beasts [that] perish.
- World English Bible (WEB)
- But man, despite his riches, doesn’t endure. He is like the animals that perish.
- American Standard Version (ASV)
- But man [being] in honor abideth not: He is like the beasts that perish.
- Bible in Basic English (BBE)
- But man, like the animals, does not go on for ever; he comes to an end like the beasts.
- Darby Translation (DBY)
- Nevertheless, man being in honour abideth not: he is like the beasts that perish.
- Webster's Bible (WBS)
- Nevertheless man [being] in honor abideth not: he is like the beasts [that] perish.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And man in honour doth not remain, He hath been like the beasts, they have been cut off.
Read in context
- 10क्योंकि देखने में आता है, कि बुद्धिमान भी मरते हैं, और मूर्ख और पशु सरीखे मनुष्य भी दोनों नाश होते हैं, और अपनी सम्पत्ति औरों के लिये छोड़ जाते हैं।
- 11वे मन ही मन यह सोचते हैं, कि उनका घर सदा स्थिर रहेगा, और उनके निवास पीढ़ी से पीढ़ी तक बने रहेंगे; इसलिये वे अपनी अपनी भूमि का नाम अपने अपने नाम पर रखते हैं।
- 12परन्तु मनुष्य प्रतिष्ठा पाकर भी स्थिर नहीं रहता, वह पशुओं के समान होता है, जो मर मिटते हैं।।
- 13उनकी यह चाल उनकी मूर्खता है, तौभी उनके बाद लोग उनकी बातों से प्रसन्न होते हैं।
- 14वे अधोलोक की मानों भेड़- बकरियां ठहराए गए हैं; मृत्यु उनका गड़ेरिया ठहरी; और बिहान को सीधे लोग उन पर प्रभुता करेंगे; और उनका सुन्दर रूप अधोलोक का कौर हो जाएगा और उनका कोई आधार न रहेगा।
Cross references
- Ecclesiastes 3:18–21 सभोपदेशक 3:18–21मैं ने मन में कहा कि यह इसलिये होता है कि परमेश्वर मनुष्यों को जांचे और कि वे देख सकें कि वे पशु- समान हैं। क्योंकि जैसी मनुष्यों की वैसी ही पशुओं की भी दशा होती है; दोनों की वही दशा होती है, जैसे एक मरता वैसे ही दूसरा भी मरता है। सभों की स्वांस एक सी है, और मनुष्य पशु से कुछ बढ़कर नहीं; सब कुछ व्यर्थ ही है। सब एक स्थान मे जाते हैं; सब मिट्टी से बने हैं, और सब मिट्टी में फिर मिल जाते हैं। क्या मनुष्य का प्राण ऊपर की ओर चढ़ता है और पशुओं का प्राण नीचे की ओर जाकर मिट्टी में मिल जाता है? कौन जानता है?
- Psalm 49:20 भजन संहिता 49:20मनुष्य चाहे प्रतिष्ठित भी हों परन्तु यदि वे समझ नहीं रखते, तो वे पशुओं के समान हैं जो मर मिटते हैं।।
- Psalm 39:5 भजन संहिता 39:5देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं।
- Psalm 82:7 भजन संहिता 82:7तौभी तुम मनुष्यों की नाई मरोगे, और किसी प्रधान के समान गिर जाओगे।।
- Ecclesiastes 9:12 सभोपदेशक 9:12क्योंकि मनुष्य अपना समय नहीं जानता। जैसे मछलियां दुखदाई जाल में बझती और चिड़िये फन्दे में फंसती हैं, वैसे ही मनुष्य दुखदाई समय में जो उन पर अचानक आ पड़ता है, फंस जाते हैं।।
- James 1:10–11 याकूब 1:10–11और धनवान अपनी नीच दशा पर: क्योंकि वह घास के फूल की नाई जाता रहेगा। क्योंकि सूर्य उदय होते ही कड़ी धूप पड़ती है और घास को सुखा देती है, और उसका फूल झड़ जाता है, और उस की शोभा जाती रहती है; उसी प्रकार धनवान भी अपने मार्ग पर चलते चलते धूल में मिल जाएगा।
- 1 Peter 1:24 1 पतरस 1:24क्योंकि हर एक प्राणी घास की नाईं है, और उस की सारी शोभा घास के फूल की नाईं है: घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है।