Psalms · chapter 52 · verse 7
Psalm 52:7 in Hindi
देखो, यह वही पुरूष है जिस ने परमेश्वर को अपनी शरण नहीं माना, परन्तु अपने धन की बहुतायत पर भरोसा रखता था, और अपने को दुष्टता में दृढ़ करता रहा!
Dekho, yah vahee puroosh hai jis ne parameshvar ko apanee sharan naheem maanaa, parantu apane dhan kee bahutaayat par bharosaa rakhataa thaa, aur apane ko dushtataa mem drudh karataa rahaa!
Psalm 52:7 in English
- King James Version (KJV)
- Lo, [this is] the man [that] made not God his strength; but trusted in the abundance of his riches, [and] strengthened himself in his wickedness.
- World English Bible (WEB)
- “Behold, this is the man who didn’t make God his strength, but trusted in the abundance of his riches, and strengthened himself in his wickedness.”
- American Standard Version (ASV)
- Lo, this is the man that made not God his strength, But trusted in the abundance of his riches, And strengthened himself in his wickedness.
- Bible in Basic English (BBE)
- See, this is the man who did not make God his strength, but had faith in his goods and his property, and made himself strong in his wealth.
- Darby Translation (DBY)
- Behold the man that made not God his strength, but put confidence in the abundance of his riches, [and] strengthened himself in his avarice.
- Webster's Bible (WBS)
- Lo, [this is] the man [that] made not God his strength; but trusted in the abundance of his riches, [and] strengthened himself in his wickedness.
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'Lo, the man who maketh not God his strong place, And trusteth in the abundance of his riches, He is strong in his mischiefs.'
Read in context
- 5हे ईश्वर तुझे सदा के लिये नाश कर देगा; वह तुझे पकड़कर तेरे डेरे से निकाल देगा; और जीवतों के लोक में तुझे उखाड़ डालेगा।
- 6तब धर्मी लोग इस घटना को देखकर डर जाएंगे, और यह कहकर उस पर हंसेंगे, कि
- 7देखो, यह वही पुरूष है जिस ने परमेश्वर को अपनी शरण नहीं माना, परन्तु अपने धन की बहुतायत पर भरोसा रखता था, और अपने को दुष्टता में दृढ़ करता रहा!
- 8परन्तु मैं तो परमेश्वर के भवन में हरे जलपाई के वृक्ष के समान हूं। मैं ने परमेश्वर की करूणा पर सदा सर्वदा के लिये भरोसा रखा है।
- 9मैं तेरा धन्यवाद सर्वदा करता रहूंगा, क्योंकि तू ही ने यह काम किया है। मैं तेरे ही नाम की बाट जोहता रहूंगा, क्योंकि यह तेरे पवित्रा भक्तों के साम्हने उत्तम है।।
Cross references
- Jeremiah 17:5 यिर्मयाह 17:5यहोवा यों कहता है, स्रापित है वह पुरूष जो मनुष्य पर भरोसा रखता है, और उसका सहारा लेता है, जिसका मन यहोवा से भटक जाता है।
- Ecclesiastes 8:8 सभोपदेशक 8:8ऐसा कोई मनुष्य नहीं जिसका वश प्राण पर चले कि वह उसे निकलते समय रोक ले, और न कोई मृत्यु के दिन पर अधिकारी होता है; और न उसे लड़ाई से छृट्टी मिल सकती है, और न दुष्ट लोग अपनी दुष्टता के कारण बच सकते हैं।
- Psalm 49:6–20 भजन संहिता 49:6–20जो अपनी सम्पत्ति पर भरोसा रखते, और अपने धन की बहुतायत पर फूलते हैं, उन में से कोई अपने भाई को किसी भांति छुड़ा नहीं सकता है; और न परमेश्वर को उसकी सन्ती प्रायश्चित्त में कुछ दे सकता है, (क्योंकि उनके प्राण की छुड़ौती भारी है वह अन्त तक कभी न चुका सकेंगे)। कोई ऐसा नहीं जो सदैव जीवित रहे, और कब्र को न देखे।। क्योंकि देखने में आता है, कि बुद्धिमान भी मरते हैं, और मूर्ख और पशु सरीखे मनुष्य भी दोनों नाश होते हैं, और अपनी सम्पत्ति औरों के लिये छोड़ जाते हैं। वे मन ही मन यह सोचते हैं, कि उनका घर सदा स्थिर रहेगा, और उनके निवास पीढ़ी से पीढ़ी तक बने रहेंगे; इसलिये वे अपनी अपनी भूमि का नाम अपने अपने नाम पर रखते हैं। परन्तु मनुष्य प्रतिष्ठा पाकर भी स्थिर नहीं रहता, वह पशुओं के समान होता है, जो मर मिटते हैं।। उनकी यह चाल उनकी मूर्खता है, तौभी उनके बाद लोग उनकी बातों से प्रसन्न होते हैं। वे अधोलोक की मानों भेड़- बकरियां ठहराए गए हैं; मृत्यु उनका गड़ेरिया ठहरी; और बिहान को सीधे लोग उन पर प्रभुता करेंगे; और उनका सुन्दर रूप अधोलोक का कौर हो जाएगा और उनका कोई आधार न रहेगा। परन्तु परमेश्वर मेरे प्राण को अधोलोक के वश से छुड़ा लेगा, क्योंकि वही मुझे ग्रहण कर अपनाएगा।। जब कोई धनी हो जाए और उसके घर का विभव बढ़ जाए, तब तू भय न खाना। क्योंकि वह मर कर कुछ भी साथ न ले जाएगा; न उसका विभव उसके साथ कब्र में जाएगा। चाहे वह जीते जी अपने आप को धन्य कहता रहे, (जब तू अपनी भलाई करता है, तब वे लोग तेरी प्रशंसा करते हैं) तौभी वह अपने पुरखाओं के समाज में मिलाया जाएगा, जो कभी उजियाला न देखेंगे। मनुष्य चाहे प्रतिष्ठित भी हों परन्तु यदि वे समझ नहीं रखते, तो वे पशुओं के समान हैं जो मर मिटते हैं।।
- Psalm 73:18–20 भजन संहिता 73:18–20निश्चय तू उन्हें फिसलनेवाले स्थानों में रखता है; और गिराकर सत्यानाश कर देता है। अहा, वे क्षण भर में कैसे उजड़ गए हैं! वे मिट गए, वे घबराते घबराते नाश हो गए हैं। जैसे जागनेहारा स्वप्न को तुच्छ जानता है, वैसे ही हे प्रभु जब तू उठेगा, तब उनको छाया से समझकर तुच्छ जानेगा।।
- John 19:5 यूहन्ना 19:5तक यीशु कांटों का मुकुट और बैंजनी वस्त्रा पहिने हुए बाहर निकला और पीलातुस ने उन से कहा, देखो, यह पुरूष।
- Job 31:24–25 अय्यूब 31:24–25यदि मैं ने सोने का भरोसा किया होता, वा कुन्दन को अपना आसरा कहा होता, वा अपने बहुत से धन वा अपनी बड़ी कमाई के कारण आनन्द किया होता,
- 1 Timothy 6:17 1 तीमुथियुस 6:17इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है।
- Psalm 146:3–5 भजन संहिता 146:3–5तुम प्रधानों पर भरोसा न रखना, न किसी आदमी पर, क्योंकि उस में उद्धार करने की भी शक्ति नहीं। उसका भी प्राण निकलेगा, वही भी मिट्टी में मिल जाएगा; उसी दिन उसकी सब कल्पनाएं नाश हो जाएंगी।। क्या ही धन्य वह है, जिसका सहायक याकूब का ईश्वर है, और जिसका भरोसा अपने परमेश्वर यहोवा पर है।
- Psalm 62:9–10 भजन संहिता 62:9–10सचमुच नीच लोग तो अस्थाई, और बड़े लोग मिथ्या ही हैं; तौल में वे हलके निकलते हैं; वे सब के सब सांस से भी हलके हैं। अन्धेर करने पर भरोसा मत रखो, और लूट पाट करने पर मत फूलो; चाहे धन सम्पति बढ़े, तौभी उस पर मन न लगाना।।
- Isaiah 14:16–17 यशायाह 14:16–17जो तुझे देखेंगे तुझ को ताकते हुए तेरे विषय में सोच सोचकर कहेंगे, क्या यह वही पुरूष है जो पृथ्वी को चैन से रहने न देता था और राज्य राज्य में घबराहट डज्ञल देता था; जो जगत को जंगल बनाता और उसके नगरों को ढा देता था, और अपने बंधुओं को घर जाने नहीं देता था?
- Hosea 12:7–8 होशे 12:7–8वह व्योपारी है, और उसके हाथ में छल का तराजू है; अन्धेर करता ही उसको भाता है। एप्रैम कहता है, मैं धनी हो गया, मैं ने सम्पत्ति प्राप्त की है; मेरे किसी काम में ऐसा अधर्म नहीं पाया गया जिस से पाप लगे।
- Psalm 73:7–11 भजन संहिता 73:7–11उनकी आंखें चर्बीं से झलकती हैं, उनके मन की भवनाएं उमण्डती हैं। वे ठट्ठा मारते हैं, और दुष्टता से अन्धेर की बात बोलते हैं; वे डींग मारते हैं। वे मानों स्वर्ग में बैठे हुए बोलते हैं, और वे पृथ्वी में बोलते फिरते हैं।। तौभी उसकी प्रजा इधर लौट आएगी, और उनको भरे हुए प्याले का जल मिलेगा। फिर वे कहते हैं, ईश्वर कैसे जानता है? क्या परमप्रधान को कुछ ज्ञान है?