Psalms · chapter 73 · verse 16
Psalm 73:16 in Hindi
जब मैं सोचने लगा कि इसे मैं कैसे समझूं, तो यह मेरी दृष्टि में अति कठिन समस्या थी,
Jab maim sochane lagaa ki ise maim kaise samajhoom, to yah meree drushti mem ati kathin samasyaa thee,
Psalm 73:16 in English
- King James Version (KJV)
- When I thought to know this, it [was] too painful for me;
- World English Bible (WEB)
- When I tried to understand this, it was too painful for me—
- American Standard Version (ASV)
- When I thought how I might know this, It was too painful for me;
- Bible in Basic English (BBE)
- When my thoughts were turned to see the reason of this, it was a weariness in my eyes;
- Darby Translation (DBY)
- When I thought to be able to know this, it was a grievous task in mine eyes;
- Webster's Bible (WBS)
- When I thought to know this, it [was] too painful for me;
- Young's Literal Translation (YLT)
- And I think to know this, Perverseness it [is] in mine eyes,
Read in context
- 14क्योंकि मैं दिन भर मार खाता आया हूं और प्रति भोर को मेरी ताड़ना होती आई है।।
- 15यदि मैं ने कहा होता कि मैं ऐसा ही कहूंगा, तो देख मैं तेरे लड़कों की सन्तान के साथ क्रूरता का व्यवहार करता,
- 16जब मैं सोचने लगा कि इसे मैं कैसे समझूं, तो यह मेरी दृष्टि में अति कठिन समस्या थी,
- 17जब तक कि मैं ने ईश्वर के पवित्रा स्थान में जाकर उन लोगों के परिणाम को न सोचा।
- 18निश्चय तू उन्हें फिसलनेवाले स्थानों में रखता है; और गिराकर सत्यानाश कर देता है।
Cross references
- Ecclesiastes 8:17 सभोपदेशक 8:17तब मैं ने परमेश्वर का सारा काम देखा जो सूर्य के नीचे किया जाता है, उसकी थाह मनुष्य नहीं पा सकता। चाहे मनुष्य उसकी खोज में कितना भी परिश्रम करे, तौभी उसको न जान पाएगा; और यद्यिप बुद्धिमान कहे भी कि मैं उसे समझूंगा, तौभी वह उसे न पा सकेगा।।
- Psalm 39:6 भजन संहिता 39:6सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है; सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं; वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा!
- Psalm 77:19 भजन संहिता 77:19तेरे मार्ग समुद्र में है, और तेरा रास्ता गहिरे जल में हुआ; और तेरे पांवों के चिन्ह मालम नहीं होते।
- Psalm 97:2 भजन संहिता 97:2बादल और अन्धकार उसके चारों ओर हैं; उसके सिंहासन का मूल धर्म और न्याय है।
- John 16:18–19 यूहन्ना 16:18–19तब उन्हों ने कहा, यह थोड़ी देर जो वह कहता है, क्या बात है? हम नहीं जानते, कि क्या कहता है। यीशु ने यह जानकर, कि वे मुझ से पूछना चाहते हैं, उन से कहा, क्या तुम आपस में मेरी इस बाते के विषय में पूछ पाछ करते हो, कि थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे।
- Luke 18:32–34 लूका 18:32–34क्योंकि वह अन्यजातियों के हाथ में सौंपा जाएगा, और वे उसे ठट्ठों में उड़ाएंगे; और उसका अपमान करेंगे, और उस पर थूकेंगे। और उसे कोड़े मारेंगे, और घात करेंगे, और वह तीसरे दिन जी उठेगा। और उन्हों ने इन बातों में से कोई बात न समझी: और यह बात उन में छिपी रही, और जो कहा गया था वह उन की समझ में न आया।।
- Proverbs 30:2–3 नीतिवचन 30:2–3निश्चय मैं पशु सरीखा हूं, वरन मनुष्य कहलाने के योग्य भी नहीं; और मनुष्य की समझ मुझ में नहीं है। न मैं ने बुद्धि प्राप्त की है, और न परमपवित्रा का ज्ञान मुझे मिला है।
- Romans 11:33 रोमियों 11:33आहा! परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गंभीर है! उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम हैं!
- Psalm 36:6 भजन संहिता 36:6तेरा धर्म ऊंचे पर्वतों के समान है, तेरे नियम अथाह सागर ठहरे हैं; हे यहोवा तू मनुष्य और पशु दोनों की रक्षा करता है।।