Revelation · chapter 9 · verse 12
Revelation 9:12 in Hindi
पहिली विपत्ति बीत चुकी, देखो अब इन के बाद दो विपत्तियां और होनेवाली हैं।।
Pahilee vipatti beet chukee, dekho ab in ke baad do vipattiyaam aur honevaalee hain..
Revelation 9:12 in English
- King James Version (KJV)
- One woe is past; [and], behold, there come two woes more hereafter.
- World English Bible (WEB)
- The first woe is past. Behold, there are still two woes coming after this.
- American Standard Version (ASV)
- The first Woe is past: behold, there come yet two Woes hereafter.
- Bible in Basic English (BBE)
- The first Trouble is past: see, there are still two Troubles to come.
- Darby Translation (DBY)
- The first woe has passed. Behold, there come yet two woes after these things.
- Webster's Bible (WBS)
- One woe is past; [and] behold, there come two woes more hereafter.
- Young's Literal Translation (YLT)
- The first woe did go forth, lo, there come yet two woes after these things.
Read in context
- 10और उन की पूंछ बिच्छुओं की सी थीं, और उन में डंक थे, और उन्हें पांच महीने तक मनुष्यों को दुख पहुंचाने की जो सामर्थ थी, वह उन की पूंछों में थी।
- 11अथाह कुण्ड का दूत उन पर राजा था, उसका नाम इब्रानी में अबद्दॊन, और यूनानी में अपुल्लयोन है।।
- 12पहिली विपत्ति बीत चुकी, देखो अब इन के बाद दो विपत्तियां और होनेवाली हैं।।
- 13और जब छठवें स्वर्गदूत ने तुरही फंूकी तो जो सोने की वेदी परमेश्वर के साम्हने है उसके सींगो में से मैं ने ऐसा शब्द सुना।
- 14मानों कोई छठवें स्वर्गदूत से जिस के पास तुरही थी कह रहा है कि उन चार स्वर्गदूतों को जो बड़ी नदी फुरात के पास बन्धे हुए हैं, खोल दे।
Cross references
- Revelation 11:14 प्रकाशितवाक्य 11:14दूसरी विपत्ति बीत चुकी, देखो, तीसरी विपत्ति शीघ्र आनेवाली है।।
- Revelation 9:13–21 प्रकाशितवाक्य 9:13–21और जब छठवें स्वर्गदूत ने तुरही फंूकी तो जो सोने की वेदी परमेश्वर के साम्हने है उसके सींगो में से मैं ने ऐसा शब्द सुना। मानों कोई छठवें स्वर्गदूत से जिस के पास तुरही थी कह रहा है कि उन चार स्वर्गदूतों को जो बड़ी नदी फुरात के पास बन्धे हुए हैं, खोल दे। और वे चारों दूत खोल दिए गए जो उस घड़ी, और दिन, और महीने, और वर्ष के लिये मनुष्यों की एक तिहाई के मार डालने को तैयार किए गए थे। और फौजों के सवारों की गिनती बीस करोड़ थी; मैं ने उन की गिनती सुनी। और मुझे इस दर्शन में घोड़े और उन के ऐसे सवार दिखाई दिए, जिन की झिलमें आग, और धूम्रकान्त, और गन्धक की सी थीं, और उन घोड़ों के सिर सिंहों के सिरों के से थे: और उन के मुंह से आग, और धुआं, और गन्धक निकलती थी। इन तीनों मरियों; अर्थात् आग, और धुएं, और गन्धक से जो उसके मुंह से निकलती थीं, मनुष्यों की एक तिहाई मार डाली गई। क्योंकि उन घोड़ों की सामर्थ उन के मुंह, और उन की पूंछों में थी; इसलिये कि उन की पूंछे सांपों की सी थीं, और उन पूंछों के सिर भी थे, और इन्हीं से वे पीड़ा पहुंचाते थे। और बाकी मनुष्यों ने जो उन मरियों से न मरे थे, अपने हाथों के कामों से मन न फिराया, कि दुष्टात्माओं की, और सोने और चान्दी, और पीतल, और पत्थर, और काठ की मूरतों की पूजा न करें, जो न देख, न सुन, न चल सकती हैं। और जो खून, और टोना, और व्यभिचार, और चोरियां, उन्हों ने की थीं, उन से मन न फिराया।।