Romans · chapter 7 · verse 17
Romans 7:17 in Hindi
तो ऐसी दशा में उसका करनेवाला मैं नहीं, बरन पाप है, जो मुझ में बसा हुआ है।
To aisee dashaa mem usakaa karanevaalaa maim naheem, baran paap hai, jo mujh mem basaa huaa hai.
Romans 7:17 in English
- King James Version (KJV)
- Now then it is no more I that do it, but sin that dwelleth in me.
- World English Bible (WEB)
- So now it is no more I that do it, but sin which dwells in me.
- American Standard Version (ASV)
- So now it is no more I that do it, but sin which dwelleth in me.
- Bible in Basic English (BBE)
- So it is no longer I who do it, but the sin living in me.
- Darby Translation (DBY)
- Now then [it is] no longer I [that] do it, but the sin that dwells in me.
- Webster's Bible (WBS)
- Now then it is no more I that do it, but sin that dwelleth in me.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and now it is no longer I that work it, but the sin dwelling in me,
Read in context
- 15और जो मैं करता हूं, उस को नहीं जानता, क्योंकि जो मैं चाहता हूं, वह नहीं किया करता, परन्तु जिस से मुझे घृणा आती है, वही करता हूं।
- 16और यदि, जो मैं नहीं चाहता वही करता हूं, तो मैं मान लेता हूं, कि व्यवस्था भली है।
- 17तो ऐसी दशा में उसका करनेवाला मैं नहीं, बरन पाप है, जो मुझ में बसा हुआ है।
- 18क्योंकि मैं जानता हूं, कि मुझ में अर्थात् मेरे शरीर में कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती, इच्छा तो मुझ में है, परन्तु भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते।
- 19क्योंकि जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूं, वह तो नहीं करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता वही किया करता हूं।
Cross references
- Romans 7:20 रोमियों 7:20परन्तु यदि मैं वही करता हूं, जिस की इच्छा नहीं करता, तो उसका करनेवाला मैं न रहा, परन्तु पाप जो मुझ में बसा हुआ है।
- Philippians 3:8–9 फिलिप्पियों 3:8–9बरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धार्मिकता के साथ, जो व्यवस्था से है, बरन उस धार्मिकता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है।
- Romans 7:18 रोमियों 7:18क्योंकि मैं जानता हूं, कि मुझ में अर्थात् मेरे शरीर में कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती, इच्छा तो मुझ में है, परन्तु भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते।
- James 4:5–6 याकूब 4:5–6क्या तुम यह समझते हो, कि पवित्रा शास्त्रा व्यर्थ कहता है? जिस आत्मा को उस ने हमारे भीतर बसाया है, क्या वह ऐसी लालसा करता है, जिस का प्रतिफल डाह हो? वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है।
- 2 Corinthians 8:12 2 कुरिन्थियों 8:12कयोंकि यदि मन की तैयारी हो तो दान उसके अनुसार ग्रहण भी होता है जो उसके पास है न कि उसके अनुसार जो उसके पास नहीं।
- Romans 7:23 रोमियों 7:23परन्तु मुझे अपने अंगो में दूसरे प्रकार की व्यवस्था दिखाई पड़ती है, जो मेरी बुद्धि की व्यवस्था से लड़ती है, और मुझे पाप की व्यवस्था के बन्धन में डालती है जो मेरे अंगों में है।
- Romans 4:7–8 रोमियों 4:7–8कि धन्य वे हैं, जिन के अधर्म क्षमा हुए, और जिन के पाप ढ़ापे गए। धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्वर पापी न ठहराए।