1 Chronicles · chapter 29 · verse 15
1 Chronicles 29:15 in Hindi
तेरी दृष्टि में हम तो अपने सब पुरखाओं की नाईं पराए और परदेशी हैं; पृथ्वी पर हमारे दिन छाया की नाईं बीते जाते हैं, और हमारा कुछ ठिकाना नहीं।
Teree drushti mem ham to apane sab purakhaaom kee naaeem paraae aur paradeshee haim; pruthvee par hamaare din chhaayaa kee naaeem beete jaate haim, aur hamaaraa kuchh thikaanaa naheen.
1 Chronicles 29:15 in English
- King James Version (KJV)
- For we [are] strangers before thee, and sojourners, as [were] all our fathers: our days on the earth [are] as a shadow, and [there is] none abiding.
- World English Bible (WEB)
- For we are strangers before you and foreigners, as all our fathers were. Our days on the earth are as a shadow, and there is no remaining.
- American Standard Version (ASV)
- For we are strangers before thee, and sojourners, as all our fathers were: our days on the earth are as a shadow, and there is no abiding.
- Bible in Basic English (BBE)
- For we, as all our fathers were, are like men from a strange country before you, who have got a place for a time in the land; our days on the earth are like a shade, and there is no hope of going on.
- Darby Translation (DBY)
- For we are strangers before thee, and sojourners, as all our fathers: our days on the earth are as a shadow, and there is no hope [of life].
- Webster's Bible (WBS)
- For we [are] strangers before thee, and sojourners, as [were] all our fathers: our days on the earth [are] as a shadow, and [there is] no abiding.
- Young's Literal Translation (YLT)
- for sojourners we [are] before Thee, and settlers, like all our fathers; as a shadow [are] our days on the land, and there is none abiding.
Read in context
- 13इसलिये अब हे हमारे परमेश्वर! हम तेरा ध्न्यवाद और तेरे महिमायुक्त नाम की स्तुति करते हैं।
- 14मैं क्या हूँ? और मेरी प्रजा क्या है? कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है।
- 15तेरी दृष्टि में हम तो अपने सब पुरखाओं की नाईं पराए और परदेशी हैं; पृथ्वी पर हमारे दिन छाया की नाईं बीते जाते हैं, और हमारा कुछ ठिकाना नहीं।
- 16हे हमारे परमेश्वर यहोवा! वह जो बड़ा संचय हम ने तेरे पवित्र नाम का एक भवन बनाने के लिये किया है, वह तेरे ही हाथ से हमे मिला था, और सब तेरा ही है।
- 17और हे मेरे परमेश्वर! मैं जानता हूँ कि तू मन को जांचता है और सिधाई से प्रसन्न रहता है; मैं ने तो यह सब कुछ मन की सिधाई और अपनी इच्छा से दिया है; और अब मैं ने आनन्द से देखा है, कि तेरी प्रजा के लोग जो यहां उपस्थित हैं, वह अपनी इच्छा से तेरे लिये भेंट देते हैं।
Cross references
- Leviticus 25:23 लैव्यव्यवस्था 25:23भूमि सदा के लिये तो बेची न जाए, क्योंकि भूमि मेरी है; और उस में तुम परदेशी और बाहरी होगे।
- Psalm 102:11 भजन संहिता 102:11मेरी आयु ढलती हुई छाया के समान है; और मैं आप घास की नाईं सूख चला हूं।।
- Psalm 144:4 भजन संहिता 144:4मनुष्य तो सांस के समान है; उसके दिन ढलती हुई छाया के समान हैं।।
- Job 14:2 अय्यूब 14:2वह फूल की नाई खिलता, फिर तोड़ा जाता हे; वह छाया की रीति पर ढल जाता, और कहीं ठहरता नहीं।
- James 4:14 याकूब 4:14और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा: सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो भाप समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है।
- Psalm 39:12 भजन संहिता 39:12हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, और मेरी दोहाई पर कान लगा; मेरा रोना सुनकर शांत न रह! क्योंकि मैं तेरे संग एक परदेशी यात्री की नाई रहता हूं, और अपने सब पुरखाओं के समान परदेशी हूं।
- Psalm 119:19 भजन संहिता 119:19मैं तो पृथ्वी पर परदेशी हूं; अपनी आज्ञाओं को मुझ से छिपाए न रख!
- Hebrews 11:13–16 इब्रानियों 11:13–16ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्हों ने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं नहीं पाई; पर उन्हें दूर से देखकर आनन्दित हुए और मान लिया, कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं। जो ऐसी ऐसी बातें कहते हैं, वे प्रगट करते हैं, कि स्वदेश की खोज में हैं। और जिस देश से वे निकल आए थे, यदि उस की सुधि करते तो उन्हें लौट जाने का अवसर था। पर वे एक उत्तम अर्थात् स्वर्गीय देश के अभिलाषी हैं, इसी लिये परमेश्वर उन का परमेश्वर कहलाने में उन से नहीं लजाता, सो उस ने उन के लिये एक नगर तैयार किया है।।
- Psalm 90:9 भजन संहिता 90:9क्योंकि हमारे सब दिन तेरे क्रोध में बीत जाते हैं, हम अपने वर्ष शब्द की नाई बिताते हैं।
- Isaiah 40:6–8 यशायाह 40:6–8बोलनेवाले का वचन सुनाई दिया, प्रचार कर! मैं ने कहा, मैं क्या प्रचार करूं? सब प्राणी घास हैं, उनकी शोभा मैदान के फूल के समान है। जब यहोवा की सांस उस पर चलती है, तब घास सूख जाती है, और फूल मुर्झा जाता है; नि:सन्देह प्रजा घास है। घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा।।
- Genesis 47:9 उत्पत्ति 47:9याकूब ने फिरौन से कहा, मैं तो एक सौ तीस वर्ष परदेशी होकर अपना जीवन बीता चुका हूं; मेरे जीवन के दिन थोड़े और दु:ख से भरे हुए भी थे, और मेरे बापदादे परदेशी होकर जितने दिन तक जीवित रहे उतने दिन का मैं अभी नहीं हुआ।
- Ecclesiastes 6:12 सभोपदेशक 6:12क्योंकि मनुष्य के क्षणिक व्यर्थ जीवन में जो वह परछाई की नाई बिताता है कौन जानता है कि उसके लिये अच्छा क्या है? क्योंकि मनुष्य को कौन बता सकता है कि उसके बाद दुनिया में क्या होगा?