1 Corinthians · chapter 10 · verse 31
1 Corinthians 10:31 in Hindi
सो तुम चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर की महीमा के लिये करो।
So tum chaahe khaao, chaahe peeo, chaahe jo kuchh karo, sab kuchh parameshvar kee maheemaa ke liye karo.
1 Corinthians 10:31 in English
- King James Version (KJV)
- Whether therefore ye eat, or drink, or whatsoever ye do, do all to the glory of God.
- World English Bible (WEB)
- Whether therefore you eat or drink, or whatever you do, do all to the glory of God.
- American Standard Version (ASV)
- Whether therefore ye eat, or drink, or whatsoever ye do, do all to the glory of God.
- Bible in Basic English (BBE)
- So then, if it is a question of food or drink, or any other thing, whatever you do, do all to the glory of God.
- Darby Translation (DBY)
- Whether therefore ye eat, or drink, or whatever ye do, do all things to God's glory.
- Webster's Bible (WBS)
- Whether therefore ye eat or drink, or whatever ye do, do all to the glory of God.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Whether, then, ye eat, or drink, or do anything, do all to the glory of God;
Read in context
- 29मेरा मतलब, तेरा विवेक नहीं, परन्तु उस दूसरे का। भला, मेरी स्वतंत्राता दूसरे के विचार से क्यों परखी जाए:
- 30यदि मैं धन्यवाद करके साझी होता हूं, तो जिस पर मैं धन्यवाद करता हूं, उसके कारण मेरी बदनामीं क्यों होती है?
- 31सो तुम चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर की महीमा के लिये करो।
- 32तुम न यहूदियों, न यूनानियों, और न परमेश्वर की कलीसिया के लिये ठोकर का कारण बनो।
- 33जैसा मैं भी सब बातों में सब को प्रसन्न रखता हूं, और अपना नहीं, परन्तु बहुतों का लाभ ढूंढ़ता हूं, कि वे उद्धार पाएं।
Cross references
- Colossians 3:17 कुलुस्सियों 3:17और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।।
- Colossians 3:23 कुलुस्सियों 3:23और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझकर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो।
- 1 Peter 4:11 1 पतरस 4:11यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों मे यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन।।
- Deuteronomy 12:7 व्यवस्थाविवरण 12:7और वहीं तुम अपने परमेश्वर यहोवा के साम्हने भोजन करना, और अपने अपने घराने समेत उन सब कामों पर, जिन में तुम ने हाथ लगाया हो, और जिन पर तुम्हारे परमेश्वर यहोवा की आशीष मिली हो, आनन्द करना।
- Deuteronomy 12:18 व्यवस्थाविवरण 12:18उन्हें अपने परमेश्वर यहोवा के साम्हने उसी स्थान पर जिसको वह चुने अपने बेटे बेटियों और दास दासियों के, और जो लेवीय तेरे फाटकों के भीतर रहेंगे उनके साथ खाना, और तू अपने परमेश्वर यहोवा के साम्हने अपने सब कामों पर जिन में हाथ लगाया हो आनन्द करना।
- Zechariah 7:5–6 जकर्याह 7:5–6सब साधारण लोगों से और याजकों से कह, कि जब तुम इन सत्तर वर्षों के बीच पांचवें और सातवें महीनों में उपवास और विलाप करते थे, तब क्या तुम सचमुच मेरे ही लिये उपवास करते थे? और जब तुम खाते- पीते हो, तो क्या तुम अपने ही लिये नहीं खाते, और क्या तुम अपने ही लिये नहीं पीते हो?
- Deuteronomy 12:12 व्यवस्थाविवरण 12:12और वहां तुम अपने अपने बेटे बेटियों और दास दासियों सहित अपने परमेश्वर यहोवा के साम्हने आनन्द करना, और जो लेवीय तुम्हारे फाटकों में रहे वह भी आनन्द करे, क्योंकि उसका तुम्हारे संग कोई निज भाग वा अंश न होगा।
- Luke 11:41 लूका 11:41परन्तु हां, भीतरवाली वस्तुओं को दान कर दो, तो देखो, सब कुछ तुम्हारे लिये शुद्ध हो जाएगा।।
- Nehemiah 8:16–18 नहेमायाह 8:16–18सो सब लोग बाहर जाकर डालियां ले आए, और अपने अपने घर की छत पर, और अपने आंगनों में, और परमेश्वर के भवन के आंगनों में, और जलफाटक के चौक में, और एप्रैम के फाटक के चौक में, झोंपड़ियां बना लीं। वरन सब मणडली के लोग जितने बन्धुआई से छूटकर लौट आए थे, झोंपड़ियां बना कर उन में टिके। नून के पुत्रा यहोशू के दिनों से लेकर उस दिन तक इस्राएलियों ने ऐसा नहीं किया था। और उस समय बहुत बड़ा आनन्द हुआ। फिर पहीले दिन से पिछले दिन तक एज्रा ने प्रतिदिन परमेश्वर की व्यवस्था की पुस्तक में से पढ़ पढ़कर सुनाया। यों वे सात दिन तक पर्व को मानते रहे, और साठवें दिन नियम के अनुसार महासभा हुई।
- 1 Corinthians 7:34 1 कुरिन्थियों 7:34विवाहिता और अविवाहिता में भी भेद है: अविवाहिता प्रभु की चिन्ता में रहती है, कि वह देह और आत्मा दोनों में पवित्रा हो, परन्तु विवाहिता संसार की चिन्ता में रहती है, कि अपने पति को प्रसन्न रखे।