2 Chronicles · chapter 32 · verse 3
2 Chronicles 32:3 in Hindi
हिजकिरयाह ने अपने हाकिमों और वीरों के साथ यह सम्मति की, कि नगर के बाहर के सोतों को पठवा दें; और उन्हों ने उसकी सहायता की।
Hijakirayaah ne apane haakimom aur veerom ke saath yah sammati kee, ki nagar ke baahar ke sotom ko pathavaa dem; aur unhom ne usakee sahaayataa kee.
2 Chronicles 32:3 in English
- King James Version (KJV)
- He took counsel with his princes and his mighty men to stop the waters of the fountains which [were] without the city: and they did help him.
- World English Bible (WEB)
- he took counsel with his princes and his mighty men to stop the waters of the springs which were outside of the city, and they helped him.
- American Standard Version (ASV)
- he took counsel with his princes and his mighty men to stop the waters of the fountains which were without the city; and they helped him.
- Bible in Basic English (BBE)
- He took up with his rulers and men of war the question of stopping up the water-springs outside the town; and they gave him their support.
- Darby Translation (DBY)
- he took counsel with his princes and his mighty men to stop the fountains of waters that were outside the city; and they helped him.
- Webster's Bible (WBS)
- He took counsel with his princes and his mighty men to stop the waters of the fountains which [were] without the city: and they helped him.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and he taketh counsel with his heads and his mighty ones, to stop the waters of the fountains that [are] at the outside of the city — and they help him,
Read in context
- 1इन बातों और ऐसे प्रबन्ध के बाद अश्शूर का राजा सन्हेरीब ने आकर यहूदा में प्रवेश कर ओर गढ़वाले नगरों के विरूद्ध डेरे डालकर उनको अपने लाभ के लिये लेना चाहा।
- 2यह देखकर कि सन्हेरीब निकट आया है और यरूशलेम से लड़ने की मनसा करता है,
- 3हिजकिरयाह ने अपने हाकिमों और वीरों के साथ यह सम्मति की, कि नगर के बाहर के सोतों को पठवा दें; और उन्हों ने उसकी सहायता की।
- 4इस पर बहुत से लोग इकट्ठे हुए, और यह कहकर, कि अश्शूर के राजा क्यों यहां आएं, और आकर बहुत पानी पाएं, उन्होंने सब सोतों को पाट दिया और उस नदी को सुखा दिया जो देश के मध्य होकर बहती थी।
- 5फिर हिजकिरयाह ने हियाव बान्धकर शहरपनाह जहां कहीं टूटी थी, वहां वहां उसको बनवाया, और उसे गुम्मटों के बराबर ऊंचा किया और बाहर एक और शहरपनाह बनवाई, और दाऊदपुर में मिल्लो को दृढ़ किया। और बहुत से तीर और ढालें भी बनवाई।
Cross references
- Proverbs 15:22 नीतिवचन 15:22बिना सम्मति की कल्पनाएं निष्फल हुआ करती हैं, परन्तु बहुत से मंत्रियों की सम्मत्ति से बात ठहरती है।
- Proverbs 20:18 नीतिवचन 20:18सब कल्पनाएं सम्मत्ति ही से स्थिर होती हैं; और युक्ति के साथ युद्ध करना चाहिये।
- Proverbs 24:6 नीतिवचन 24:6इसलिये जब तू युद्ध करे, तब युक्ति के साथ करना, विजय बहुत से मन्त्रियों के द्वारा प्राप्त होती है।
- 2 Kings 20:20 2 राजा 20:20हिजकिरयाह के और सब काम और उसकी सारी वीरता और किस रीति उस ने एक पोखरा और नाली खुदवाकर नगर में पानी पहुंचा दिया, यह सग क्या यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखा है?
- 2 Chronicles 30:2 2 इतिहास 30:2राजा और उसके हाकिमों और यरूशलेम की मणडली ने सम्मति की थी कि फसह को दूसरे महीने में मनाएं।
- 2 Kings 18:20 2 राजा 18:20तू जो कहता है, कि मेरे यहां युठ्ठ के लिये युक्ति और पराक्रम है, सो तो केवल बात ही बात है। तू किस पर भरोसा रखता है कि तू ने मुझ से बलवा किया है?
- Romans 11:34 रोमियों 11:34प्रभु कि बुद्धि को किस ने जाना? या उसका मंत्री कौन हुआ?
- Isaiah 22:8–11 यशायाह 22:8–11उस दिन तू ने वन नाम भवन के अस्त्रा- शस्त्रा का स्मरण किया, और तू ने दाऊदपुर की शहरपनाह की दरारों को देखा कि वे बहुत हैं, और तू ने निचले पोखरे के जल को इकट्ठा किया। और यरूशलेम के घरों को गिनकर शहरपनाह के दृढ़ करने के लिये घरों को ढा दिया। तू ने दोनों भीतों के बीच पुराने पोखरे के जल के लिये एक कुंड खोदा। परन्तु तू ने उसके कर्ता को स्मरण नहीं किया, जिस ने प्राचीनकाल से उसको ठहरा रखा था, और न उसकी ओर तू ने दृष्टि की।।
- Isaiah 40:13 यशायाह 40:13किस ने यहोवा की आत्मा को मार्ग बताया वा उसका मन्त्री होकर उसको ज्ञान सिखाया है?