2 Corinthians · chapter 1 · verse 5
2 Corinthians 1:5 in Hindi
क्योंकि जैसे मसीह के दुख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्ति भी मसीह के द्वारा अधिक हाती है।
Kyonki jaise maseeh ke dukh ham ko adhik hote haim, vaise hee hamaaree shaanti bhee maseeh ke dvaaraa adhik haatee hai.
2 Corinthians 1:5 in English
- King James Version (KJV)
- For as the sufferings of Christ abound in us, so our consolation also aboundeth by Christ.
- World English Bible (WEB)
- For as the sufferings of Christ abound to us, even so our comfort also abounds through Christ.
- American Standard Version (ASV)
- For as the sufferings of Christ abound unto us, even so our comfort also aboundeth through Christ.
- Bible in Basic English (BBE)
- For as we undergo more of the pain which Christ underwent, so through Christ does our comfort become greater.
- Darby Translation (DBY)
- Because, even as the sufferings of the Christ abound towards us, so through the Christ does our encouragement also abound.
- Webster's Bible (WBS)
- For as the sufferings of Christ abound in us, so our consolation also aboundeth by Christ.
- Young's Literal Translation (YLT)
- because, as the sufferings of the Christ do abound to us, so through the Christ doth abound also our comfort;
Read in context
- 3हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्ति का परमेश्वर है।
- 4वह हमारे सब क्लेशों में शान्ति देता है; ताकि हम उस शान्ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्लेश में हों।
- 5क्योंकि जैसे मसीह के दुख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्ति भी मसीह के द्वारा अधिक हाती है।
- 6यदि हम क्लेश पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्ति पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्ति के लिये है; जिस के प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्लेशों को सह लेते हो, जिन्हें हम भी सहते हैं।
- 7और हमारी आशा तुम्हारे विषय में दृढ़ है; क्योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्ति के भी सहभागी हो।
Cross references
- Colossians 1:24 कुलुस्सियों 1:24अब मैं उन दुखों के कारण आनन्द करता हूं, जो तुम्हारे लिये उठाता हूं, और मसीह के क्लेशों की घटी उस की देह के लिये, अर्थात् कलीसिया के लिये, अपने शरीर में पूरी किए देता हूं।
- Philippians 3:10 फिलिप्पियों 3:10और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानू, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं।
- 2 Thessalonians 2:16–17 2 थिस्सलुनीकियों 2:16–17हमारा प्रभु यीशु मसीह आप ही, और हमारा पिता परमेश्वर जिस ने हम से प्रेम रखा, और अनुग्रह से अनन्त शान्ति और उत्तम आशा दी है। तुम्हारे मनों में शान्ति दे, और तुम्हें हर एक अच्छे काम, और वचन में दृढ़ करे।।
- Philippians 1:20 फिलिप्पियों 1:20मैं तो यही हार्दिक लालसा और आशा रखता हूं, कि मैं किसी बात में लज्जित न होऊं, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूं वा मर जाऊं।
- 2 Corinthians 4:10–11 2 कुरिन्थियों 4:10–11हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो। क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो।
- Philippians 2:1 फिलिप्पियों 2:1सो यदि मसीह में कुछ शान्ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
- 2 Corinthians 11:23–30 2 कुरिन्थियों 11:23–30(मैं पागल की नाई कहता हूं) मैं उन से बढ़कर हूं! अधिक परिश्रम करने में; बार बार कैद होने में; कोड़े खाते में; बार बार मृत्यु के जोखिमों में। पांच बार मैं ने यहूदियों के हाथ से उन्तालीस उन्तालीस कोड़े खाए। तीन बार मैं ने बेंतेें खाई; एक बार पत्थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक राज दिन मैं ने समुद्र में काटा। मैं बार बार यात्राओं में; नदियों के जोखिमों में; डाकुओं के जोखिमों में; अपने जातिवालों से जोखिमों में; अन्यजातियों से जोखिमों में; नगरों में के जाखिमों में; जंगल के जोखिमों में; समुद्र के जाखिमों में; झूठे भाइयों के बीच जोखिमों में; परिश्रम और कष्ट में; बार बार जागते रहने में; भूख- पियास में; बार बार उपवास करते में; जाड़े में; उघाड़े रहने में। और और बातों को छोड़कर जिन का वर्णन मैं नहीं करता सब कलीसियाओं की चिन्ता प्रतिदिन मुझे दबाती है। किस की निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? किस के ठोकर खाने से मेरा जी नहीं दुखता? यदि घमण्उ करना अवश्य है, तो मैं अपनी निर्बलता की बातों पर करूंगा।
- 1 Corinthians 4:10–13 1 कुरिन्थियों 4:10–13हम मसीह के लिये मूर्ख है; परन्तु तुम मसीह में बुद्धिमान हो: हम निर्बल हैं परन्तु तुम बलवान हो: तुम आदर पाते हो, परन्तु हम निरादर होते हैं। हम इस घड़ी तक भूखे- प्यासे और नंगे हैं, और घूसे खाते हैं और मारे मारे फिरते हैं; और अपने ही हाथों के काम करके परिश्रम करते हैं। लोग बुरा कहते हैं, हम आशीष देते हैं; वे सताते हैं, हम सहते हैं। वे बदना करते हैं, हम बिनती करते हैं: हम आज तक जगत के कूड़े और सब वस्तुओं की खुरचन की नाई ठहरे हैं।।
- Luke 2:25 लूका 2:25और देखो, यरूशलेम में शमौन नाम एक मनुष्य था, और वह मनुष्य धर्मी और भक्त था; और इस्राएल की शान्ति की बाट जोह रहा था, और पवित्रा आत्मा उस पर था।
- Acts 9:4 प्रेरितों के काम 9:4और वह भूमि पर गिर पड़ा, और यह शब्द सुना, कि हे शाऊल, हे शाऊल, तू मुझे क्यों सताता है?
Original words (Greek)
- For · G3754ὅτι hóti
- as · G2531καθώς kathṓs
- sufferings · G3804πάθημα páthēma
- Christ · G5547Χριστός Christós
- abound · G4052περισσεύω perisseúō
- in · G1519εἰς eis
- us · G2248ἡμᾶς hēmâs
- so · G3779οὕτω hoútō
- our · G2257ἡμῶν hēmōn
- consolation · G3874παράκλησις paráklēsis
- also · G2532καί kaí
- aboundeth · G4052περισσεύω perisseúō
- by · G1223διά diá
- Christ · G5547Χριστός Christós