Acts · chapter 26 · verse 28
Acts 26:28 in Hindi
अब अग्रिप्पा ने पौलुस से कहा तू थोड़े ही समझाने से मुझे मसीही बनाना चाहता है?
Ab agrippaa ne paulus se kahaa too thode hee samajhaane se mujhe maseehee banaanaa chaahataa hai?
Acts 26:28 in English
- King James Version (KJV)
- Then Agrippa said unto Paul, Almost thou persuadest me to be a Christian.
- World English Bible (WEB)
- Agrippa said to Paul, “With a little persuasion are you trying to make me a Christian?”
- American Standard Version (ASV)
- And Agrippa [said] unto Paul, With but little persuasion thou wouldest fain make me a Christian.
- Bible in Basic English (BBE)
- And Agrippa said to Paul, A little more and you will be making me a Christian.
- Darby Translation (DBY)
- And Agrippa [said] to Paul, In a little thou persuadest me to become a Christian.
- Webster's Bible (WBS)
- Then Agrippa said to Paul, Almost thou persuadest me to be a Christian.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And Agrippa said unto Paul, 'In a little thou dost persuade me to become a Christian!'
Read in context
- 26राजा भी जिस के साम्हने मैं निडर होकर बोल रहा हूं, ये बातें जानता है, और मुझे प्रतीति है, कि इन बातों में से कोई उस से छिपी नहीं, क्योंकि उस घटना तो कोने में नहीं हुई।
- 27हे राजा अग्रिप्पा, क्या तू भविष्यद्वक्ताओं की प्रतीति करता है? हां, मैं जानता हूं, कि तू प्रतीति करता है।
- 28अब अग्रिप्पा ने पौलुस से कहा तू थोड़े ही समझाने से मुझे मसीही बनाना चाहता है?
- 29पौलुस ने कहा, परमेश्वर से मेरी प्रार्थना यह है कि क्या थोड़े में, क्या बहुत में, केवल तू ही नहीं, परन्तु जितने लोग आज मेरी सुनते हैं, इन बन्धनों को छोड़ वे मेरे समान हो जाएं।।
- 30तब राजा और हाकिम और बिरनीके और उन के साथ बैठनेवाले उठ खड़े हुए।
Cross references
- Matthew 10:18 मत्ती 10:18तुम मेरे लिये हाकिमों ओर राजाओं के साम्हने उन पर, और अन्यजातियों पर गवाह होने के लिये पहुंचाए जाओगे।
- Acts 11:26 प्रेरितों के काम 11:26और जब उन से मिला तो उसे अन्ताकिया में लाया, और ऐसा हुआ कि वे एक वर्ष तक कलीसिया के साथ मिलते और बहुत लोगों को उपदेश देते रहे, और चेले सब से पहिले अन्ताकिया ही में मसीही कहलाए।।
- Acts 24:25 प्रेरितों के काम 24:25और जब वह धर्म और संयम और आनेवाले न्याय की चर्चा करता था, तो फेलिक्स ने भयमान होकर उत्तर दिया, कि अभी तो जा: अवसर पाकर मैं तुझे फिर बुलाऊंगा।
- Mark 10:17–22 मरकुस 10:17–22और जब वह निकलकर मार्ग में जाता था, तो एक मनुष्य उसके पास दौड़ता हुआ आया, और उसके आगे घुटने टेककर उस से पूछा? हे उत्तम गुरू, अनन्त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्यां करूं? यीशु ने उस से कहा, तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक अर्थात् परमेश्वर। तू आज्ञाओं को तो जानता है; हत्या न करना, व्यभिचार न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, छल न करना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना। उस ने उस से कहा, हे गुरू, इन सब को मैं लड़कपन से मानता आया हूं। यीशु ने उस पर दृष्टि करके उस से प्रेम किया, और उस से कहा, तुझ में एक बात की घटी है; जा, जो कुछ तेरा है, उसे बेच कर कंगालों को दे, और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले। इस बात से उसके चिहरे पर उदासी छा गई, और वह शोक करता हुआ चला गया, क्योंकि वह बहुत धनी था।
- 2 Corinthians 4:2 2 कुरिन्थियों 4:2परन्तु हम ने लज्जा के गुप्त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट करके, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं।
- 1 Peter 4:16 1 पतरस 4:16पर यदि मसीही होने के कारण दुख पाए, तो लज्जित न हो, पर इस बात के लिये परमेश्वर की महिमा करे।
- Acts 26:29 प्रेरितों के काम 26:29पौलुस ने कहा, परमेश्वर से मेरी प्रार्थना यह है कि क्या थोड़े में, क्या बहुत में, केवल तू ही नहीं, परन्तु जितने लोग आज मेरी सुनते हैं, इन बन्धनों को छोड़ वे मेरे समान हो जाएं।।
- Ezekiel 33:31 यहेजकेल 33:31वे प्रजा की नाईं तेरे पास आते और मेरी प्रजा बन कर तेरे साम्हने बैठ कर तेरे वचन सुनते हैं, परन्तु वे उन पर चलते नहीं; मुंह से तो वे बहुत प्रेम दिखाते हैं, परन्तु उनका मन लालच ही में लगा रहता है।
- James 1:23–24 याकूब 1:23–24क्योंकि जो कोई वचन का सुननेवाला हो, और उस पर चलनेवाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है। इसलिये कि वह अपने आप को देखकर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था।
- Mark 6:20 मरकुस 6:20क्योंकि हेरोदेस यूहन्ना को धर्मी और पवित्रा पुरूष जानकर उस से डरता था, और उसे बचाए रखता था, और उस की सुनकर बहुत घबराता था, पर आनन्द से सुनता था।