Ecclesiastes · chapter 1 · verse 8
Ecclesiastes 1:8 in Hindi
सब बातें परिश्रम से भरी हैं; मनुष्य इसका वर्णन नहीं कर सकता; न तो आंखें देखने से तृप्त होती हैं, और न कान सुनने से भरते हैं।
Sab baatem parishram se bharee haim; manushy isakaa varnan naheem kar sakataa; na to aankhem dekhane se trupt hotee haim, aur na kaan sunane se bharate hain.
Ecclesiastes 1:8 in English
- King James Version (KJV)
- All things [are] full of labour; man cannot utter [it:] the eye is not satisfied with seeing, nor the ear filled with hearing.
- World English Bible (WEB)
- All things are full of weariness beyond uttering. The eye is not satisfied with seeing, nor the ear filled with hearing.
- American Standard Version (ASV)
- All things are full of weariness; man cannot utter [it]: the eye is not satisfied with seeing, nor the ear filled with hearing.
- Bible in Basic English (BBE)
- All things are full of weariness; man may not give their story: the eye has never enough of its seeing, or the ear of its hearing.
- Darby Translation (DBY)
- All things are full of toil; none can express it. The eye is not satisfied with seeing, nor the ear filled with hearing.
- Webster's Bible (WBS)
- All things [are] full of labor; man cannot utter [it] : the eye is not satisfied with seeing, nor the ear filled with hearing.
- Young's Literal Translation (YLT)
- All these things are wearying; a man is not able to speak, the eye is not satisfied by seeing, nor filled is the ear from hearing.
Read in context
- 6वायु दक्खिन की ओर बहती है, और उत्तर की ओर घूमती जाती है; वह घूमती और बहती रहती है, और अपने चक्करों में लौट आती है।
- 7सब नदियां समुद्र में जा मिलती हैं, तौभी समुद्र भर नहीं जाता; जिस स्थान से नदियां निकलती हैं; उधर ही को वे फिर जाती हैं।
- 8सब बातें परिश्रम से भरी हैं; मनुष्य इसका वर्णन नहीं कर सकता; न तो आंखें देखने से तृप्त होती हैं, और न कान सुनने से भरते हैं।
- 9जो कुछ हुआ था, वही फिर होगा, और जो कुछ बन चुका है वही फिर बनाया जाएगा; और सूर्य के नीचे कोई बात नई नहीं है।
- 10क्या ऐसी कोई बात है जिसके विषय में लोग कह सकें कि देख यह नई है? यह तो प्राचीन युगों में वर्तमान थी।
Cross references
- Proverbs 27:20 नीतिवचन 27:20जैसे अधोलोक और विनाशलोक, वैसे ही मनुष्य की आंखें भी तृप्त नहीं होती।
- Matthew 11:28 मत्ती 11:28हे सब परिश्रम करनेवालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।
- Ecclesiastes 4:8 सभोपदेशक 4:8कोई अकेला रहता और उसका कोई नहीं है; न उसके बेटा है, न भाई है, तौभी उसके परिश्रम का अन्त नहीं होता; न उसकी आंखें धन से सन्तुष्ट होती हैं, और न वह कहता है, मैं किस के लिये परिश्रम करता और अपने जीवन को सुखरहित रखता हूं? यह भी व्यर्थ और निरा दु:खभरा काम है।
- Proverbs 30:15–16 नीतिवचन 30:15–16जैसे जोंक की दो बेछियां होती हैं, जो कहती हैं दे, दे, वैसे ही तीन वस्तुएं हैं, जो तृप्त नहीं होतीं; वरन चार हैं, जो कभी नहीं कहतीं, बस। अधोलोक और बांझ की कोख, भूमि जो जल पी पीकर तृप्त नहीं होती, और आग जो कभी नहीं कहती, बस।।
- Ecclesiastes 2:26 सभोपदेशक 2:26जो मनुष्य परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा है, उसको वह बुद्धि और ज्ञान और आनन्द देता है; परन्तु पापी को वह दु:खभरा काम ही देता है कि वह उसका देने के लिये संचय करके ढेर लगाए जो परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा हो। यह भी व्यर्थ और वायु को पकड़ना है।।
- Romans 8:22–23 रोमियों 8:22–23क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कहरती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है। और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कहरते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात् अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं।
- Ecclesiastes 7:24–26 सभोपदेशक 7:24–26वह जो दूर और अत्यन्त गहिरा है, उसका भेद कौन पा सकता है? मैं ने अपना मन लगाया कि बुद्धि के विषय में जान लूं; कि खोज निकालूं और उसका भेद जानूं, और कि दुष्टता की मूर्खता और मूर्खता जो निरा बावलापन है जानूं। और मैं ने मृत्यु से भी अधिक दृ:खदाई एक वस्तु पाई, अर्थात् वह स्त्री जिसका मन फन्दा और जाल है और जिसके हाथ हथकड़ियां है; (जिस पुरूष से परमेश्वर प्रसन्न है वही उस से बचेगा, परन्तु पापी उसका शिकाल होगा)
- Psalm 63:5 भजन संहिता 63:5मेरा जीव मानो चर्बी और चिकने भोजन से तृप्त होगा, और मैं जयजयकार करके तेरी स्तुति करूंगा।
- Ecclesiastes 5:10–11 सभोपदेशक 5:10–11जो रूपये से प्रीति रखता है वह रूपये से तृप्त न होगा; और न जो बहुत धन से प्रीति रखता है, लाभ से: यह भी व्यर्थ है। जब सम्पत्ति बढ़ती है, तो उसके खानेवाले भी बढ़ते हैं, तब उसके स्वामी को इसे छोड़ और क्या लाभ होता है कि उस सम्पत्ति को अपनी आंखों से देखे?
- Matthew 5:6 मत्ती 5:6धन्य हैं वे, जो दयावन्त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी।
- Revelation 7:16–17 प्रकाशितवाक्य 7:16–17वे फिर भूखे और प्यासे न होंगे: ओर न उन पर धूप, न कोई तपन पड़ेगी। क्योंकि मेम्ना जो सिंहासन के बीच में है, उन की रखवाली करेगा; और उन्हें जीवन रूपी जल के सोतों के पास ले जाया करेगा, और परमेश्वर उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा।।
- Ecclesiastes 2:11 सभोपदेशक 2:11तब मैं ने फिर से अपने हाथों के सब कामों को, और अपने सब परिश्रम को देखा, तो क्या देखा कि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है, और संसार में कोई लाभ नहीं।।