Psalms · chapter 127 · verse 2
Psalm 127:2 in Hindi
तुम जो सवेरे उठते और देर करके विश्राम करते और दु:ख भरी रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है; क्योंकि वह अपने प्रियों को योंही नींद दान करता है।।
Tum jo savere uthate aur der karake vishraam karate aur du:kh bharee rotee khaate ho, yah sab tumhaare liye vyarth hee hai; kyonki vah apane priyom ko yonhee neend daan karataa hai..
Psalm 127:2 in English
- King James Version (KJV)
- [It is] vain for you to rise up early, to sit up late, to eat the bread of sorrows: [for] so he giveth his beloved sleep.
- World English Bible (WEB)
- It is vain for you to rise up early, to stay up late, eating the bread of toil, for he gives sleep to his loved ones.
- American Standard Version (ASV)
- It is vain for you to rise up early, To take rest late, To eat the bread of toil; [For] so he giveth unto his beloved sleep.
- Bible in Basic English (BBE)
- It is of no use for you to get up early, and to go late to your rest, with the bread of sorrow for your food; for the Lord gives to his loved ones in sleep.
- Darby Translation (DBY)
- It is vain for you to rise up early, to lie down late, to eat the bread of sorrows: so to his beloved one he giveth sleep.
- Webster's Bible (WBS)
- [It is] vain for you to rise early, to sit up late, to eat the bread of sorrows: [for] so he giveth his beloved sleep.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Vain for you who are rising early, Who delay sitting, eating the bread of griefs, So He giveth to His beloved one sleep.
Read in context
- 1यदि घर को यहोवा न बानाए, तो उसके बनानेवालों को परिश्रम व्यर्थ होगा। यदि नगर की रक्षा यहोवा न करे, तो रखवाले का जागना व्यर्थ ही होगा।
- 2तुम जो सवेरे उठते और देर करके विश्राम करते और दु:ख भरी रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है; क्योंकि वह अपने प्रियों को योंही नींद दान करता है।।
- 3देखे, लड़के यहोवा के दिए हुए भाग हैं, गर्भ का फल उसकी ओर से प्रतिफल है।
- 4जैसे वीर के हाथ में तीर, वैसे ही जवानी के लड़के होते हैं।
Cross references
- Ecclesiastes 5:12 सभोपदेशक 5:12परिश्रम करनेवाला चाहे थोड़ा खाए, या बहुत, तौभी उसकी नींद सुखदाई होती है; परन्तु धनी के धन के बढ़ने के कारण उसको नींद नहीं आती।
- Psalm 4:8 भजन संहिता 4:8मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है।।
- Job 11:18 अय्यूब 11:18और तुझे आशा होगी, इस कारण तू निर्भय रहेगा; और अपने चारों ओर देख देखकर तू निर्भय विश्राम कर सकेगा।
- Psalm 3:5 भजन संहिता 3:5मैं लेटकर सो गया; फिर जाग उठा, क्योंकि यहोवा मुझे सम्हालता है।
- Jeremiah 31:26 यिर्मयाह 31:26इस पर मैं जाग उठा, और देखा, ओर मेरी नीन्द मुझे मीठी लगी।
- Ecclesiastes 2:20–23 सभोपदेशक 2:20–23तब मैं अपने मन में उस सारे परिश्रम के विषय जो मैं ने धरती पर किया था निराश हुआ, क्योंकि ऐसा मनुष्य भी है, जिसका कार्य परिश्रम और बुद्धि और ज्ञान से होता है और सफल भी होता है, तौभी उसको ऐसे मनुष्य के लिये छोड़ जाना पड़ता है, जिस ने उस में कुछ भी परिश्रम न किया हो। यह भी व्यर्थ और बहुत ही बुरा है। मनुष्य जो धरती पर मन लगा लगाकर परिश्रम करता है उस से उसको क्या लाभ होता है? उसके सब दिन तो दु:खों से भरे रहते हैं, और उसका काम खेद के साथ होता है; रात को भी उसका मन चैन नहीं पाता। यह भी व्यर्थ ही है।
- Ezekiel 34:25 यहेजकेल 34:25मैं उनके साथ शान्ति की वाचा बान्धूंगा, और दुष्ट जन्तुओं को देश में न रहने दूंगा; सो वे जंगल में निडर रहेंगे, और वन में सोएंगे।
- Ecclesiastes 1:14 सभोपदेशक 1:14मैं ने उन सब कामों को देखा जो सूर्य के नीचे किए जाते हैं; देखो वे सब व्यर्थ और मानो वायु को पकड़ना है।
- Proverbs 31:15–18 नीतिवचन 31:15–18वह रात ही को उठ बैठती है, और अपने घराने को भोजन खिलाती है और अपनी लौण्डियों को अलग अलग काम देती है। वह किसी खेत के विषय में सोच विचार करती है और उसे मोल ले लेती है; और अपने परिश्रम के फल से दाख की बारी लगाती है। वह अपनी कटि को बल के फेंटे से कसती है, और अपनी बाहों को दृढ़ बनाती है। वह परख लेती है कि मेरा व्योपार लाभदायक है। रात को उसका दिया नहीं बुझता।
- Ecclesiastes 6:7 सभोपदेशक 6:7मनुष्य का सारा परिश्रम उसके पेट के लिये होता है तौभी उसका मन नहीं भरता।
- Psalm 39:5–6 भजन संहिता 39:5–6देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं। सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है; सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं; वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा!
- Ecclesiastes 4:8 सभोपदेशक 4:8कोई अकेला रहता और उसका कोई नहीं है; न उसके बेटा है, न भाई है, तौभी उसके परिश्रम का अन्त नहीं होता; न उसकी आंखें धन से सन्तुष्ट होती हैं, और न वह कहता है, मैं किस के लिये परिश्रम करता और अपने जीवन को सुखरहित रखता हूं? यह भी व्यर्थ और निरा दु:खभरा काम है।