Ecclesiastes · chapter 2 · verse 22
Ecclesiastes 2:22 in Hindi
मनुष्य जो धरती पर मन लगा लगाकर परिश्रम करता है उस से उसको क्या लाभ होता है?
Manushy jo dharatee par man lagaa lagaakar parishram karataa hai us se usako kyaa laabh hotaa hai?
Ecclesiastes 2:22 in English
- King James Version (KJV)
- For what hath man of all his labour, and of the vexation of his heart, wherein he hath laboured under the sun?
- World English Bible (WEB)
- For what does a man have of all his labor and of the striving of his heart, in which he labors under the sun?
- American Standard Version (ASV)
- For what hath a man of all his labor, and of the striving of his heart, wherein he laboreth under the sun?
- Bible in Basic English (BBE)
- What does a man get for all his work, and for the weight of care with which he has done his work under the sun?
- Darby Translation (DBY)
- For what will man have of all his labour and of the striving of his heart, wherewith he hath wearied himself under the sun?
- Webster's Bible (WBS)
- For what hath man of all his labor, and of the vexation of his heart, in which he hath labored under the sun?
- Young's Literal Translation (YLT)
- For what hath been to a man by all his labour, and by the thought of his heart that he laboured at under the sun?
Read in context
- 20तब मैं अपने मन में उस सारे परिश्रम के विषय जो मैं ने धरती पर किया था निराश हुआ,
- 21क्योंकि ऐसा मनुष्य भी है, जिसका कार्य परिश्रम और बुद्धि और ज्ञान से होता है और सफल भी होता है, तौभी उसको ऐसे मनुष्य के लिये छोड़ जाना पड़ता है, जिस ने उस में कुछ भी परिश्रम न किया हो। यह भी व्यर्थ और बहुत ही बुरा है।
- 22मनुष्य जो धरती पर मन लगा लगाकर परिश्रम करता है उस से उसको क्या लाभ होता है?
- 23उसके सब दिन तो दु:खों से भरे रहते हैं, और उसका काम खेद के साथ होता है; रात को भी उसका मन चैन नहीं पाता। यह भी व्यर्थ ही है।
- 24मनुष्य के लिये खाने- पीने और परिश्रम करते हुए अपने जीव को सुखी रखने के सिवाय और कुछ भी अच्छा नहीं। मैं ने देखा कि यह भी परमेश्वर की ओर से मिलता है।
Cross references
- Psalm 127:2 भजन संहिता 127:2तुम जो सवेरे उठते और देर करके विश्राम करते और दु:ख भरी रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है; क्योंकि वह अपने प्रियों को योंही नींद दान करता है।।
- Ecclesiastes 1:3 सभोपदेशक 1:3उस सब परिश्रम से जिसे मनुष्य धरती पर करता है, उसको क्या लाभ प्राप्त होता है?
- Philippians 4:6 फिलिप्पियों 4:6किसी भी बात की चिन्ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं।
- Ecclesiastes 3:9 सभोपदेशक 3:9काम करनेवाले को अधिक परिश्रम से क्या लाभ होता है?
- 1 Peter 5:7 1 पतरस 5:7और अपनी सारी चिन्ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उस को तुम्हारा ध्यान है।
- Ecclesiastes 4:6 सभोपदेशक 4:6चैन के साथ एक मुट्ठर एप उसे मुटि्ठयों से अच्छा है, जिनके साथ परिश्रम और मन का कुढ़ना हो।।
- 1 Timothy 6:8 1 तीमुथियुस 6:8और यदि हमारे पास खाने और पहिनने को हो, तो इन्हीं पर सन्तोष करना चाहिए।
- Matthew 6:34 मत्ती 6:34सो कल के लिये चिन्ता न करो, क्योकि कल का दिन अपनी चिन्ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।।
- Ecclesiastes 5:17 सभोपदेशक 5:17केवल इसके कि उस ने जीवन भर बेचैनी से भोजन किया, और बहुत ही दु:खित और रोगी रहा और क्रोध भी करता रहा?
- Ecclesiastes 4:8 सभोपदेशक 4:8कोई अकेला रहता और उसका कोई नहीं है; न उसके बेटा है, न भाई है, तौभी उसके परिश्रम का अन्त नहीं होता; न उसकी आंखें धन से सन्तुष्ट होती हैं, और न वह कहता है, मैं किस के लिये परिश्रम करता और अपने जीवन को सुखरहित रखता हूं? यह भी व्यर्थ और निरा दु:खभरा काम है।
- Ecclesiastes 6:7–8 सभोपदेशक 6:7–8मनुष्य का सारा परिश्रम उसके पेट के लिये होता है तौभी उसका मन नहीं भरता। जो बुद्धिमान है वह मूर्ख से किस बात में बढ़कर है? और कंगाल जो यह जानता है कि इस जीवन में किस प्रकार से चलना चाहिये, वह भी उस से किस बात में बढ़कर है?
- Ecclesiastes 8:15 सभोपदेशक 8:15तब मैं ने आनन्द को सराहा, क्योंकि सूर्य के नीचे मनुष्य के लिये खाने- पीने और आनन्द करने को छोड़ और कुछ भी अच्छा नहीं, क्योंकि यही उसके जीवन भर जो परमेश्वर उसके लिये धरती पर ठहराए, उसके परिश्रम में उसके संग बना रहेगा।।