Habakkuk · chapter 1 · verse 3
Habakkuk 1:3 in Hindi
तू मुझे अनर्थ काम क्यों दिखाता है? और क्या कारण है कि तू उत्पात को देखता ही रहता है? मेरे साम्हने लूट- पाट और उपद्रव होते रहते हैं; और झगड़ा हुआ करता है और वादविवाद बढ़ता जाता है।
Too mujhe anarth kaam kyom dikhaataa hai? Aur kyaa kaaran hai ki too utpaat ko dekhataa hee rahataa hai? Mere saamhane loota- paat aur upadrav hote rahate haim; aur jhagadaa huaa karataa hai aur vaadavivaad badhataa jaataa hai.
Habakkuk 1:3 in English
- King James Version (KJV)
- Why dost thou shew me iniquity, and cause [me] to behold grievance? for spoiling and violence [are] before me: and there are [that] raise up strife and contention.
- World English Bible (WEB)
- Why do you show me iniquity, and look at perversity? For destruction and violence are before me. There is strife, and contention rises up.
- American Standard Version (ASV)
- Why dost thou show me iniquity, and look upon perverseness? for destruction and violence are before me; and there is strife, and contention riseth up.
- Bible in Basic English (BBE)
- Why do you make me see evil-doing, and why are my eyes fixed on wrong? for wasting and violent acts are before me: and there is fighting and bitter argument.
- Darby Translation (DBY)
- Why dost thou cause me to see iniquity, and lookest thou upon grievance? For spoiling and violence are before me; and there is strife, and contention riseth up.
- Webster's Bible (WBS)
- Why dost thou show me iniquity, and cause [me] to behold grievance? for devastation and violence [are] before me: and there are [that] raise strife and contention.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Why dost Thou shew me iniquity, And perversity dost cause to behold? And spoiling and violence [are] before me, And there is strife, and contention doth lift [itself] up,
Read in context
- 1भारी वचन जिसको हबक्कूक नबी ने दर्शन में पाया।।
- 2हे यहोवा मैं कब तक तेरी दोहाई देता रहूंगा, और तू न सुनेगा? मैं कब तक तेरे सम्मुख "उपद्रव", "उपद्रव" चिल्लाता रहूंगा? क्या तू उद्धार नहीं करेगा?
- 3तू मुझे अनर्थ काम क्यों दिखाता है? और क्या कारण है कि तू उत्पात को देखता ही रहता है? मेरे साम्हने लूट- पाट और उपद्रव होते रहते हैं; और झगड़ा हुआ करता है और वादविवाद बढ़ता जाता है।
- 4इसलिये व्यवस्था ढीली हो गई और न्याय कभी नहीं प्रगट होता। दुष्ट लोग धर्मी को घेर लेते हैं; सो न्याय का खून हो रहा है।।
- 5अन्यजातियों की ओर चित्त लगाकर देखो, और बहुत ही चकित हो। क्योंकि मैं तुम्हारे ही दिनों में ऐसा काम करने पर हूं कि जब वह तुम को बताया जाए तो तुम उसकी प्रतीति न करोगे।
Cross references
- Psalm 55:9–11 भजन संहिता 55:9–11हे प्रभु, उनको सत्यानाश कर, और उनकी भाषा में गड़बड़ी डाल दे; क्योंकि मैं ने नगर में उपद्रव और झगड़ा देखा है। रात दिन वे उसकी शहरपनाह पर चढ़कर चारों ओर घूमते हैं; और उसके भीतर दुष्टता और उत्पात होता है। उसके भीतर दुष्टता ने बसेरा डाला है; और अन्धेर, अत्याचार और छल उसके चौक से दूर नहीं होते।।
- Micah 7:1–4 मीका 7:1–4हाय मुझ पर! क्योंकि मैं उस जल के समान हो गया हूं जो धूपकाल के फल तोड़ने पर, वा रही हुठ दाख बीनने के समय के अन्त में आ जाए, मुझे तो पक्की अंजीरों की लालसा थी, परन्तु खाने के लिये कोई गुच्छा नही रहा। भक्त लोग पृथ्वी पर से नाश हो गए हैं, और मनुष्यों में एक भी सीधा नहीं जन नहीं रहा; वे सब के सब हत्या के लिये घात लगाते, और जाल लगाकर अपने अपने भाई का आहेर करते हैं। वे अपने दोनों हाथों से मन लगाकर बुराई करते हैं; हाकिम घूस मांगता, और न्यायी घूस लेने को तैयार रहता है, और रईस अपने मन की दुष्टता वर्णन करता है; इसी प्रकार से वे सब मिलकर जालसाजी करते हैं। उन में से जो सब से उत्तम है, जो सब से सीधा है, वह कांटेवाले बाड़े से भी बुरा है। तेरे पहरूओं का कहा हुआ दिन, अर्थात् तेरे दण्ड का दिन आ गया है। अब वे शीघ्र चौंधिया जाएंगे।
- Jeremiah 20:8 यिर्मयाह 20:8क्योंकि जब मैं बातें करता हूँ, तब मैं जोर से पुकार पुकारकर ललकारता हूँ कि उपद्रव और उत्पात हुआ, हां उत्पात! क्योंकि यहोवा का वचन दिन भर मेरे लिये निन्दा और ठट्ठा का कारण होता रहता है।
- Jeremiah 9:2–6 यिर्मयाह 9:2–6भला होता कि मुझे जंगल में बटोहियों का कोई टिकाब मिलता कि मैं अपने लोगों को छोड़कर वहीं चला जाता! क्योंकि वे सब व्यभिचारी हैं, वे विश्वासघातियों का समाज हैं। अपनी अपनी जीभ को वे धनुष की नाई झूठ होलने के लिये तैयार करते हैं, और देश में बलवन्त तो हो गए, परन्तु सच्चाई के लिये नहीं; वे बुराई पर बुराई बढ़ाते जाते हैं, और वे मुझ को जानते ही नहीं, यहोवा की यही वाणी है। अपने अपने संगी से चौकस रहो, अपने भाई पर भी भरोसा न रखो; क्योंकि सब भाई निश्चय अड़ंगा मारेंगे, और हर एक पड़ोसी लुतराई करते फिरेंगे। वे एक दूसरे को ठगेंगे और सच नहीं बोलेंगे; उन्हों ने झूठ ही बोलना सीखा है; और कुटिलता ही में परिश्रम करते हैं। तेरा निवास छल के बीच है; छल ही के कारण वे मेरा ज्ञान नहीं चाहते, यहोवा की यही वाणी है।
- Ecclesiastes 5:8 सभोपदेशक 5:8यदि तू किसी प्रान्त में निर्धनों पर अन्धेर और न्याय और धर्म को बिगड़ता देखे, तो इस से चकित न होना; क्योंकि एक अधिकारी से बड़ा दूसरा रहता है जिसे इन बातों की सुधि रहती है, और उन से भी ओर अधिक बड़े रहते हैं।
- Matthew 10:16 मत्ती 10:16देखो, मैं तुम्हें भेड़ों की नाई भेड़ियों के बीच में भेजता हूं सो सांपों की नाई बुद्धिमान और कबूतरों की नाई भोले बनो।
- Ezekiel 2:6 यहेजकेल 2:6और हे मनुष्य के सन्तान, तू उन से न डरना; चाहे तुझे कांटों, ऊंटकटारों ओर बिच्चुओं के बीच भी रहना पड़े, तौभी उनके वचनों से न डरना; यद्यपि वे बलवई घराने के हैं, तौभी न तो उनके वचनों से डरना, और न उनके मुंह देखकर तेरा मन कच्चा हो।
- Psalm 73:3–9 भजन संहिता 73:3–9क्योंकि जब मैं दुष्टों का कुशल देखता था, तब उन घमण्डियों के विषय डाह करता था।। क्योंकि उनकी मृत्यु में बेधनाएं नहीं होतीं, परन्तु उनका बल अटूट रहता है। उनको दूसरे मनुष्यों की नाईं कष्ट नहीं होता; और और मनुष्यों के समान उन पर विपत्ति नहीं पड़ती। इस कारण अहंकार उनके गले का हार बना है; उनका ओढ़ना उपद्रव है। उनकी आंखें चर्बीं से झलकती हैं, उनके मन की भवनाएं उमण्डती हैं। वे ठट्ठा मारते हैं, और दुष्टता से अन्धेर की बात बोलते हैं; वे डींग मारते हैं। वे मानों स्वर्ग में बैठे हुए बोलते हैं, और वे पृथ्वी में बोलते फिरते हैं।।
- Psalm 120:5–6 भजन संहिता 120:5–6हाय, हाय, क्योंकि मुझे मेशेक में परदेशी होकर रहना पड़ा और केदार के तम्बुओं में बसना पड़ा है! बहुत काल से मुझ को मेल के बैरियों के साथ बसना पड़ा है।
- 2 Peter 2:8 2 पतरस 2:8( क्योंकि वह धर्मी उन के बीच में रहते हुए, और उन के अधर्म के कामों को देख देखकर, और सुन सुनकर, हर दिन अपने सच्चे मन को पीड़ित करता था)।
- Ecclesiastes 4:1 सभोपदेशक 4:1तब मैं ने वह सब अन्धेर देखा जो संसार में होता है। और क्या देखा, कि अन्धेर सहनेवालों के आंसू बह रहे हैं, और उनको कोई शान्ति देनेवाला नहीं! अन्धेरे करनेवालों के हाथ में शक्ति थी, परन्तु उनको कोई शान्ति देनेवाला नहीं था।
- Psalm 12:1–2 भजन संहिता 12:1–2हे परमेश्वर बचा ले, क्योंकि एक भी भक्त नहीं रहा; मनुष्यों में से विश्वासयोग्य लाग मर मिटे हैं। उन में से प्रत्येक अपने पड़ोसी से झूठी बातें कहता है; वे चापलूसी के ओठों से दो रंगी बातें करते हैं।।