Isaiah · chapter 30 · verse 20
Isaiah 30:20 in Hindi
और चाहे प्रभु तुम्हें विपत्ति की रोटी और दु:ख का जल भी दे, तौभी तुम्हारे उपदेशक फिर न छिपें, और तुम अपनी आंखों से अपने उपदेशकों को देखते रहोगे।
Aur chaahe prabhu tumhem vipatti kee rotee aur du:kh kaa jal bhee de, taubhee tumhaare upadeshak phir na chhipem, aur tum apanee aankhom se apane upadeshakom ko dekhate rahoge.
Isaiah 30:20 in English
- King James Version (KJV)
- And [though] the Lord give you the bread of adversity, and the water of affliction, yet shall not thy teachers be removed into a corner any more, but thine eyes shall see thy teachers:
- World English Bible (WEB)
- Though the Lord may give you the bread of adversity and the water of affliction, yet your teachers won’t be hidden any more, but your eyes will see your teachers;
- American Standard Version (ASV)
- And though the Lord give you the bread of adversity and the water of affliction, yet shall not thy teachers be hidden anymore, but thine eyes shall see thy teachers;
- Bible in Basic English (BBE)
- And though the Lord will give you the bread of trouble and the water of grief, you will no longer put your teacher on one side, but you will see your teacher:
- Darby Translation (DBY)
- And the Lord will give you the bread of adversity, and the water of oppression; yet thy teachers shall not be hidden any more, but thine eyes shall see thy teachers.
- Webster's Bible (WBS)
- And [though] the LORD shall give you the bread of adversity, and the water of affliction, yet shall not thy teachers be removed into a corner any more, but thy eyes shall see thy teachers:
- Young's Literal Translation (YLT)
- And the Lord hath given to you bread of adversity, And water of oppression. And thy directors remove no more, And thine eyes have seen thy directors,
Read in context
- 18तौभी यहोवा इसलिये विलम्ब करता है कि तुम पर अनुग्रह करे, और इसलिये ऊंचे उठेगा कि तुम पर दया करे। क्योंकि यहोवा न्यायी परमेश्वर है; क्या ही धन्य हैं वे जो उस पर आशा लगाए रहते हैं।।
- 19हे सिरयोन के लोगों तुम यरूशलेम में बसे रहो; तुम फिर कभी न रोओगे, वह तुम्हारी दोहाई सुनते ही तुम पर निश्चय अनुग्रह करेगा: वह सुनते ही तुम्हारी मानेगा।
- 20और चाहे प्रभु तुम्हें विपत्ति की रोटी और दु:ख का जल भी दे, तौभी तुम्हारे उपदेशक फिर न छिपें, और तुम अपनी आंखों से अपने उपदेशकों को देखते रहोगे।
- 21और जब कभी तुम दहिनी वा बाई ओर मुड़ने लगो, तब तुम्हारे पीछे से यह वचन तुम्हारे कानों में पड़ेगा, मार्ग यही है, इसी पर चलो।
- 22तब तुम वह चान्दी जिस से तुम्हारी खुदी हुई मूत्तियां मढ़ी हैं, और वह सोना जिस से तुम्हारी ढली हुई मूत्तियां आभूषित हैं, अशुद्ध करोगे। तुम उनको मैले कुचैले वस्त्रा की नाईं फेंक दोगे और कहोगे, दूर हो।
Cross references
- 1 Kings 22:27 1 राजा 22:27और उन से कह, राजा यों कहता है, कि इसको बन्दीगृह में डालो, और जब तक मैं कुशल से न आऊं, तब तक इसे दु:ख की रोटी और पानी दिया करो।
- Psalm 80:5 भजन संहिता 80:5तू ने आंसुओं को उनका आहार कर दिया, और मटके भर भरके उन्हें आंसु पिलाए हैं।
- Amos 8:11–12 आमोस 8:11–12परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, देखो, ऐसे दिन आते हैं, जब मैं इस देश में महंगी करूंगा; उस में ने तो अन्न की भूख और न पानी की प्यास होगी, परन्तु यहोवा के वचनों के सुनने ही की भूख प्यास होगी। और लोग यहोवा के वचन की खोज में समुद्र से समुद्र तब और उत्तर से पूरब तक मारे मारे फिरेंगे, परन्तु उसको न पाएंगे।।
- Psalm 127:2 भजन संहिता 127:2तुम जो सवेरे उठते और देर करके विश्राम करते और दु:ख भरी रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है; क्योंकि वह अपने प्रियों को योंही नींद दान करता है।।
- Acts 14:22 प्रेरितों के काम 14:22और चेलों के मन को स्थिर करते रहे और यह उपदेश देते थे, कि हमें बड़े क्लेश उठाकर परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना होगा।
- Psalm 74:9 भजन संहिता 74:9हम को हमारे निशान नहीं देख पड़ते; अब कोई नबी नहीं रहा, न हमारे बीच कोई जानता है कि कब तक यह दशा रहेगी।
- Deuteronomy 16:3 व्यवस्थाविवरण 16:3उसके संग कोई खमीरी वस्तु न खाना; सात दिन तक अखमीरी रोटी जो दु:ख की रोटी है खाया करना; क्योंकि तू मि देश से उतावली करके निकला था; इसी रीति से तुझ को मि देश से निकलने का दिन जीवन भर स्मरण रहेगा।
- Psalm 30:5 भजन संहिता 30:5क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सबेरे आनन्द पहुंचेगा।।
- Psalm 102:9 भजन संहिता 102:9क्योंकि मैं ने रोटी की नाईं राख खाईं और आंसू मिलाकर पानी पीता हूं।
- Ezekiel 4:13–17 यहेजकेल 4:13–17फिर यहोवा ने कहा, इसी प्रकार से इस्राएल उन जातियों के बीच अपनी अपनी रोटी अशुठ्ठता से खाया करेंगे, जहां में उन्हें बरबस पहुंचाऊंगा। तब मैं ने कहा, हाय, यहोवा परमेश्वर देख, मेरा मन कभी अशुठ्ठ नहीं हुआ, और न मैं ने बचपन से लेकर अब तक अपनी मृत्यु से मरे हुए वा फाड़े हुए पशु का मांस खाया, और न किसी प्रकार का घिनौना मांस मेरे पुंह में कभी गया है। तब उस ने मुझ से कहा, देख, मैं ने तेरे लिये मनुष्य की विष्ठा की सन्ती गोबर ठहराया है, और उसी से तू अपनी रोठी बनाना। फिर उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, देख, मैं यरूशलेम में अन्नरूपी आधार को दूर करूंगा; सो वहां के लोग तौल तोलकर और चिन्ता कर करके रोटी खाया करेंगे; और माप मापकर और विस्मित हो होकर पानी पिया करेंगे। और इस से उन्हें रोटी और पानी की घटी होगी; और वे सब के सब घबराएंगे, और अपने अधर्म में फंसे हुए सूख् जाएंगे।
- Ephesians 4:11 इफिसियों 4:11और उस ने कितनों को भविष्यद्वकता नियुक्त करके, और कितनों को सुसमाचार सुनानेवाले नियुक्त करके, और कितनों को रखवाले और उपदेशक नियुक्त करके दे दिया।
- Ezekiel 24:22–23 यहेजकेल 24:22–23और जैसा मैं ने किया है वैसा ही तुम लोग करोगे, तुम भी अपने होंठ न ढांपोगे, न शोक के योग्य रोटी खाओगे। तूम सिर पर पगड़ी बान्धे और पांवों में जूती पहिने रहोगे, न तुम रोओगे, न छाती पीटोगे, वरन अपने अधर्म के कामों में फंसे हुए गलते जाओगे और एक दूसरे की ओर कराहते रहोगे।