Job · chapter 31 · verse 30
Job 31:30 in Hindi
(परन्तु मैं ने न तो उसकी शाप देते हुए, और न उसके प्राणदणड की प्रार्थना करते हुए अपने मुंह से पाप किया है);
(parantu maim ne na to usakee shaap dete hue, aur na usake praanadanad kee praarthanaa karate hue apane munh se paap kiyaa hai);
Job 31:30 in English
- King James Version (KJV)
- Neither have I suffered my mouth to sin by wishing a curse to his soul.
- World English Bible (WEB)
- (I have certainly not allowed my mouth to sin by asking his life with a curse);
- American Standard Version (ASV)
- (Yea, I have not suffered my mouth to sin By asking his life with a curse);
- Bible in Basic English (BBE)
- (For I did not let my mouth give way to sin, in putting a curse on his life;)
- Darby Translation (DBY)
- (Neither have I suffered my mouth to sin by asking his life with a curse;)
- Webster's Bible (WBS)
- Neither have I suffered my mouth to sin by wishing a curse to his soul.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Yea, I have not suffered my mouth to sin, To ask with an oath his life.
Read in context
- 28तो यह भी न्यायियों से दणड पाने के योग्य अधर्म का काम होता; क्योंकि ऐसा करके मैं ने सर्वश्रेष्ठ ईश्वर का इनकार किया होता।
- 29यदि मैं अपने बैरी के नाश से आनन्दित होता, वा जब उस पर विपत्ति पड़ी तब उस पर हंसा होता;
- 30(परन्तु मैं ने न तो उसकी शाप देते हुए, और न उसके प्राणदणड की प्रार्थना करते हुए अपने मुंह से पाप किया है);
- 31यदि मेरे डेरे के रहनेवालों ने यह न कहा होता, कि ऐसा कोई कहां मिलेगा, जो इसके यहां का मांस खाकर तृप्त न हुआ हो?
- 32(परदेशी को सड़क पर टिकना न पड़ता था; मैं बटोही के लिये अपना द्वार खुला रखता था);
Cross references
- 1 Peter 3:9 1 पतरस 3:9बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो।
- Romans 12:14 रोमियों 12:14अपने सतानेवालों को आशीष दो; आशीष दो स्त्राप न दो।
- 1 Peter 2:22–23 1 पतरस 2:22–23न तो उस ने पाप किया, और न उसके मुंह से छल की कोई बात निकली। वह गाली सुनकर गाली नहीं देता था, और दुख उठाकर किसी को भी धमकी नहीं देता था, पर अपने आप को सच्चे न्यायी के हाथ में सौपता था।
- James 3:9–10 याकूब 3:9–10इसी से हम प्रभु और पिता की स्तुति करते हैं; और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्वरूप में उत्पन्न हुए हैं स्राप देते हैं। एक ही मुंह से धन्यवाद और स्राप दोनों निकलते हैं।
- Matthew 5:22 मत्ती 5:22परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि जो कोई अपने भाई पर क्रोध करेगा, वह कचहरी में दण्ड के योग्य होगा: और जो कोई अपने भाई को निकम्मा कहेगा वह महासभा में दण्ड के योग्य होगा; और जो कोई कहे "अरे मूर्ख" वह नरक की आग के दण्ड के योग्य होगा।
- Exodus 23:4–5 निर्गमन 23:4–5यदि तेरे शत्रु का बैल वा गदहा भटकता हुआ तुझे मिले, तो उसे उसके पास अवश्य फेर ले आना। फिर यदि तू अपने बैरी के गदहे को बोझ के मारे दबा हुआ देखे, तो चाहे उसको उसके स्वामी के लिये छुड़ाने के लिये तेरा मन न चाहे, तौभी अवश्य स्वामी का साथ देकर उसे छुड़ा लेना।।
- Matthew 5:43–44 मत्ती 5:43–44तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था; कि अपने पड़ोसी से प्रेम रखना, और अपने बैरी से बैर। परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सतानेवालों के लिये प्रार्थना करो।
- James 3:6 याकूब 3:6जीभ भी एक आग है: भी हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है।
- Ecclesiastes 5:2 सभोपदेशक 5:2बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों।।
- Ecclesiastes 5:6 सभोपदेशक 5:6कोई वचन कहकर अपने को पाप में ने फंसाना, और न ईश्वर के दूत के साम्हने कहना कि यह भूल से हुआ; परमेश्वर क्यों तेरा बोल सुनकर अप्रसन्न हो, और तेरे हाथ के कार्यों को नष्ट करे?
- Matthew 12:36 मत्ती 12:36और मै तुम से कहता हूं, कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे।