Job · chapter 33 · verse 20
Job 33:20 in Hindi
यहां तक कि उसका प्राण रोटी से, और उसका मन स्वादिष्ट भोजन से घृणा करने लगता है।
Yahaam tak ki usakaa praan rotee se, aur usakaa man svaadisht bhojan se ghrunaa karane lagataa hai.
Job 33:20 in English
- King James Version (KJV)
- So that his life abhorreth bread, and his soul dainty meat.
- World English Bible (WEB)
- so that his life abhors bread, and his soul dainty food.
- American Standard Version (ASV)
- So that his life abhorreth bread, And his soul dainty food.
- Bible in Basic English (BBE)
- He has no desire for food, and his soul is turned away from delicate meat;
- Darby Translation (DBY)
- And his life abhorreth bread, and his soul dainty food;
- Webster's Bible (WBS)
- So that his life abhorreth bread, and his soul dainty food.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And his life hath nauseated bread, And his soul desirable food.
Read in context
- 18वह उसके प्राण को गढ़हे से बचाता है, और उसके जीवन को खड़ग की मार से बचाता हे।
- 19उसे ताड़ना भी हेती है, कि वह अपने बिछौने पर पड़ा पड़ा तड़पता है, और उसकी हड्डी हड्डी में लगातार झगड़ा होता है
- 20यहां तक कि उसका प्राण रोटी से, और उसका मन स्वादिष्ट भोजन से घृणा करने लगता है।
- 21उसका मांस ऐसा सूख जाता है कि दिखाई नहीं देता; और उसकी हडि्डयां जो पहिले दिखाई नहीं देती थीं निकल आती हैं।
- 22निदान वह कबर के निकट पहुंचता है, और उसका जीवन नाश करनेवालों के वश में हो जाता है।
Cross references
- Psalm 107:17–18 भजन संहिता 107:17–18मूढ़ अपनी कुचाल, और अधर्म के कामों के कारण अति दु:खित होते हैं। उनका जी सब भांति के भोजन से मिचलाता है, और वे मृत्यु के फाटक तक पहुंचते हैं।
- Job 3:24 अय्यूब 3:24मुझे तो रोटी खाने की सन्ती लम्बी लम्बी सांसें आती हैं, और मेरा विलाप धारा की नाई बहता रहता है।
- Genesis 3:6 उत्पत्ति 3:6सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उस ने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उस ने भी खाया।
- Jeremiah 3:19 यिर्मयाह 3:19मैं ने सोचा था, मैं कैसे तुझे लड़कों में गिनकर वह मनभावना देश दूं जो सब जातियों के देशों का शिरोमणि है। और मैं ने सोचा कि तू मुझे पिता कहेगी, और मुझ से फिर न भटकेगी।
- Amos 5:11 आमोस 5:11तुम जो कंगालों को लताड़ा करते, और भेंट कहकर उस से अन्न हर लेते हो, इसलिये जो घर तुम ने गढ़े हुए पत्थरों के बनाए हैं, उन में रहने न पाओगे; और जो मनभावनी दाख की बारियां तुम ने लगाई हैं, उनका दाखमधु न पीने पाओगे।