Lamentations · chapter 3 · verse 1
Lamentations 3:1 in Hindi
उसके रोष की छड़ी से दु:ख भोगनेवाला पुरूष मैं ही हूं;
Usake rosh kee chhadee se du:kh bhoganevaalaa puroosh maim hee hoom;
Lamentations 3:1 in English
- King James Version (KJV)
- I [am] the man [that] hath seen affliction by the rod of his wrath.
- World English Bible (WEB)
- I am the man who has seen affliction by the rod of his wrath.
- American Standard Version (ASV)
- I am the man that hath seen affliction by the rod of his wrath.
- Bible in Basic English (BBE)
- I am the man who has seen trouble by the rod of his wrath.
- Darby Translation (DBY)
- I am the man that hath seen affliction by the rod of his wrath.
- Webster's Bible (WBS)
- I [am] the man [that] hath seen affliction by the rod of his wrath.
- Young's Literal Translation (YLT)
- I [am] the man [who] hath seen affliction By the rod of His wrath.
Read in context
- 1उसके रोष की छड़ी से दु:ख भोगनेवाला पुरूष मैं ही हूं;
- 2वह मुझे ले जाकर उजियाले में नहीं, अन्धियारे ही में चलाता है;
- 3उसका हाथ दिन भर मेरे ही विरूद्ध उठता रहता है।
Cross references
- Psalm 88:7 भजन संहिता 88:7तेरी जलजलाहट मुझी पर बनी हुई है, और तू ने अपने सब तरंगों से मुझे दु:ख दिया है;
- Job 19:21 अय्यूब 19:21हे मेरे मित्रो! मुझ पर दया करो, दया, क्योंकि ईश्वर ने मुझे मारा है।
- Psalm 88:15–16 भजन संहिता 88:15–16मैं बचपन ही से दु:खी वरन अधमुआ हूं, तुझ से भय खाते मैं अति व्याकुल हो गया हूं। तेरा क्रोध मुझ पर पड़ा है; उस भय से मैं मिट गया हूं।
- Jeremiah 15:17–18 यिर्मयाह 15:17–18तेरी छाया मुझ पर इई; मैं मन बहलानेवालों के बीच बैठकर प्रसन्न नहीं हुआ; तेरे हाथ के दबाव से मैं अकेला बैठा, क्योंकि तू ने मुझे क्रोध से भर दिया था। मेरी पीड़ा क्यों लगातार बनी रहती है? मेरी चोट की क्यों कोई औषधि नहीं है? क्या तू सचमुच मेरे लिये धोखा देनेवाली नदी और सूखनेवाले जल के समान होगा?
- Isaiah 53:3 यशायाह 53:3वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।।
- Jeremiah 38:6 यिर्मयाह 38:6तब उन्हों ने यिर्मयाह को लेकर राजपुत्रा मल्किरयाह के उस गड़हे में जो पहरे के आंगन में था, रस्सियों से उतारकर डाल दिया। और उस गड़हे मे पानी नहीं केवल दलदल था, और यिर्मयाह कीचड़ में धंस गया।
- Lamentations 1:12–14 विलापगीत 1:12–14हे सब बटोहियो, क्या तुम्हें इस बात की कुछ भी चिन्ता नहीं? दृष्टि कर के देखो, क्या मेरे दु:ख से बढ़ कर कोई और पीड़ा है जो यहोवा ने अपने क्रोध के दिन मुझ पर डाल दी है? उसने ऊपर से मेरी हड्डियों में आग लगाई है, और वे उस से भस्म हो गईं; उसने मेरे पैरों के लिये जाल लगाया, और मुझ को उलटा फेर दिया है; उसने ऐसा किया कि मैं त्यागी हुई सी और रोग से लगातार निर्बल रहती हूँ। उसने जूए की रस्सियों की नाईं मेरे अपराधों को अपने हाथ से कसा है; उसने उन्हें बटकर मेरी गर्दन पर चढ़ाया, और मेरा बल घटा दिया है; जिनका मैं साम्हना भी नहीं कर सकती, उन्हीं के वश में यहोवा ने मुझे कर दिया है।
- Psalm 71:20 भजन संहिता 71:20तू ने तो हम को बहुत से कठिन कष्ट दिखाए हैं परन्तु अब तू फिर से हम को जिलाएगा; और पृथ्वी के गहिरे गड़हे में से उबार लेगा।
- Jeremiah 20:14–18 यिर्मयाह 20:14–18स्रापित हो वह दिन जिस में मैं उत्पन्न हुआ! जिस दिन मेरी माता ने मुझ को जन्म दिया वह धन्य न हो! स्रापित हो वह जन जिस ने मेरे पिता को यह समाचार देकर उसको बहुत आनन्दित किया कि तेरे लड़का उत्पन्न हुआ है। उस जन की दशा उन नगरों की सी हो जिन्हें यहोवा ने बिन दया ढा दिया; उसे सवेरे तो चिल्लाहट और दोपहर को युठ्ठ की ललकार सुनाई दिया करे, क्योंकि उस ने मुझे गर्भ ही में न मार डाला कि मेरी माता का गर्भाशय ही मेरी क़ब्र होती, और मैं उसी में सदा पड़ा रहता। मैं क्यों उत्पात और शोक भोगने के लिये जन्मा और कि अपने जीवन में परिश्रम और दुेचा देखूं, और उपने दिन नामधराई में व्यतीत करूं?