Malachi · chapter 3 · verse 14
Malachi 3:14 in Hindi
तुम ने कहा है कि परमेश्वर की सेवा करनी व्यर्थ है। हम ने जो उसके बताए हुए कामों को पूरा किया और सेनाओं के यहोवा के डर के मारे शोक का पहिरावा पहिने हुए चले हैं, इस से क्या लाभ हुआ?
Tum ne kahaa hai ki parameshvar kee sevaa karanee vyarth hai. Ham ne jo usake bataae hue kaamom ko pooraa kiyaa aur senaaom ke yahovaa ke dar ke maare shok kaa pahiraavaa pahine hue chale haim, is se kyaa laabh huaa?
Malachi 3:14 in English
- King James Version (KJV)
- Ye have said, It [is] vain to serve God: and what profit [is it] that we have kept his ordinance, and that we have walked mournfully before the LORD of hosts?
- World English Bible (WEB)
- You have said, ‘It is vain to serve God,’ and ‘What profit is it that we have followed his instructions and that we have walked mournfully before the LORD of Armies?
- American Standard Version (ASV)
- Ye have said, It is vain to serve God; and what profit is it that we have kept his charge, and that we have walked mournfully before Jehovah of hosts?
- Bible in Basic English (BBE)
- You have said, It is no use worshipping God: what profit have we had from keeping his orders, and going in clothing of sorrow before the Lord of armies?
- Darby Translation (DBY)
- Ye say, It is vain to serve God; and what profit is it that we keep his charge, and that we walk mournfully before Jehovah of hosts?
- Webster's Bible (WBS)
- Ye have said, It [is] vain to serve God: and what profit [is it] that we have kept his ordinance, and that we have walked mournfully before the LORD of hosts?
- Young's Literal Translation (YLT)
- Ye have said, 'A vain thing to serve God! And what gain when we kept His charge? And when we have gone in black, Because of Jehovah of Hosts?
Read in context
- 12तब सारी जातियां तुम को धन्य कहेंगी, क्योंकि तुम्हारा देश मनोहर देश होगा, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।।
- 13यहोवा यह कहता है, तुम ने मेरे विरूद्ध ढिठाई की बातें कही हैं। परन्तु तुम पूछते हो, हम ने तेरे विरूद्ध में क्या कहा है?
- 14तुम ने कहा है कि परमेश्वर की सेवा करनी व्यर्थ है। हम ने जो उसके बताए हुए कामों को पूरा किया और सेनाओं के यहोवा के डर के मारे शोक का पहिरावा पहिने हुए चले हैं, इस से क्या लाभ हुआ?
- 15अब से हम अभिमानी लोगों को धन्य कहते हैं; क्योंकि दुराचारी तो सफल बन गए हैं, वरन वे परमेश्वर की परीक्षा करने पर भी बच गए हैं।।
- 16तब यहोवा का भय माननेवालों ने आपस में बातें की, और यहोवा ध्यान धर कर उनकी सुनता था; और जो यहोवा का भय मानते और उसके नाम का सम्मान करते थे, उनके स्मरण के निमित्त उसके साम्हने एक पुस्तक लिखी जाती थी।
Cross references
- Isaiah 58:3 यशायाह 58:3वे कहते हैं, क्या कारए है कि हम ने तो उपवास रखा, परन्तु तू ने इसकी सुधि नहीं ली? हम ने दु:ख उठाया, परन्तु तू ने कुछ ध्यान नहीं दिया? सुनो, उपवास के दिन तुम अपनी ही इच्छा पूरी करते हो और अपने सेवकों से कठिन कामों को कराते हो।
- Psalm 73:8–13 भजन संहिता 73:8–13वे ठट्ठा मारते हैं, और दुष्टता से अन्धेर की बात बोलते हैं; वे डींग मारते हैं। वे मानों स्वर्ग में बैठे हुए बोलते हैं, और वे पृथ्वी में बोलते फिरते हैं।। तौभी उसकी प्रजा इधर लौट आएगी, और उनको भरे हुए प्याले का जल मिलेगा। फिर वे कहते हैं, ईश्वर कैसे जानता है? क्या परमप्रधान को कुछ ज्ञान है? देखो, ये तो दुष्ट लोग हैं; तौभी सदा सुभागी रहकर, धन सम्पत्ति बटोरते रहते हैं। निश्चय, मैं ने अपने हृदय को व्यर्थ शुद्ध किया और अपने हाथों को निर्दोषता में धोया है;
- Job 35:3 अय्यूब 35:3जो तू कहता है कि मुझे इस से क्या लाभ? और मुझे पापी होने में और न होने में कौन सा अधिक अन्तर है?
- Zephaniah 1:12 सपन्याह 1:12उस समय मैं दीपक लिए हुए यरूशलेम में ढूंढ- ढांढ़ करूंगा, और जो लोग दाखमधु के तलछट तथा मैल के समान बैठे हुए मन में कहते हैं कि यहोवा न तो भला करेगा और न बुरा, उनको मैं दण्ड दूंगा।
- Zechariah 7:3–6 जकर्याह 7:3–6और सेनाओं के यहोवा के भवन के याजकों से और भविष्यद्वक्ताओं से भी यह पूछें, क्या हमें उपवास करके रोना चाहिये जैसे कि कितने वर्षों से हम पांचवें महीने में करते आए हैं? तब सेनाओं के यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा; सब साधारण लोगों से और याजकों से कह, कि जब तुम इन सत्तर वर्षों के बीच पांचवें और सातवें महीनों में उपवास और विलाप करते थे, तब क्या तुम सचमुच मेरे ही लिये उपवास करते थे? और जब तुम खाते- पीते हो, तो क्या तुम अपने ही लिये नहीं खाते, और क्या तुम अपने ही लिये नहीं पीते हो?
- Joel 2:12 योएल 2:12तौभी यहोवा की यह वाणी है, अभी भी सुनो, उपवास के साथ रोते- पीटते अपने पूरे मन से फिरकर मेरे पास आओ।
- Job 34:9 अय्यूब 34:9उस ने तो कहा है, कि मनुष्य को इस से कुछ लाभ नहीं कि वह आनन्द से परमेश्वर की संगति रखे।
- Job 22:17 अय्यूब 22:17उन्हों ने ईश्वर से कहा था, हम से दूर हो जा; और यह कि सर्वशक्तिमान हमारा क्या कर सकता है?
- James 4:9 याकूब 4:9दुखी होओ, और शोक करा, और रोओ: तुम्हारी हंसी शोक से और तुम्हारा आनन्द उदासी से बदल जाए।
- Job 21:14–15 अय्यूब 21:14–15तौभी वे ईश्वर से कहते थे, कि हम से दूर हो! तेरी गति जानने की हम को इच्छा नहीं रहती। सर्वशक्तिमान क्या है, कि हम उसकी सेवा करें? और जो हम उस से बिनती भी करें तो हमें क्या लाभ होगा?
Original words (Hebrew)
- said · H559אָמַר ʼâmar
- vain · H7723שָׁוְא shâvᵉʼ
- serve · H5647עָבַד ʻâbad
- God · H430אֱלֹהִים ʼĕlôhîym
- profit · H1215בֶּצַע betsaʻ
- kept · H8104שָׁמַר shâmar
- ordinance · H4931מִשְׁמֶרֶת mishmereth
- walked · H1980הָלַךְ hâlak
- mournfully · H6941קְדֹרַנִּית qᵉdôrannîyth
- before · H6440פָּנִים pânîym
- hosts · H6635צָבָא tsâbâʼ