Mark · chapter 8 · verse 19
Mark 8:19 in Hindi
कि जब मैं ने पांच हजार के लिये पांच रोटी तोड़ी थीं तो तुम ने टुकड़ों की कितनी टोकरियां भरकर उठाईं? उन्हों ने उस से कहा, सात टोकरे।
Ki jab maim ne paanch hajaar ke liye paanch rotee todee theem to tum ne tukadom kee kitanee tokariyaam bharakar uthaaeem? Unhom ne us se kahaa, saat tokare.
Mark 8:19 in English
- King James Version (KJV)
- When I brake the five loaves among five thousand, how many baskets full of fragments took ye up? They say unto him, Twelve.
- World English Bible (WEB)
- When I broke the five loaves among the five thousand, how many baskets full of broken pieces did you take up?” They told him, “Twelve.”
- American Standard Version (ASV)
- When I brake the five loaves among the five thousand, how many baskets full of broken pieces took ye up? They say unto him, Twelve.
- Bible in Basic English (BBE)
- When I made a division of the five cakes of bread among the five thousand, what number of baskets full of broken bits did you take up? They said to him, Twelve.
- Darby Translation (DBY)
- When I broke the five loaves for the five thousand, how many hand-baskets full of fragments took ye up? They say to him, Twelve.
- Webster's Bible (WBS)
- When I divided the five loaves among five thousand, how many baskets full of fragments took ye up? They say to him, Twelve.
- Young's Literal Translation (YLT)
- When the five loaves I did brake to the five thousand, how many hand-baskets full of broken pieces took ye up?' they say to him, 'Twelve.'
Read in context
- 17यह जानकर यीशु ने उन से कहा; तुम क्यों आपस में विचार कर रहे हो कि हमारे पास रोटी नहीं? क्या अब तक नहीं जानते और नहीं समझते?
- 18क्या तुम्हारा मन कठोर हो गया है? क्या आंखे रखते हुए भी नहीं देखते, और कान रखते हुए भी नहीं सुनते? और तुम्हें स्मरण नहीं।
- 19कि जब मैं ने पांच हजार के लिये पांच रोटी तोड़ी थीं तो तुम ने टुकड़ों की कितनी टोकरियां भरकर उठाईं? उन्हों ने उस से कहा, सात टोकरे।
- 20उस ने उन से कहा, सात टोकरे।
- 21उस ने उन से कहा, क्या तुम अब तक नहीं समझते?
Cross references
- John 6:5–13 यूहन्ना 6:5–13तब यीशु ने अपनी आंखे उठाकर एक बड़ी भीड़ को अपने पास आते देखा, और फिलिप्पुस से कहा, कि हम इन के भोजन के लिये कहां से रोटी मोल लाएं? परन्तु उस ने यह बात उसे परखने के लिये कही; क्योंकि वह आप जानता था कि मैं क्या करूंगा। फिलिप्पुस ने उस को उत्तर दिया, कि दो सौ दीनार की रोटी उन के लिये पूरी भी न होंगी कि उन में से हर एक को थोड़ी थोड़ी मिल जाए। उसके चेलों में से शमौन पतरस के भाई अन्द्रियास ने उस से कहा। यहां एक लड़का है जिस के पास जव की पांच रोटी और दो मछलियां हैं परन्तु इतने लोगों के लिये वे क्या हैं। यीशु ने कहा, कि लोगों को बैठा दो। उस जगह बहुत घास थी: तब वे लोग जो गिनती में लगभग पांच हजार के थे, बैठ गए: तब यीशु ने रोटियां लीं, और धन्यवाद करके बैठनेवालों को बांट दी: और वैसे ही मछलियों में से जितनी वे चाहते थे बांट दिया। जब वे खाकर तृप्त हो गए तो उस ने अपने चेलों से कहा, कि बचे हुए टुकड़े बटोर लो, कि कुछ फेंका न जाए। सो उन्हों ने बटोरा, और जव की पांच रोटियों के टुकड़े जो खानेवालों से बच रहे थे उन की बारह टोकरियां भरीं।
- Matthew 14:17–21 मत्ती 14:17–21उन्हों ने उस से कहा; यहां हमारे पास पांच रोटी और दो मछलियों को छोड़ और कुछ नहीं है। उस ने कहा, उन को यहां मेरे पास ले आओ। तब उस ने लोगों को घास पर बैठने को कहा, और उन पांच रोटियों और दो मछलियों को लिया; और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियां तोड़ तोड़कर चेलों को दीं, और चेलों ने लोगों को। और सब खाकर तृप्त हो गए, और उन्हों ने बचे हुए टुकड़ों से भरी हुई बारह टोकरियां उठाई। और खानेवाले स्त्रियों और बालकों को छोड़कर पांच हजार पुरूषों के अटकल थे।।
- Mark 6:38–44 मरकुस 6:38–44उस ने उन से कहा; जाकर देखो तुम्हारे पास कितनी रोटियां हैं? उन्हों ने मालूम करके कहा; पांच और दो मछली भी। तब उस ने उन्हें आज्ञा दी, कि सब को हरी घास पर पांति पांति से बैठा दो। वे सौ सौ और पचास पचास करके पांति पांति बैठ गए। और उस ने उन पांच रोटियों को और दो मछलियों को लिया, और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियां तोड़ तोड़ कर चेलों को देता गया, कि वे लोगों को परोसें, और वे दो मछलियां भी उन सब में बांट दीं। और सब खाकर तृप्त हो गए। और उन्हों ने टुकडों से बारह टोकरियां भर कर उठाई, और कुछ मछलियों से भी। जिन्हों ने रोटियां खाई, वे पांच हजार पुरूष थे।।
- Luke 9:12–17 लूका 9:12–17जब दिन ढलने लगा, तो बारहों ने आकर उससे कहा, भीड़ को विदा कर, कि चारों ओर के गावों और बस्तियों में जाकर टिकें, और भोजन का उपाय करें, क्योंकि हम यहां सुनसान जगह में हैं। उस ने उन से कहा, तुम ही उन्हें खाने को दो: उन्हों ने कहा, हमारे पास पांच रोटियां और दो मछली को छोड़ और कुछ नहीं: परन्तु हां, यदि हम जाकर इन सब लोगों के लिये भोजन मोल लें, तो हो सकता है: वे लोग तो पांच हजार पुरूषों के लगभग थे। जब उस ने अपने चेलों से कहा, उन्हें पचास पचास करके पांति में बैठा दो। उन्हों ने ऐसा ही किया, और सब को बैठा दिया। तब उस ने वे पांच रोटियां और दो मछली लीं, और स्वर्ग की और देखकर धन्यवाद किया, और तोड़ तोड़कर चेलों को देता गया, कि लोगों को परोसें। सो सब खाकर तृप्त हुए, और बचे हुए टुकड़ों से बारह टोकरी भरकर उठाई।।