Matthew · chapter 13 · verse 21
Matthew 13:21 in Hindi
पर अपने में जड़ न रखने के कारण वह थोड़े ही दिन का है, और जब वचन के कारण क्लेश या उपद्रव होता है, तो तुरन्त ठोकर खाता है।
Par apane mem jad na rakhane ke kaaran vah thode hee din kaa hai, aur jab vachan ke kaaran klesh yaa upadrav hotaa hai, to turant thokar khaataa hai.
Matthew 13:21 in English
- King James Version (KJV)
- Yet hath he not root in himself, but dureth for a while: for when tribulation or persecution ariseth because of the word, by and by he is offended.
- World English Bible (WEB)
- yet he has no root in himself, but endures for a while. When oppression or persecution arises because of the word, immediately he stumbles.
- American Standard Version (ASV)
- yet hath he not root in himself, but endureth for a while; and when tribulation or persecution ariseth because of the word, straightway he stumbleth.
- Bible in Basic English (BBE)
- But having no root in himself, he goes on for a time; and when trouble comes or pain, because of the word, he quickly becomes full of doubts.
- Darby Translation (DBY)
- but has no root in himself, but is for a time only; and when tribulation or persecution happens on account of the word, he is immediately offended.
- Webster's Bible (WBS)
- Yet he hath not root in himself, but endureth for a while: for when tribulation or persecution ariseth because of the word, forthwith he is offended.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and he hath not root in himself, but is temporary, and persecution or tribulation having happened because of the word, immediately he is stumbled.
Read in context
- 19जो कोई राज्य का वचन सुनकर नहीं समझता, उसके मन में जो कुछ बोया गया था, उसे वह दुष्ट आकर छीन ले जाता है; यह वही है, जो मार्ग के किनारे बोया गया था।
- 20और जो पत्थरीली भूमि पर बोया गया, यह वह है, जो वचन सुनकर तुरन्त आनन्द के साथ मान लेता है।
- 21पर अपने में जड़ न रखने के कारण वह थोड़े ही दिन का है, और जब वचन के कारण क्लेश या उपद्रव होता है, तो तुरन्त ठोकर खाता है।
- 22जो झाड़ियों में बोया गया, यह वह है, जो वचन को सुनता है, पर इस संसार की चिन्ता और धन का धोखा वचन को दबाता है, और वह फल नहीं लाता।
- 23जो अच्छी भूमि में बोया गया, यह वह है, जो वचन को सुनकर समझता है, और फल लाता है कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना।
Cross references
- Matthew 11:6 मत्ती 11:6और धन्य है वह, जो मेरे कारण ठोकर न खाए।
- 2 Peter 1:8–9 2 पतरस 1:8–9क्योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्फल न होने देंगी। और जिस में ये बातें नहीं, वह अन्धा है, और धुन्धला देखता है, और अपने पूर्वकाली पापों से धुलकर शुद्ध होने को भूल बैठा है।
- Ephesians 3:17 इफिसियों 3:17और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़कर और नेव डाल कर।
- Hosea 6:4 होशे 6:4हे एप्रैम, मैं तुझ से क्या करूं? हे यहूदा, मैं तुझ से क्या करूं? तुम्हार स्नेह तो भोर के मेघ के समान, और सवेरे उड़ जानेवाली ओस के समान है।
- Proverbs 12:3 नीतिवचन 12:3कोई मनुष्य दुष्टता के कारण स्थिर नहीं होता, परन्तु धर्मियों की जड़ उखड़ने की नहीं।
- Job 19:28 अय्यूब 19:28तौभी मुझ में तो धर्म का मूल पाया जाता है! और तुम जो कहते हो हम इसको क्योंकर सताएं!
- John 15:5–7 यूहन्ना 15:5–7में दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली की नाई फेंक दिया जाता, और सूख जाता है; और लोग उन्हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं। यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा।
- Mark 13:12–13 मरकुस 13:12–13और भाई को भाई, और पिता को पुत्रा घात के लिये सौंपेंगे, और लड़केबाले माता- पिता के विरोध में उठकर उन्हें मरवा डालेंगे। और मेरे नाम के कारण सब लोग तुम से बैर करेंगे; पर जो अन्त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा।।
- John 12:25–26 यूहन्ना 12:25–26जो अपने प्राण को प्रिय जानता है, वह उसे खो देता है; और जो इस जगत में अपने प्राण को अप्रिय जानता हे, वह उसे खो देता है; और जो इस जगत में अपने प्राण को अप्रिय जानता है; वह अनन्त जीवन के लिये उस की रक्षा करता करेगा। यदि कोई मेरी सेवा करे, तो मेरे पीछे हो ले; और जहां मैं हूं वहां मेरा सेवक भी होगा; यदि कोई मेरी सेवा करे, तो पिता उसका आदर करेगा।
- Psalm 36:3 भजन संहिता 36:3उसकी बातें अनर्थ और छल की हैं; उस ने बुद्धि और भलाई के काम करने से हाथ उठाया है।
- Job 27:8–10 अय्यूब 27:8–10जब ईश्वर भक्तिहीन मनुष्य का प्राण ले ले, तब यद्यपि उस ने धन भी प्राप्त किया हो, तौभी उसकी क्या आशा रहेगी? जब वह संकट में पड़े, तब क्या ईश्वर उसकी दोहाई सुनेगा? क्या वह सर्वशक्तिमान में सुख पा सकेगा, और हर समय ईश्वर को पुकार सकेगा?
- John 6:61–65 यूहन्ना 6:61–65यीशु ने अपने मन में यह जान कर कि मेरे चेले आपस में इस बात पर कुड़कुड़ाते हैं, उन से पूछा, क्या इस बात से तुम्हें ठोकर लगती है? और यदि तुम मनुष्य के पुत्रा को जहां वह पहिले था, वहां ऊपर जाते देखोगे, तो क्या होगा? आत्मा तो जीवनदायक है, शरीर से कुछ लाभ नहीं: जो बातें मैं ने तुम से कहीं हैं वे आत्मा है, और जीवन भी हैं। परन्तु तुम में से कितने ऐसे हैं जो विश्वास नहीं करते: क्योंकि यीशु तो पहिले ही से जानता था कि जो विश्वास नहीं करते, वे कौन हैं? और कौन मुझे पकड़वाएगा। और उस ने कहा, इसी लिये मैं ने तुम से कहा था कि जब तक किसी को पिता की ओर यह बरदान न दिया जाए तक तक वह मेरे पास नहीं आ सकता।