Matthew · chapter 26 · verse 57
Matthew 26:57 in Hindi
और यीशु के पकड़नेवाले उस को काइफा नाम महायाजक के पास ले गए, जहां शास्त्री और पुरनिए इकट्ठे हुए थे।
Aur yeeshu ke pakadanevaale us ko kaaiphaa naam mahaayaajak ke paas le gae, jahaam shaastree aur puranie ikatthe hue the.
Matthew 26:57 in English
- King James Version (KJV)
- And they that had laid hold on Jesus led [him] away to Caiaphas the high priest, where the scribes and the elders were assembled.
- World English Bible (WEB)
- Those who had taken Jesus led him away to Caiaphas the high priest, where the scribes and the elders were gathered together.
- American Standard Version (ASV)
- And they that had taken Jesus led him away to [the house of] Caiaphas the high priest, where the scribes and the elders were gathered together.
- Bible in Basic English (BBE)
- And those who had made Jesus prisoner took him away to the house of Caiaphas, the high priest, where the scribes and those in authority over the people had come together.
- Darby Translation (DBY)
- Now they that had seized Jesus led [him] away to Caiaphas the high priest, where the scribes and the elders were assembled.
- Webster's Bible (WBS)
- And they that had laid hold on Jesus, led [him] away to Caiaphas the high priest, where the scribes and the elders were assembled.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And those laying hold on Jesus led [him] away unto Caiaphas the chief priest, where the scribes and the elders were gathered together,
Read in context
- 55उसी घड़ी यीशु ने भीड़ से कहा; क्या तुम तलवारें और लाठियां लेकर मुझे डाकू के समान पकड़ने के लिये निकले हो? मैं हर दिन मन्दिर में बैठकर उपदेश दिया करता था, और तुम ने मुझे नहीं पकड़ा।
- 56परन्तु यह सब इसलिये हुआ है, कि भविष्यद्वक्ताओं के वचन के पूरे हों: तब सब चेलें उसे छोड़कर भाग गए।।
- 57और यीशु के पकड़नेवाले उस को काइफा नाम महायाजक के पास ले गए, जहां शास्त्री और पुरनिए इकट्ठे हुए थे।
- 58और पतरस दूर से उसके पीछे पीछे महायाजक के आंगन तक गया, और भीतर जाकर अन्त देखने को प्यादों के साथ बैठ गया।
- 59महायाजक और सारी महासभा यीशु को मार डालने के लिये उसके विरोध में झूठी गवाही की खोज में थे।
Cross references
- Matthew 26:3 मत्ती 26:3तब महायाजक और प्रजा के पुरनिए काइफा नाम महायाजक के आंगन में इकट्ठे हुए।
- John 18:12–14 यूहन्ना 18:12–14तब सिपाहियों और उन के सूबेदार और यहूदियों के प्यादों ने यीशु को पकड़कर बान्ध लिया। और पहिले उसे हन्ना के पास ले गए क्योंकि वह उस वर्ष के महायाजक काइफा का ससुर था। यह वही काइफा था, जिस ने यहूदियों को सलाह दी थी कि हमारे लोगों के लिये एक पुरूष का मरना अच्छा है।
- Mark 14:53–65 मरकुस 14:53–65फिर वे यीशु को महायाजक के पास ले गए; और सब महायाजक और पुरनिए और शास्त्री उसके यहां इकट्ठे हो गए। पतरस दूर ही दूर से उसके पीछे पीछे महायाजक के आंगन के भीतर तक गया, और प्यादों के साथ बैठ कर आग तापने लगा। महायाजक और सारी महासभा यीशु के मार डालने के लिये उसके विरोध में गवाही की खोज में थे, पर न मिली। क्योंकि बहुतेरे उसके विरोध में झूठी गवाही दे रहे थे, पर उन की गवाही एक सी न थी। तब कितनों ने उठकर उस पर यह झूठी गवाही दी। कि हम ने इसे यह कहते सुना है कि मैं इस हाथ के बनाए हुए मन्दिर को ढ़ा दूंगा, और तीन दिन में दूसरा बनाऊंगा, जो हाथ से न बना हो। इस पर भी उन की गवाही एक सी न निकली। तब महायाजक ने बीच में खड़े होकर यीशु से पूछा; कि तू कोई उत्तर नहीं देता? ये लोग तेरे विरोध में क्या गवाही देते हैं? परन्तु वह मौन साधे रहा, और कुछ उत्तर न दिया: महायाजक ने उस से फिर पूछा, क्या तू उस परम धन्य का पुत्रा मसीह है? यीशु ने कहा; हां मैं हूं: और तुम मनुष्य के पुत्रा को सर्वशक्तिमान की दहिनी और बैठे, और आकाश के बादलों के साथ आते देखोगे। तब महायाजक ने अपने वस्त्रा फाड़कर कहा; अब हमें गवाहों का क्या प्रयोजन है? तुम ने यह निन्दा सुनी: तुम्हारी क्या राय है उन सब ने कहा, वह वध के योग्य है। तब कोई तो उस पर थूकने, और कोई उसका मुंह ढांपने और उसे घूसे मारने, और उस से कहने लगे, कि भविष्यद्वाणी कर: और प्यादों ने उसे लेकर थप्पड़ मारे।।
- John 11:49 यूहन्ना 11:49तब उन में से काइफा नाम एक व्यक्ति ने जो उस वर्ष का महायाजक था, उन से कहा, तुम कुछ नहीं जानते।
- Luke 22:54–55 लूका 22:54–55फिर वे उसे पकड़कर ले चले, और महायाजक के घर में लाए और पतरस दूर ही दूर उसके पीछे पीछे चलता था। और जब वे आंगन में आग सुलगाकर इकट्ठे बैठे, तो पतरस भी उन के बीच में बैठ गया।
- John 18:19–24 यूहन्ना 18:19–24तक महायाजक ने यीशु से उसके चेलों के विषय में और उसके उपदेश के विषय में पूछा। यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि मैं ने जागत से खोलकर बातें की; मैं ने सभाओं और आराधनालय में जहां सब यहूदी इकट्ठे हुआ करते हैं सदा उपदेश किया और गुप्त में कुछ भी नहीं कहा। तू मुझ से क्यों पूछता है? सुननेवालों से पूछ: कि मैं ने उन से क्या कहा? देख वे जानते हैं; कि मैं ने क्या क्या कहा? तब उस ने यह कहा, तो प्यादों में से एक ने जो पास खड़ा था, यीशु को थप्पड़ मारकर कहा, क्या तू महायाजक को इस प्रकार उत्तर देता है। यीशु ने उसे उत्तर दिया, यदि मैं ने बुरा कहा, तो उस बुराई पर गवाही दे; परन्तु यदि भला कहा, तो मुझे क्यों मारता है? हन्ना ने उसे बन्धे हुए काइफा महायाजक के पास भेज दिया।।
- Psalm 56:5–6 भजन संहिता 56:5–6वे दिन भर मेरे वचनों को, उलटा अर्थ लगा लगाकर मरोड़ते रहते हैंद्ध उनकी सारी कल्पनाएं मेरी ही बुराई करने की होती है। वे सब मिलकर इकट्ठे होते हैं और छिपकर बैठते हैं; वे मेरे कदमों को देखते भालते हैं मानों वे मेरे प्राणों की घात में ताक लगाए बैठें हों।
Original words (Greek)
- And · G1161δέ dé
- on · G2902κρατέω kratéō
- Jesus · G2424Ἰησοῦς Iēsoûs
- led · G520ἀπάγω apágō
- away · G520ἀπάγω apágō
- to · G4314πρός prós
- Caiaphas · G2533Καϊάφας Kaïáphas
- priest · G749ἀρχιερεύς archiereús
- where · G3699ὅπου hópou
- scribes · G1122γραμματεύς grammateús
- and · G2532καί kaí
- elders · G4245πρεσβύτερος presbýteros
- assembled · G4863συνάγω synágō