Matthew · chapter 6 · verse 30
Matthew 6:30 in Hindi
इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्त्रा पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा?
Isaliye jab parameshvar maidaan kee ghaas ko, jo aaj hai, aur kal bhaad mem jhonkee jaaegee, aisaa vastraa pahinaataa hai, to he alpavishvaasiyom, tum ko vah kyonkar na pahinaaegaa?
Matthew 6:30 in English
- King James Version (KJV)
- Wherefore, if God so clothe the grass of the field, which to day is, and to morrow is cast into the oven, [shall he] not much more [clothe] you, O ye of little faith?
- World English Bible (WEB)
- But if God so clothes the grass of the field, which today exists and tomorrow is thrown into the oven, won’t he much more clothe you, you of little faith?
- American Standard Version (ASV)
- But if God doth so clothe the grass of the field, which to-day is, and to-morrow is cast into the oven, [shall he] not much more [clothe] you, O ye of little faith?
- Bible in Basic English (BBE)
- But if God gives such clothing to the grass of the field, which is here today and tomorrow is put into the oven, will he not much more give you clothing, O you of little faith?
- Darby Translation (DBY)
- But if God so clothe the herbage of the field, which is to-day, and to-morrow is cast into [the] oven, will he not much rather you, O [ye] of little faith?
- Webster's Bible (WBS)
- Wherefore, if God so clotheth the grass of the field, which to-day is, and to-morrow is cast into the oven, [will he] not much more [clothe] you, O ye of little faith?
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'And if the herb of the field, that to-day is, and to-morrow is cast to the furnace, God doth so clothe — not much more you, O ye of little faith?
Read in context
- 28और वस्त्रा के लिये क्यों चिन्ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं।
- 29तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे विभव में उन में से किसी के समान वस्त्रा पहिने हुए न था।
- 30इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्त्रा पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा?
- 31इसलिये तुम चिन्ता करके यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे?
- 32क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए।
Cross references
- Luke 12:28 लूका 12:28इसलिये यदि परमेश्वर मैदान की घास को जो आज है, और कर भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा पहिनाता है; तो हे अल्प विश्वासियों, वह तुम्हें क्यों न पहिनाएगा?
- Matthew 14:31 मत्ती 14:31यीशु ने तुरन्त हाथ बढ़ाकर उसे थाम लिया, और उस से कहा, हे अल्प- विश्वासी, तू ने क्यों सन्देह किया?
- 1 Peter 1:24 1 पतरस 1:24क्योंकि हर एक प्राणी घास की नाईं है, और उस की सारी शोभा घास के फूल की नाईं है: घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है।
- Matthew 8:26 मत्ती 8:26उस ने उन से कहा; हे अल्पविश्वासियों, क्यों डरते हो? तब उस ने उठकर आन्धी और पानी को डांटा, और सब शान्त हो गया।
- Matthew 16:8 मत्ती 16:8यह जानकर, यीशु ने उन से कहा, हे अल्पविश्वासियों, तुम आपस में क्यों विचार करते हो कि हमारे पास रोटी नहीं?
- James 1:10–11 याकूब 1:10–11और धनवान अपनी नीच दशा पर: क्योंकि वह घास के फूल की नाई जाता रहेगा। क्योंकि सूर्य उदय होते ही कड़ी धूप पड़ती है और घास को सुखा देती है, और उसका फूल झड़ जाता है, और उस की शोभा जाती रहती है; उसी प्रकार धनवान भी अपने मार्ग पर चलते चलते धूल में मिल जाएगा।
- John 20:27 यूहन्ना 20:27तब उस ने थोमा से कहा, अपनी उंगली यहां लाकर मेरे पंजर में डाल और अविश्वासी नहीं परन्तु विश्वासी हो।
- Mark 4:40 मरकुस 4:40और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं?
- Hebrews 3:12 इब्रानियों 3:12हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी न मन हो, जो जीवते परमेश्वर से दूर हट जाए।
- Luke 9:41 लूका 9:41यीशु न उत्तर दिया, हे अविश्वासी और हठिले लोगो, मैं कब तक तुम्हारे साथ रहूंगा, और तुम्हारी सहूंगा? अपने पुत्रा को यहां ले आ।
- Isaiah 40:6–8 यशायाह 40:6–8बोलनेवाले का वचन सुनाई दिया, प्रचार कर! मैं ने कहा, मैं क्या प्रचार करूं? सब प्राणी घास हैं, उनकी शोभा मैदान के फूल के समान है। जब यहोवा की सांस उस पर चलती है, तब घास सूख जाती है, और फूल मुर्झा जाता है; नि:सन्देह प्रजा घास है। घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा।।
- Psalm 90:5–6 भजन संहिता 90:5–6तू मनुष्यों को धारा में बहा देता है; वे स्वप्न से ठहरते हैं, वे भोर को बढ़नेवाली घास के समान होते हैं। वह भोर को फूलती और बढ़ती है, और सांझ तक काटकर मुर्झा जाती है।।