Matthew · chapter 9 · verse 3
Matthew 9:3 in Hindi
और देखो, कई शास्त्रियों ने सोचा, कि यह तो परमेश्वर की निन्दा करता है।
Aur dekho, kaee shaastriyom ne sochaa, ki yah to parameshvar kee nindaa karataa hai.
Matthew 9:3 in English
- King James Version (KJV)
- And, behold, certain of the scribes said within themselves, This [man] blasphemeth.
- World English Bible (WEB)
- Behold, some of the scribes said to themselves, “This man blasphemes.”
- American Standard Version (ASV)
- And behold, certain of the scribes said within themselves, This man blasphemeth.
- Bible in Basic English (BBE)
- And some of the scribes said among themselves, This man has no respect for God.
- Darby Translation (DBY)
- And behold, certain of the scribes said to themselves, This [man] blasphemes.
- Webster's Bible (WBS)
- And behold, certain of the scribes said within themselves, This [man] blasphemeth.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And lo, certain of the scribes said within themselves, 'This one doth speak evil.'
Read in context
- 1फिर वह नाव पर चढ़कर पार गया; और अपने नगर में आया।
- 2और देखो, कई लोग एक झोले के मारे हुए को खाट पर रखकर उसके पास लाए; यीशु ने उन का विश्वास देखकर, उस झोले के मारे हुए से कहा; हे पुत्रा, ढाढ़स बान्ध; तेरे पाप क्षमा हुए।
- 3और देखो, कई शास्त्रियों ने सोचा, कि यह तो परमेश्वर की निन्दा करता है।
- 4यीशु ने उन के मन की बातें मालूम करके कहा, कि तुम लोग अपने अपने मन में बुरा विचार क्यों कर रहे हो?
- 5सहज क्या है, यह कहना, कि तेरे पाप क्षमा हुए; या यह कहना कि उठ और चल फिर।
Cross references
- Matthew 26:65 मत्ती 26:65तब महायाजक ने अपने वस्त्रा फाड़कर कहा, इस ने परमेश्वर की निन्दा की है, अब हमें गवाहों का क्या प्रयोजन?
- Leviticus 24:16 लैव्यव्यवस्था 24:16यहोवा के नाम की निन्दा करनेवाला निश्चय मार डाला जाए; सारी मण्डली के लोग निश्चय उसको पत्थरवाह करें; चाहे देशी हो चाहे परदेशी, यदि कोई उस नाम की निन्दा करें तो वह मार डाला जाए।
- Luke 5:21 लूका 5:21तब शास्त्री और फरीसी विवाद करने लगे, कि यह कौन है, जो परमेश्वर की निन्दा करता है? परमेश्वर का छोड़ कौन पापों की क्षमा कर सकता है?
- Mark 14:64 मरकुस 14:64तुम ने यह निन्दा सुनी: तुम्हारी क्या राय है उन सब ने कहा, वह वध के योग्य है।
- Mark 2:6–7 मरकुस 2:6–7तब कई एक शास्त्री जो वहां बैठे थे, अपने अपने मन में विचार करने लगे। कि यह मनुष्य क्यों ऐसा कहता है? यह तो परमेश्वर की निन्दा करता है, परमेश्वर को छोड़ और कोन पाप क्षमा कर सकता है?
- Luke 7:39–40 लूका 7:39–40यह देखकर, वह फरीसी जिस ने उसे बुलाया था, अपने मन में सोचने लगा, यदि यह भविष्यद्वक्ता होता तो जान लेता, कि यह जो उसे छू रही है, वह कौन और कैसी स्त्री है? क्यशेंकि वह तो पापिनी है। यह सुन यीशु ने उसके उत्तर में कहा; कि हे शमौन मुझे तुझ से कुछ कहना है वह बोला, हे गुरू कह।
- John 10:33–36 यूहन्ना 10:33–36यहूदियों ने उस को उत्तर दिया, कि भले काम के लिये हम तुझे पत्थरवाह नहीं करते, परन्तु परमेश्वर की निन्दा के कारण और इसलिये कि तू मनुष्य होकर अपने आप को परमेश्वर बनाता है। यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, क्या तुम्हारी व्यवस्था में नहीं लिखा है कि मैं ने कहा, तुम ईश्वर हो? यदि उस ने उन्हें ईश्वर कहा जिन के पास परमेश्वर का वचन पहुंचा (और पवित्रा शास्त्रा की बात लोप नहीं हो सकती।) तो जिसे पिता ने पवित्रा ठहराकर जगत में भेजा है, तुम उस से कहते हो कि तू निन्दा करता है, इसलिये कि मैं ने कहा, मैं परमेश्वर का पुत्रा हूं।
- Matthew 7:29 मत्ती 7:29क्योंकि वह उन के शास्त्रियों के समान नहीं परन्तु अधिकारी की नाई उन्हें उपदेश देता था।।
- Acts 6:11–13 प्रेरितों के काम 6:11–13इस पर उन्हो ने कई लोगों को उभारा जो कहने लगे, कि हम ने इस मूसा और परमेश्वर के विरोध में निन्दा की बातें कहते सुना है। और लोगों और प्राचीनों और शास्त्रियों को भड़काकर चढ़ आए और उसे पकड़कर महासभा में ले आए। और झूठे गवाह खड़े किए, जिन्हों ने कहा कि यह मनुष्य इस पवित्रा स्थान और व्यवस्था के विरोध में बोलना नहीं छोड़ता।
- Mark 7:21 मरकुस 7:21क्योंकि भीतर से अर्थात् मनुष्य मे मन से, बुरी बुरी चिन्ता व्यभिचार।