Numbers · chapter 13 · verse 20
Numbers 13:20 in Hindi
और वह देश कैसा है, उपजाऊ है वा बंजर है, और उस में वृक्ष हैं वा नहीं। और तुम हियाव बान्धे चलो, और उस देश की उपज में से कुछ लेते भी आना। वह समय पहली पक्की दाखों का था।
Aur vah desh kaisaa hai, upajaaoo hai vaa banjar hai, aur us mem vruksh haim vaa naheen. Aur tum hiyaav baandhe chalo, aur us desh kee upaj mem se kuchh lete bhee aanaa. Vah samay pahalee pakkee daakhom kaa thaa.
Numbers 13:20 in English
- King James Version (KJV)
- And what the land [is], whether it [be] fat or lean, whether there be wood therein, or not. And be ye of good courage, and bring of the fruit of the land. Now the time [was] the time of the firstripe grapes.
- World English Bible (WEB)
- and what the land is, whether it is fertile or poor, whether there is wood therein, or not. Be courageous, and bring some of the fruit of the land.” Now the time was the time of the first-ripe grapes.
- American Standard Version (ASV)
- and what the land is, whether it is fat or lean, whether there is wood therein, or not. And be ye of good courage, and bring of the fruit of the land. Now the time was the time of the first-ripe grapes.
- Bible in Basic English (BBE)
- And if the land is fertile or poor, and if there is wood in it or not. And be of good heart, and come back with some of the produce of the land. Now it was the time when the first grapes were ready.
- Darby Translation (DBY)
- and what the land is, whether it is fat or lean, whether there are trees in it, or not. And take courage, and bring of the fruit of the land. Now the time was the time of the first grapes.
- Webster's Bible (WBS)
- And what the land [is] , whether it [is] fertile or barren, whether there is wood in it, or not. And be ye of good courage, and bring of the fruit of the land. Now the time [was] the time of the first ripe grapes.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And what the land [is], whether it [is] fat or lean; whether there is wood in it or not; and ye have strengthened yourselves, and have taken of the fruit of the land;' and the days [are] days of the first-fruits of grapes.
Read in context
- 18और पहाड़ी देश में जाकर उस देश को देख लो कि कैसा है, और उस में बसे हुए लोगों को भी देखो कि वे बलवान् हैं वा निर्बल, थोड़े हैं वा बहुत,
- 19और जिस देश में वे बसे हुए हैं सो कैसा है, अच्छा वा बुरा, और वे कैसी कैसी बस्तियों में बसे हुए हैं, और तम्बुओं में रहते हैं वा गढ़ वा किलों में रहते हैं,
- 20और वह देश कैसा है, उपजाऊ है वा बंजर है, और उस में वृक्ष हैं वा नहीं। और तुम हियाव बान्धे चलो, और उस देश की उपज में से कुछ लेते भी आना। वह समय पहली पक्की दाखों का था।
- 21सो वे चल दिए, और सीन नाम जंगल से ले रहोब तक, जो हमात के मार्ग में है, सारे देश को देखभालकर उसका भेद लिया।
- 22सो वे दक्षिण देश होकर चले, और हेब्रोन तक गए; वहां अहीमन, शेशै, और तल्मै नाम अनाकवंशी रहते थे। हेब्रोन तो मि के सोअन से सात वर्ष पहिले बसाया गया था।
Cross references
- Deuteronomy 31:23 व्यवस्थाविवरण 31:23और उस ने नून के पुत्रा यहोशू को यह आज्ञा दी, कि हियाव बान्ध और दृढ़ हो; क्योंकि इस्राएलियों को उस देश में जिसे उन्हें देने को मैं ने उन से शपथ खाई है तू पहुंचाएगा; और मैं आप तेरे संग रहूंगा।।
- Deuteronomy 31:6–8 व्यवस्थाविवरण 31:6–8तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलनेवाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा। तब मूसा ने यहोशू को बुलाकर सब इस्राएलियों के सम्मुख कहा, कि तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो जा; क्योंकि इन लोगों के संग उस देश में जिसे यहोवा ने इनके पूर्वजों से शपथ खाकर देने को कहा था तू जाएगा; और तू इनको उसका अधिकारी कर देगा। और तेरे आगे आगे चलनेवाला यहोवा है; वह तेरे संग रहेगा, और न तो तुझे धोखा देगा और न छोड़ देगा; इसलिये मत डर और तेरा मन कच्चा न हो।।
- Ezekiel 34:14 यहेजकेल 34:14मैं उन्हें अच्छी चराई में चराऊंगा, और इस्राएल के ऊंचे ऊंचे पहाड़ों पर उन को चराई मिलेगी; वहां वे अच्छी हरियाली में बैठा करेंगी, और इस्राएल के पहाड़ों पर उत्तम से उत्तम चराई चरेंगी।
- Nehemiah 9:35 नहेमायाह 9:35उन्हों ने अपने राज्य में, और उस बड़े कल्याण के समय जो तू ने उन्हें दिया था, और इस लम्बे चौड़े और उपजाऊ देश में तेरी सेवा नहीं की; और न अपने बुरे कामों से पश्चाताप किया।
- Nehemiah 9:25 नहेमायाह 9:25और उन्हों ने गढ़वाले नगर और उपजाऊ भूमि ले ली, और सब भांति की अच्छी वस्तुओं से भरे हुए घरों के, और खुदे हुए हौदों के, और दाख और जलपाई बारियों के, और खाने के फलवाले बहुत से वृक्षों के अधिकारी हो गए; वे उसे खा खाकर तृप्त हुए, और हृष्ट- पुष्ट हो गए, और तेरी बड़ी भलाई के कारण सुख भोगते रहे।
- Joshua 1:6 यहोशू 1:6इसलिये हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; क्योंकि जिस देश के देने की शपथ मैं ने इन लोगों के पूर्वजों से खाई थी उसका अधिकारी तू इन्हें करेगा।
- Micah 7:1 मीका 7:1हाय मुझ पर! क्योंकि मैं उस जल के समान हो गया हूं जो धूपकाल के फल तोड़ने पर, वा रही हुठ दाख बीनने के समय के अन्त में आ जाए, मुझे तो पक्की अंजीरों की लालसा थी, परन्तु खाने के लिये कोई गुच्छा नही रहा।
- 1 Chronicles 22:11 1 इतिहास 22:11अब हे मेरे पुत्रा, यहोवा तेरे संग रहे, और तू कृतार्थ होकर उस वचन के अनुसार जो तेरे परमेश्वर यहोवा ने तेरे विषय कहा है, उसका भवन बनाना।
- Joshua 2:3 यहोशू 2:3तब यरीहो के राजा ने राहाब के पास यों कहला भेजा, कि जो पुरूष तेरे यहां आए हैं उन्हें बाहर ले आ; क्योंकि वे सारे देश का भेद लेने को आए हैं।
- Joshua 2:22–23 यहोशू 2:22–23और वे जाकर पहाड़ तक पहुंचे, और वहां खोजनेवालों के लौटने तक, अर्थात् तीन दिन तक रहे; और खोजनेवाले उनको सारे मार्ग में ढूंढ़ते रहे और कहीं न पाया। तब वे दोनों पुरूष पहाड़ से उतरे, और पार जाकर नून के पुत्रा यहोशू के पास पहुंचकर जो कुछ उन पर बीता था उसका वर्णन किया।
- Joshua 1:9 यहोशू 1:9क्या मैं ने तुझे आज्ञा नहीं दी? हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; भय न खा, और तेरा मन कच्चा न हो; क्योंकि जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे संग रहेगा।।
- Hebrews 13:6 इब्रानियों 13:6इसलिये हम बेधड़क होकर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है।।
Original words (Hebrew)
- land · H776אֶרֶץ ʼerets
- fat · H8082שָׁמֵן shâmên
- lean · H7330רָזֶה râzeh
- be · H3426יֵשׁ yêsh
- wood · H6086עֵץ ʻêts
- courage · H2388חָזַק châzaq
- bring · H3947לָקַח lâqach
- fruit · H6529פְּרִי pᵉrîy
- land · H776אֶרֶץ ʼerets
- time · H3117יוֹם yôwm
- time · H3117יוֹם yôwm
- firstripe · H1061בִּכּוּר bikkûwr
- grapes · H6025עֵנָב ʻênâb