Philippians · chapter 2 · verse 28
Philippians 2:28 in Hindi
इसलिये मैं ने उसे भेजने का और भी यत्न किया कि तुम उस से फिर भेंट करके आनन्दित हो जाओ और मेरा भी शोक घट जाए।
Isaliye maim ne use bhejane kaa aur bhee yatn kiyaa ki tum us se phir bhent karake aanandit ho jaao aur meraa bhee shok ghat jaae.
Philippians 2:28 in English
- King James Version (KJV)
- I sent him therefore the more carefully, that, when ye see him again, ye may rejoice, and that I may be the less sorrowful.
- World English Bible (WEB)
- I have sent him therefore the more diligently, that when you see him again, you may rejoice, and that I may be the less sorrowful.
- American Standard Version (ASV)
- I have sent him therefore the more diligently, that, when ye see him again, ye may rejoice, and that I may be the less sorrowful.
- Bible in Basic English (BBE)
- I have sent him, then, the more gladly, so that when you see him again, you may be happy and I may have the less sorrow.
- Darby Translation (DBY)
- I have sent him therefore the more diligently, that seeing him ye might again rejoice, and that I might be the less sorrowful.
- Webster's Bible (WBS)
- I sent him therefore the more speedily, that, when ye see him again, ye may rejoice, and that I may be the less sorrowful.
- Young's Literal Translation (YLT)
- The more eagerly, therefore, I did send him, that having seen him again ye may rejoice, and I may be the less sorrowful;
Read in context
- 26क्योंकि उसका मन तुम सब में लगा हुआ था, इस कारण वह व्याकुल रहता था क्योंकि तुम ने उस की बीमारी का हाल सुना था।
- 27और निश्चय वह बीमार तो हो गया था, यहां तक कि मरने पर था, परन्तु परमेश्वर ने उस पर दया की; और केवल उस ही पर नहीं, पर मुझ पर भी, कि मुझे शोक पर शोक न हो।
- 28इसलिये मैं ने उसे भेजने का और भी यत्न किया कि तुम उस से फिर भेंट करके आनन्दित हो जाओ और मेरा भी शोक घट जाए।
- 29इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना।
- 30क्योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठाकर मरने के निकट हो गया था, ताकि जो घटी तुम्हारी ओर से मेरी सेवा में हुई, उसे पूरा करे॥
Cross references
- John 16:22 यूहन्ना 16:22और तुम्हें भी अब तो शोक है, परन्तु मैं तुम से फिर मिलूंगा और तुम्हारे मन में आनन्द होगा; और तुम्हारा आनन्द कोई तुम से छीन न लेगा।
- 2 Timothy 1:4 2 तीमुथियुस 1:4और तेरे आंसुओं की सुधि कर करके रात दिन तुझ से भेंट करने की लालसा रखता हूं कि आनन्द से भर जाऊं।
- Philippians 2:26–27 फिलिप्पियों 2:26–27क्योंकि उसका मन तुम सब में लगा हुआ था, इस कारण वह व्याकुल रहता था क्योंकि तुम ने उस की बीमारी का हाल सुना था। और निश्चय वह बीमार तो हो गया था, यहां तक कि मरने पर था, परन्तु परमेश्वर ने उस पर दया की; और केवल उस ही पर नहीं, पर मुझ पर भी, कि मुझे शोक पर शोक न हो।
- Genesis 45:27–28 उत्पत्ति 45:27–28तब उन्हों ने अपने पिता याकूब से यूसुफ की सारी बातें, जो उस ने उन से कहीं थी, कह दीं; जब उस ने उन गाड़ियों को देखा, जो यूसुफ ने उसके ले आने के लिये भेजीं थीं, तब उसका चित्त स्थिर हो गया। और इस्राएल ने कहा, बस, मेरा पुत्रा यूसुफ अब तक जीवित है: मैं अपनी मृत्यु से पहिले जाकर उसको देखंूगा।।
- Genesis 46:29–30 उत्पत्ति 46:29–30तब यूसुफ अपना रथ जुतवाकर अपने पिता इस्राएल से भेंट करने के लिये गोशेन देश को गया, और उस से भेंट करके उसके गले से लिपटा हुआ रोता रहा। तब इस्राएल ने यूसुफ से कहा, मै अब मरने से भी प्रसन्न हूं, क्योंकि तुझे जीवित पाया और तेरा मुंह देख लिया।
- Acts 20:38 प्रेरितों के काम 20:38वे विशेष करके इस बात का शोक करते थे, जो उस ने कही थी, कि तुम मेरा मुंह फिर न देखोगे; और उन्हों ने उसे जहाज तक पहुंचाया।।
- 2 Corinthians 2:3 2 कुरिन्थियों 2:3और मैं ने यही बात तुम्हें इसलिये लिखी, कि कहीं ऐसा न हो, कि मेरे आने पर जिन से आनन्द मिलना चाहिए, मैं उन से उदास होऊं; क्योंकि मुझे तुम सब पर इस बात का भरोसा है, कि जो मेरा आनन्द है, वही तुम सब का भी है।
- Genesis 48:11 उत्पत्ति 48:11तब इस्राएल ने यूसुफ से कहा, मुझे आशा न थी, कि मैं तेरा मुख फिर देखने पाऊंगा: परन्तु देख, परमेश्वर ने मुझे तेरा वंश भी दिखाया है।
- 1 John 1:3–4 1 यूहन्ना 1:3–4जो कुछ हम ने देखा और सुना है उसका समाचार तुम्हें भी देते हैं, इसलिये कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो; और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्रा यीशु मसीह के साथ है। और ये बातें हम इसलिये लिखते हैं, कि हमारा आनन्द पूरा हो जाए।।