Proverbs · chapter 10 · verse 11
Proverbs 10:11 in Hindi
धर्मी का मुंह तो जीवन का सोता है, परन्तु उपद्रव दुष्टों का मुंह छा लेता है।
Dharmee kaa munh to jeevan kaa sotaa hai, parantu upadrav dushtom kaa munh chhaa letaa hai.
Proverbs 10:11 in English
- King James Version (KJV)
- The mouth of a righteous [man is] a well of life: but violence covereth the mouth of the wicked.
- World English Bible (WEB)
- The mouth of the righteous is a spring of life, but violence covers the mouth of the wicked.
- American Standard Version (ASV)
- The mouth of the righteous is a fountain of life; But violence covereth the mouth of the wicked.
- Bible in Basic English (BBE)
- The mouth of the upright man is a fountain of life, but the mouth of the evil-doer is a bitter cup.
- Darby Translation (DBY)
- The mouth of a righteous [man] is a fountain of life; but the mouth of the wicked covereth violence.
- Webster's Bible (WBS)
- The mouth of a righteous [man is] a well of life: but violence covereth the mouth of the wicked.
- Young's Literal Translation (YLT)
- A fountain of life [is] the mouth of the righteous, And the mouth of the wicked cover doth violence.
Read in context
- 9जो खराई से चलता है वह निडर चलता है, परन्तु जो टेढ़ी चाल चलता है उसकी चाल प्रगट हो जाती है।
- 10जो नैन से सैन करता है उस से औरों को दुख मिलता है, और जो बकवादी और मूढ़ है, वह पछाड़ खाता है।
- 11धर्मी का मुंह तो जीवन का सोता है, परन्तु उपद्रव दुष्टों का मुंह छा लेता है।
- 12बैर से तो झगड़े उत्पन्न होते हैं, परन्तु प्रेम से सब अपराध ढंप जाते हैं।
- 13समझवालों के वचनों में बुद्धि पाई जाती है, परन्तु निर्बुद्धि की पीठ के लिये कोड़ा है।
Cross references
- Proverbs 13:14 नीतिवचन 13:14बुद्धिमान की शिक्षा का जीवन का सोता है, और उसके द्वारा लोग मृत्यु के फन्दों से बच सकते हैं।
- Ephesians 4:29 इफिसियों 4:29कोई गन्दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुननेवालों पर अनुग्रह हो।
- Proverbs 18:4 नीतिवचन 18:4मनुष्य के मुंह के वचन गहिरा जल, वा उमण्डनेवाली नदी वा बुद्धि के सोते हैं।
- Proverbs 10:6 नीतिवचन 10:6धर्मी पर बहुत से आर्शीवाद होते हैं, परन्तु उपद्रव दुष्टों का मुंह छा लेता है।
- Proverbs 10:20–21 नीतिवचन 10:20–21धर्मी के वचन तो उत्तम चान्दी हैं; परन्तु दुष्टों का मन बहुत हलका होता है। धर्मी के वचनों से बहुतों का पालनपोषण होता है, परन्तु मूढ़ लोग निर्बुद्धि होने केस्रारण मर जाते हैं।
- Psalm 37:30–31 भजन संहिता 37:30–31धर्मी अपने मुंह से बुद्धि की बातें करता, और न्याय का वचन कहता है। उसके परमेश्वर की व्यवस्था उसके हृदय में बनी रहती है, उसके पैर नहीं फिसलते।।
- Proverbs 16:22–24 नीतिवचन 16:22–24जिसके बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का सोता है, परन्तु मूढ़ों को शिक्षा देना मूढ़ता ही होती है। बुद्धिमान का मन उसके मुंह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है। मनभावने वचन मधुभरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हडि्डयों को हरी- भरी करते हैं।
- Proverbs 10:32 नीतिवचन 10:32धर्मी गहणयोग्य बात समझ कर बोलता है, परन्तु दुष्टों के मुंह से उलट फेर की बातें निकलती हैं।।
- Proverbs 15:7 नीतिवचन 15:7बुद्धिमान लोग बातें करने से ज्ञान को फैलाते हैं, परन्तु मूर्खों का मन ठीक नहीं रहता।
- James 3:5–8 याकूब 3:5–8वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े बन में आग लग जाती है। जीभ भी एक आग है: भी हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है। क्योंकि हर प्रकार के बन- पशु, पक्षी, और रेंगनेवाले जन्तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं। पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रूकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है।
- Proverbs 20:15 नीतिवचन 20:15सोना और बहुत से मूंगे तो हैं; परन्तु ज्ञान की बातें अनमोल मणी ठहरी हैं।
- Ecclesiastes 10:12–14 सभोपदेशक 10:12–14बुद्धिमान के वचनों के कारण अनुग्रह होता है, परन्तु मूर्ख अपने वचनों के द्वारा नाश होते हैं। उसकी बात का आरम्भ मूर्खता का, और उनका अन्त दुखदाई बावलापन होता है। मूर्ख बहुत बातें बढ़ाकर बोलता है, तौभी कोई मनुष्य नहीं जानता कि क्या होगा, और कौन बता सकता है कि उसके बाद क्या होनेवाला है?