Proverbs · chapter 10 · verse 15
Proverbs 10:15 in Hindi
धनी का धन उसका दृढ़ नगर है, परन्तु कंगाल लोग निर्धन होने के कारण विनाश होते हैं।
Dhanee kaa dhan usakaa drudh nagar hai, parantu kangaal log nirdhan hone ke kaaran vinaash hote hain.
Proverbs 10:15 in English
- King James Version (KJV)
- The rich man’s wealth [is] his strong city: the destruction of the poor [is] their poverty.
- World English Bible (WEB)
- The rich man’s wealth is his strong city. The destruction of the poor is their poverty.
- American Standard Version (ASV)
- The rich man’s wealth is his strong city: The destruction of the poor is their poverty.
- Bible in Basic English (BBE)
- The property of the man of wealth is his strong town: the poor man's need is his destruction.
- Darby Translation (DBY)
- The rich man's wealth is his strong city; the destruction of the poor is their poverty.
- Webster's Bible (WBS)
- The rich man's wealth [is] his strong city: the destruction of the poor [is] their poverty.
- Young's Literal Translation (YLT)
- The wealth of the rich [is] his strong city, The ruin of the poor [is] their poverty.
Read in context
- 13समझवालों के वचनों में बुद्धि पाई जाती है, परन्तु निर्बुद्धि की पीठ के लिये कोड़ा है।
- 14बुद्धिमान लोग ज्ञान को रख छोड़ते हैं, परन्तु मूढ़ के बोलने से विनाश निकट आता है।
- 15धनी का धन उसका दृढ़ नगर है, परन्तु कंगाल लोग निर्धन होने के कारण विनाश होते हैं।
- 16धर्मी का परिश्रम जीवन के लिये होता है, परन्तु दुष्ट के लाभ से पाप होता है।
- 17जो शिक्षा पर चलता वह जीवन के मार्ग पर है, परन्तु जो डांट से मुंह मोड़ता, वह भटकता है।
Cross references
- Proverbs 18:11 नीतिवचन 18:11धनी का धन उसकी दृष्टि में गढ़वाला नगर, और ऊंचे पर बनी हुई शहरपनाह है।
- Proverbs 19:7 नीतिवचन 19:7जब निर्धन के सब भाई उस से बैर रखते हैं, तो निश्चय है कि उसके मित्रा उस से दूर हो जाएं। वह बातें करते हुए उनका पीछा करता है, परन्तु उनको नहीं पाता।
- Proverbs 14:20 नीतिवचन 14:20निर्धन का पड़ोसी भी उस से घृणा करता है, परन्तु धनी के बहुतेरे प्रेमी होते हैं।
- Psalm 52:7 भजन संहिता 52:7देखो, यह वही पुरूष है जिस ने परमेश्वर को अपनी शरण नहीं माना, परन्तु अपने धन की बहुतायत पर भरोसा रखता था, और अपने को दुष्टता में दृढ़ करता रहा!
- Proverbs 22:22–23 नीतिवचन 22:22–23कंगाल पर इस कारण अन्धेर न करता कि वह कंगाल है, और न दीन जन को कचहरी में पीसना; क्योंकि यहोवा उनका मुक मा लड़ेगा, और जो लोग उनका धन हर लेते हैं, उनका प्राण भी वह हर लेगा।
- Ecclesiastes 7:12 सभोपदेशक 7:12क्योंकि बुद्धि की आड़ रूपये की आड़ का काम देता है; परन्तु ज्ञान की श्रेष्ठता यह है कि बुद्धि से उसके रखनेवालों के प्राण की रक्षा होती है।
- Mark 10:24 मरकुस 10:24यीशु ने चारों और देखकर अपने चेलों से कहा, धनवानों को परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!
- Luke 12:19 लूका 12:19और वहां अपना सब अन्न और संपत्ति रखूंगा: और अपने प्राण से कहूंगा, कि प्राण, तेरे पास बहुत वर्षों के लिये बहुत संपत्ति रखी है; चैन कर, खा, पी, सुख से रह।
- Job 31:24–25 अय्यूब 31:24–25यदि मैं ने सोने का भरोसा किया होता, वा कुन्दन को अपना आसरा कहा होता, वा अपने बहुत से धन वा अपनी बड़ी कमाई के कारण आनन्द किया होता,
- 1 Timothy 6:17 1 तीमुथियुस 6:17इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है।
- Psalm 49:6 भजन संहिता 49:6जो अपनी सम्पत्ति पर भरोसा रखते, और अपने धन की बहुतायत पर फूलते हैं,
- Jeremiah 9:23 यिर्मयाह 9:23यहोवा यों कहता है, बुध्दिमान अपनी बुध्दि पर घमणड न करे, न वीर अपनी वीरता पर, त धनी अपने धन पर घमणड करे;