Proverbs · chapter 20 · verse 25
Proverbs 20:25 in Hindi
जो मनुष्य बिना विचारे किसी वस्तु को पवित्रा ठहराए, और जो मन्नत मानकर पूछपाछ करने लगे, वह फन्दे में फंसेगा।
Jo manushy binaa vichaare kisee vastu ko pavitraa thaharaae, aur jo mannat maanakar poochhapaachh karane lage, vah phande mem phansegaa.
Proverbs 20:25 in English
- King James Version (KJV)
- [It is] a snare to the man [who] devoureth [that which is] holy, and after vows to make enquiry.
- World English Bible (WEB)
- It is a snare to a man to make a rash dedication, then later to consider his vows.
- American Standard Version (ASV)
- It is a snare to a man rashly to say, [It is] holy, And after vows to make inquiry.
- Bible in Basic English (BBE)
- It is a danger to a man to say without thought, It is holy, and, after taking his oaths, to be questioning if it is necessary to keep them.
- Darby Translation (DBY)
- It is a snare to a man rashly to say, It is hallowed, and after vows to make inquiry.
- Webster's Bible (WBS)
- [It is] a snare to the man [who] devoureth [that which is] holy, and after vows to make inquiry.
- Young's Literal Translation (YLT)
- A snare to a man [is] he hath swallowed a holy thing, And after vows to make inquiry.
Read in context
- 23घटती बढ़ती बटखरों से यहोवा घृणा करता है, और छल का तराजू अच्छा नहीं।
- 24मनुष्य का मार्ग यहोवा की ओर से ठहराया जाता है; आदमी क्योंकर अपना चलना समझ सके?
- 25जो मनुष्य बिना विचारे किसी वस्तु को पवित्रा ठहराए, और जो मन्नत मानकर पूछपाछ करने लगे, वह फन्दे में फंसेगा।
- 26बुद्धिमान राजा दुष्टों को फटकता है, ओर उन पर दावने का पहिया चलवाता है।
- 27मनुष्य की आत्मा यहोवा का दीपक है; वह मन की सब बातों की खोज करता है।
Cross references
- Ecclesiastes 5:4–6 सभोपदेशक 5:4–6जब तू परमेश्वर के लिये मन्नत माने, तब उसके पूरा करने में विलम्ब न करना; क्यांकि वह मूर्खों से प्रसन्न नहीं होता। जो मन्नत तू ने मानी हो उसे पूरी करना। मन्नत मानकर पूरी न करने से मन्नत का न मानना ही अच्छा है। कोई वचन कहकर अपने को पाप में ने फंसाना, और न ईश्वर के दूत के साम्हने कहना कि यह भूल से हुआ; परमेश्वर क्यों तेरा बोल सुनकर अप्रसन्न हो, और तेरे हाथ के कार्यों को नष्ट करे?
- Matthew 5:33 मत्ती 5:33फिर तुम सुन चुके हो, कि पूर्वकाल के लोगों से कहा गया था कि झूठी शपथ न खाना, परन्तु प्रभु के लिये अपनी शपथ को पूरी करना।
- Leviticus 27:9–10 लैव्यव्यवस्था 27:9–10फिर जिन पशुओं में से लोग यहोवा को चढ़ावा चढ़ाते है, यदि ऐसों में से कोई संकल्प किया जाए, तो जो पशु कोई यहोवा को दे वह पवित्र ठहरेगा। वह उसे किसी प्रकार से न बदले, न तो वह बुरे की सन्ती अच्छा, और न अच्छे की सन्ती बुरा दे; और यदि वह उस पशु की सन्ती दूसरा पशु दे, तो वह और उसका बदला दोनों पवित्र ठहरेंगे।
- Numbers 30:2–16 गिनती 30:2–16कि जब कोई पुरूष यहोवा की मन्नत माने, वा अपने आप को वाचा से बान्धने के लिये शपथ खाए, तो वह अपना वचन न टाले; जो कुछ उसके मुंह से निकला हो उसके अनुसार वह करे। और जब कोई स्त्री अपनी कुंवारी अवस्था में, अपने पिता के घर से रहते हुए, यहोवा की मन्नत माने, वा अपने को वाचा से बान्धे, तो यदि उसका पिता उसकी मन्नत वा उसका वह वचन सुनकर, जिस से उसने अपने आप को बान्धा हो, उस से कुछ न कहे; तब तो उसकी सब मन्नतें स्थिर बनी रहें, और कोई बन्धन क्यों न हो, जिस से उस ने अपने आप को बान्धा हो, वह भी स्थिर रहे। परन्तु यदि उसका पिता उसकी सुनकर उसी दिन उसको बरजे, तो उसकी मन्नतें वा और प्रकार के बन्धन, जिन से उस ने अपने आप को बान्धा हो, उन में से एक भी स्थिर न रहे, और यहोवा यह जान कर, कि उस स्त्री के पिता ने उसे मना कर दिया है, उसका यह पाप क्षमा करेगा। फिर यदि वह पति के अधीन हो और मन्नत माने, वा बिना सोच विचार किए ऐसा कुछ कहे जिस से वह बन्धन में पड़े, और यदि उसका पति सुनकर उस दिन उससे कुछ न कहे; तब तो उसकी मन्नतें स्थिर रहें, और जिन बन्धनों से उस ने अपने आप को बान्धा हो वह भी स्थिर रहें। परन्तु यदि उसका पति सुनकर उसी दिन उसे मना कर दे, तो जो मन्नत उस ने मानी है, और जो बात बिना सोच विचार किए कहने से उस ने अपने आप को वाचा से बान्धा हो, वह टूट जाएगी; और यहोवा उस स्त्री का पाप क्षमा करेगा। फिर विधवा वा त्यागी हुई स्त्री की मन्नत, वा किसी प्रकार की वाचा का बन्धन क्यों न हो, जिस से उस ने अपने आप को बान्धा हो, तो वह स्थिर ही रहे। फिर यदि कोई स्त्री अपने पति के घर में रहते मन्नत माने, वा शपथ खाकर अपने आप को बान्धे, और उसका पति सुनकर कुछ न कहे, और न उसे मना करे; तब तो उसकी सब मन्नतें स्थिर बनी रहें, और हर एक बन्धन क्यों न हो, जिस से उस ने अपने आप को बान्धा हो, वह स्थिर रहे। परन्तु यदि उसका पति उसकी मन्नत आदि सुनकर उसी दिन पूरी रीति से तोड़ दे, तो उसकी मन्नतें आदि, जो कुछ उसके मुंह से अपने बन्धन के विषय निकला हो, उस में से एक बात भी स्थिर न रहे; उसके पति ने सब तोड़ दिया है; इसलिये यहोवा उस स्त्री का वह पाप क्षमा करेगा। कोई भी मन्नत वा शपथ क्यों न हो, जिस से उस स्त्री ने अपने जीव को दु:ख देने की वाचा बान्धी हो, उसको उसका पति चाहे तो दृढ़ करे, और चाहे तो तोड़े; अर्थात् यदि उसका पति दिन प्रति दिन उस से कुछ भी न कहे, तो वह उसको सब मन्नतें आदि बन्धनों को जिस से वह बन्धी हो दृढ़ कर देता है; उस ने उनको दृढ़ किया है, क्योंकि सुनने के दिन उस ने कुछ नहीं कहा। और यदि वह उन्हें सुनकर पीछे तोड़ दे, तो अपनी स्त्री के अधर्म का भार वही उठाएगा। पति पत्नी के बीच, और पिता और उसके घर मे रहती हुई कुंवारी बेटी के बीच, जिन विधियों की आज्ञा यहोवा ने मूसा को दी वे ये ही हैं।।
- Proverbs 18:7 नीतिवचन 18:7मूर्ख का विनाश उसकी बातों से होता है, और उसके वचन उसके प्राण के लिये फन्दे होते हैं।
- Leviticus 5:15 लैव्यव्यवस्था 5:15यदि कोई यहोवा की पवित्रा की हुई वस्तुओं के विषय में भूल से विश्वासघात करे और पापी ठहरे, तो वह यहोवा के पास एक निर्दोष मेढ़ा दोषबलि के लिये ले आए; उसका दाम पवित्रास्थान के शेकेल के अनुसार उतने ही शेकेल रूपये का हो जितना याजक ठहराए।
- Leviticus 22:10–15 लैव्यव्यवस्था 22:10–15पराए कुल का जन किसी पवित्रा वस्तु को न खाने पाए, चाहे वह याजक का पाहुन हो वा मजदूर हो, तौभी वह कोई पवित्रा वस्तु न खाए। यदि याजक किसी प्राणी को रूपया देकर मोल ले, तो वह प्राणी उस में से खा सकता है; और जो याजक के घर में उत्पन्न हुए हों वे भी उसके भोजन में से खाएं। और यदि याजक की बेटी पराए कुल के किसी पुरूष से ब्याही गई हो, तो वह भेंट की हुई पवित्रा वस्तुओं में से न खाए। यदि याजक की बेटी विधवा वा त्यागी हुई हो, और उसकी सन्तान न हो, और वह अपनी बाल्यावस्था की रीति के अनुसार अपने पिता के घर में रहती हो, तो वह अपने पिता के भोजन में से खाए; पर पराए कुल का कोई उस में से न खाने पाए। और यदि कोई मनुष्य किसी पवित्रा वस्तु में से कुछ भूल से खा जाए, तो वह उसका पांचवां भाग बढ़ाकर उसे याजक को भर दे। और वे इस्त्राएलियों की पवित्रा की हुई वस्तुओं को, जिन्हें वे यहोवा के लिये चढ़ाएं, अपवित्रा न करें।
- Malachi 3:8–10 मलाकी 3:8–10क्या मनुष्य परमेश्वर को धोखा दे सकता है? देखो, तुम मुझ को धोखा देते हो, और तौभी पूछते हो कि हम ने किस बात में तुझे लूटा है? दशमांश और उठाने की भेंटों में। तुम पर भारी शाप पड़ा है, क्योंकि तुम मुझे लूटते हो; वरन सारी जाति ऐसा करती है। सारे दशमांश भण्डार में ले आओ कि मेरे भवन में भोजनवस्तु रहे; और सेनाओं का यहोवा यह कहता है, कि ऐसा करके मुझे परखो कि मैं आकाश के झरोखे तुम्हारे लिये खोलकर तुम्हारे ऊपर अपरम्पार आशीष की वर्षा करता हूं कि नहीं।
- Leviticus 27:30–31 लैव्यव्यवस्था 27:30–31फिर भूमि की उपज का सारा दशमांश, चाहे वह भूमि का बीज हो चाहे वृक्ष का फल, वह यहोवा ही का है; वह यहोवा के लिये पवित्र ठहरे। यदि कोई अपने दशमांश में से कुछ छुड़ाना चाहे, तो पांचवां भाग बढ़ाकर उसको छुड़ाए।