Proverbs · chapter 23 · verse 5
Proverbs 23:5 in Hindi
क्या तू अपनी दृष्टि उस वस्तु पर लगाएगा, जो है ही नहीं? वह उकाब पक्षी की नाईं पंख लगाकर, नि:सन्देह आकाश की ओर उड़ जाता है।
Kyaa too apanee drushti us vastu par lagaaegaa, jo hai hee naheem? Vah ukaab pakshee kee naaeem pankh lagaakar, ni:sandeh aakaash kee or ud jaataa hai.
Proverbs 23:5 in English
- King James Version (KJV)
- Wilt thou set thine eyes upon that which is not? for [riches] certainly make themselves wings; they fly away as an eagle toward heaven.
- World English Bible (WEB)
- Why do you set your eyes on that which is not? For it certainly sprouts wings like an eagle and flies in the sky.
- American Standard Version (ASV)
- Wilt thou set thine eyes upon that which is not? For [riches] certainly make themselves wings, Like an eagle that flieth toward heaven.
- Bible in Basic English (BBE)
- Are your eyes lifted up to it? it is gone: for wealth takes to itself wings, like an eagle in flight up to heaven.
- Darby Translation (DBY)
- wilt thou set thine eyes upon it, it is gone; for indeed it maketh itself wings and it flieth away as an eagle towards the heavens.
- Webster's Bible (WBS)
- Wilt thou set thy eyes upon that which is not? for [riches] certainly make to themselves wings; they fly away as an eagle towards heaven.
- Young's Literal Translation (YLT)
- For wealth maketh to itself wings, As an eagle it flieth to the heavens.
Read in context
- 3उसकी स्वादिष्ट भोजनवस्तुओं की लालसा न करना, क्योंकि वह धोखे का भोजन है।
- 4धनी होने के लिये परिश्रम न करना; अपनी समझ का भरोसा छोड़ना।
- 5क्या तू अपनी दृष्टि उस वस्तु पर लगाएगा, जो है ही नहीं? वह उकाब पक्षी की नाईं पंख लगाकर, नि:सन्देह आकाश की ओर उड़ जाता है।
- 6जो डाह से देखता है, उसकी रोटी न खाना, और न उसकी स्वादिष्ट भोजनवस्तुओं की लालसा करना;
- 7क्योंकि जैसा वह अपने मन में विचार करता है, वैसा वह आप है। वह तुझ से कहता तो है, खा पी, परन्तु उसका मन तुझ से लगा नहीं।
Cross references
- Proverbs 27:24 नीतिवचन 27:24क्योंकि सम्पत्ति सदा नहीं ठहरती; और क्या राजमुकुट पीढ़ी- पीढ़ी चला जाता है?
- 1 John 2:16 1 यूहन्ना 2:16क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात् शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है।
- Matthew 6:19 मत्ती 6:19अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो; जहां कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर सेंध लगाते और चुराते हैं।
- 1 Timothy 6:17 1 तीमुथियुस 6:17इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है।
- James 5:1–2 याकूब 5:1–2हे धनवानों सुन तो लो; तुम अपने आने वाले क्लेशों पर चिल्ला-चिल्लाकर रोओ। तुम्हारा धन बिगड़ गया और तुम्हारे वस्त्रों को कीड़े खा गए।
- Psalm 119:36–37 भजन संहिता 119:36–37मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे। मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला।
- Ecclesiastes 12:8 सभोपदेशक 12:8उपदेशक कहता है, सब व्यर्थ ही व्यर्थ; सब कुछ व्यर्थ है।
- Genesis 42:36 उत्पत्ति 42:36और वह भोजनवस्तु अकाल के उन सात वर्षों के लिये, जो मि देश में आएंगे, देश के भोजन के निमित्त रखी रहे, जिस से देश उस अकाल से स्त्यानाश न हो जाए।
- Jeremiah 22:17 यिर्मयाह 22:17परन्तु तू केवल अपना ही लाभ देखता है, और निदषों की हत्या करने और अन्धेर और उपद्रव करने में अपना मन और दृष्टि लगाता है।
- Psalm 39:6 भजन संहिता 39:6सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है; सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं; वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा!
- Job 1:14–17 अय्यूब 1:14–17तब एक दूत अरयूब के पास आकर कहने लगा, हम तो बैलों से हल जोत रहे थे, और गदहियां उनके पास चर रही थी, कि शबा के लोग धावा करके उनको ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ। वह अभी यह कह ही रहा था कि दूसरा भी आकर कहने लगा, कि परमेश्वर की आग आकाश से गिरी और उस से भेड़- बकरियां और सेवक जलकर भस्म हो गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ। वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, कि कसदी लोग तीन गोल बान्धकर ऊंटों पर धावा करके उन्हें ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
- 1 Corinthians 7:29–31 1 कुरिन्थियों 7:29–31हे भाइयो, मैं यह कहता हूं, कि समय कम किया गया है, इसलिये चाहिए कि जिन के पत्नी हों, वे ऐसे हों मानो उन के पत्नी नहीं। और रोनेवाले ऐसे हों, मानो रोते नहीं; और आनन्द करनेवाले ऐसे हों, मानो आनन्द नहीं करते; और मोल लेनेवाले एसे हों, कि मानो उन के पास कुछ है नहीं। और इस संसार के बरतनेवाले ऐसे हों, कि संसार ही के न हो लें; क्योंकि इस संसार की रीति और व्यवहार बदलते जाते हैं।