Psalms · chapter 104 · verse 22
Psalm 104:22 in Hindi
सूर्य उदय होते ही वे चले जाते हैं और अपनी मांदों में जा बैठते हैं।
Soory uday hote hee ve chale jaate haim aur apanee maandom mem jaa baithate hain.
Psalm 104:22 in English
- King James Version (KJV)
- The sun ariseth, they gather themselves together, and lay them down in their dens.
- World English Bible (WEB)
- The sun rises, and they steal away, and lie down in their dens.
- American Standard Version (ASV)
- The sun ariseth, they get them away, And lay them down in their dens.
- Bible in Basic English (BBE)
- The sun comes up, and they come together, and go back to their secret places to take their rest.
- Darby Translation (DBY)
- The sun ariseth, they retreat, and lay them down in their dens.
- Webster's Bible (WBS)
- The sun ariseth, they collect, and lay themselves down in their dens.
- Young's Literal Translation (YLT)
- The sun riseth, they are gathered, And in their dens they crouch.
Read in context
- 20तू अन्धकार करता है, तब रात हो जाती है; जिस में वन के सब जीव जन्तु घूमते फिरते हैं।
- 21जवान सिंह अहेर के लिये गरजते हैं, और ईश्वर से अपना आहार मांगते हैं।
- 22सूर्य उदय होते ही वे चले जाते हैं और अपनी मांदों में जा बैठते हैं।
- 23तब मनुष्य अपने काम के लिये और सन्ध्या तक परिश्रम करने के लिये निकलता है।
- 24हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है; पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है।
Cross references
- Job 37:8 अय्यूब 37:8तब वनपशु गुफाओं में घुस जाते, और अपनी अपनी मांदों में रहते हैं।
- John 3:20 यूहन्ना 3:20क्योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए।
- Nahum 3:17 नहूम 3:17तेरे मुकुटधारी लोग टिडि्डयों के समान, और सेनापति टिडि्डयों के दलों सरीखे ठहरेंगे जो जाड़े के दिन में बाड़ों पर टिकते हैं, परन्तु जब सूर्य दिखाई देता है तब भाग जाते हैं; और कोई नहीं जानता कि वे कहां गए।।
- Job 24:13–17 अय्यूब 24:13–17फिर कुछ लोग उजियाले से बैर रखते, वे उसके माग को नहीं पहचानते, और न उसके माग में बने रहते हैं। खूनी, पह फटते ही उठकर दीन दरिद्र मनुष्य को घात करता, और रात को चोर बन जाता है। व्यभिचारी यह सोचकर कि कोई मुझ को देखने न पाए, दिन डूबने की राह देखता रहता है, और वह अपना मुंह छिपाए भी रखता है। वे अन्धियारे के समय घरों में सेंध मारते और दिन को छिपे रहते हैं; वे उजियाले को जानते भी नहीं। इसलिये उन सभों को भोर का प्रकाश घोर अन्धकार सा जान पड़ता है, क्योंकि घोर अन्धकार का भय वे जानते हैं।