Psalms · chapter 104 · verse 25
Psalm 104:25 in Hindi
इसी प्रकार समुद्र बड़ा और बहुत ही चौड़ा है, और उस में अनगिनित जलचरी जीव- जन्तु, क्या छोटे, क्या बड़े भरे पड़े हैं।
Isee prakaar samudr badaa aur bahut hee chaudaa hai, aur us mem anaginit jalacharee jeeva- jantu, kyaa chhote, kyaa bade bhare pade hain.
Psalm 104:25 in English
- King James Version (KJV)
- [So is] this great and wide sea, wherein [are] things creeping innumerable, both small and great beasts.
- World English Bible (WEB)
- There is the sea, great and wide, in which are innumerable living things, both small and large animals.
- American Standard Version (ASV)
- Yonder is the sea, great and wide, Wherein are things creeping innumerable, Both small and great beasts.
- Bible in Basic English (BBE)
- There is the great, wide sea, where there are living things, great and small, more than may be numbered.
- Darby Translation (DBY)
- Yonder is the great and wide sea: therein are moving things innumerable, living creatures small and great.
- Webster's Bible (WBS)
- [So is] this great and wide sea, in which [are] creeping animals innumerable, both small and great beasts.
- Young's Literal Translation (YLT)
- This, the sea, great and broad of sides, There [are] moving things — innumerable, Living creatures — small with great.
Read in context
- 23तब मनुष्य अपने काम के लिये और सन्ध्या तक परिश्रम करने के लिये निकलता है।
- 24हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है; पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है।
- 25इसी प्रकार समुद्र बड़ा और बहुत ही चौड़ा है, और उस में अनगिनित जलचरी जीव- जन्तु, क्या छोटे, क्या बड़े भरे पड़े हैं।
- 26उस में जहाज भी आते जाते हैं, और लिब्यातान भी जिसे तू ने वहां खेलने के लिये बनाया है।।
- 27इन सब को तेरा ही आसरा है, कि तू उनका आहार समय पर दिया करे।
Cross references
- Psalm 69:34 भजन संहिता 69:34स्वर्ग और पृथ्वी उसकी स्तुति करें, और समुद्र अपने सब जीव जन्तुओं समेत उसकी स्तुति करे।
- Psalm 95:4–5 भजन संहिता 95:4–5पृथ्वी के गहिरे स्थान उसी के हाथ में हैं; और पहाड़ों की चोटियां भी उसी की हैं। समुद्र उसका है, और उसी ने उसको बनाया, और स्थल भी उसी के हाथ का रख है।।
- Genesis 1:28 उत्पत्ति 1:28और परमेश्वर ने उनको आशीष दी: और उन से कहा, फूलो- फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगनेवाले सब जन्तुओ पर अधिकार रखो।
- Genesis 1:20–22 उत्पत्ति 1:20–22फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश कें अन्तर में उड़ें। ठसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल- जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़नेवाले पक्षियों की भी सृष्टि की: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। और परमेश्वर ने यह कहके उनको आशीष दी, कि फूलो- फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ें।
- Acts 28:5 प्रेरितों के काम 28:5तब उस ने सांप को आग में झटक दिया, और उसे कुछ हानि न पहुंची।
- Deuteronomy 33:14–16 व्यवस्थाविवरण 33:14–16और सूर्य के पकाए हुए अनमोल फल, और जो अनमोल पदार्थ चंद्रमा के उगाए उगते हैं, और प्राचीन पहाड़ों के उत्तम पदार्थ, और सनातन पहाड़ियों के अनमोल पदार्थ, और पृथ्वी और जो अनमोल पदार्थ उस में भरे हैं, और जो झाड़ी में रहता था उसकी प्रसन्नता। इन सभों के विषय में यूसुफ के सिर पर, अर्थात् उसी के सिर के चांद पर जो अपने भाइयों से न्यारा हुआ था आशीष ही आशीष फले।।
- Genesis 3:1 उत्पत्ति 3:1यहोवा परमेश्वर ने जितने बनैले पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उस ने स्त्री से कहा, क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, कि तुम इस बाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना?
- Deuteronomy 33:19 व्यवस्थाविवरण 33:19वे देश देश के लोगों को पहाड़ पर बुलाएंगे; वे वहां धर्मयज्ञ करेंगे; क्योंकि वे समुद्र का धन, और बालू के छिपे हुए अनमोल पदार्थ से लाभ उठाएंगे।।