Psalms · chapter 35 · verse 20
Psalm 35:20 in Hindi
क्योंकि वे मेल की बातें नहीं बोलते, परन्तु देश में जो चुपचाप रहते हैं, उनके विरूद्व छल की कल्पनाएं करते हैं।
Kyonki ve mel kee baatem naheem bolate, parantu desh mem jo chupachaap rahate haim, unake viroodv chhal kee kalpanaaem karate hain.
Psalm 35:20 in English
- King James Version (KJV)
- For they speak not peace: but they devise deceitful matters against [them that are] quiet in the land.
- World English Bible (WEB)
- For they don’t speak peace, but they devise deceitful words against those who are quiet in the land.
- American Standard Version (ASV)
- For they speak not peace; But they devise deceitful words against them that are quiet in the land.
- Bible in Basic English (BBE)
- For they do not say words of peace; in their deceit they are designing evil things against the quiet ones in the land.
- Darby Translation (DBY)
- For they speak not peace; and they devise deceitful words against the quiet in the land.
- Webster's Bible (WBS)
- For they speak not peace: but they devise deceitful matters against [them that are] quiet in the land.
- Young's Literal Translation (YLT)
- For they speak not peace, And against the quiet of the land, Deceitful words they devise,
Read in context
- 18मैं बड़ी सभा में तेरा धन्यवाद करूंगा; बहुतेरे लोगों के बीच में तेरी स्तुति करूंगा।।
- 19मेरे झूठ बोलनेवाले शत्रु मेरे विरूद्व आनन्द न करने पाएं, जो अकारण मेरे बैरी हैं, वे आपस में नैन से सैन न करने पांए।
- 20क्योंकि वे मेल की बातें नहीं बोलते, परन्तु देश में जो चुपचाप रहते हैं, उनके विरूद्व छल की कल्पनाएं करते हैं।
- 21और उन्हों ने मेरे विरूद्व मुंह पसारके कहा; आहा, आहा, हम ने अपनी आंखों से देखा है!
- 22हे यहोवा, तू ने तो देखा है; चुप न रह! हे प्रभु, मुझ से दूर न रह!
Cross references
- Matthew 26:4 मत्ती 26:4और आपस में विचार करने लगे कि यीशु को छत से पकड़कर मार डालें।
- 1 Peter 2:22–23 1 पतरस 2:22–23न तो उस ने पाप किया, और न उसके मुंह से छल की कोई बात निकली। वह गाली सुनकर गाली नहीं देता था, और दुख उठाकर किसी को भी धमकी नहीं देता था, पर अपने आप को सच्चे न्यायी के हाथ में सौपता था।
- Jeremiah 11:19 यिर्मयाह 11:19मैं तो वध होनेवाले भेड़ के बच्चे के समान अनजान था। मैं न जानता था कि वे लोग मेरी हानि की युक्तियां यह कहकर करते हैं, आओ, हम फल समेत इस वृक्ष को उखाड़ दें, और जीवितों के बीच में से काट डालें, तब इसका नाम तक फिर स्मरण न रहे।
- Acts 25:3 प्रेरितों के काम 25:3और उसे से बिनती करके उसके विरोध में यह बर चाहा, कि वह उसे यरूशलेम में बुलवाए, क्योंकि वे उसे रास्ते ही में मार डालने की घात लगाए हुए थे।
- Psalm 52:2 भजन संहिता 52:2तेरी जीभ केवल दुष्टता गढ़ती है; सारे धरे हुए अस्तुरे की नाईं वह छल का काम करती है।
- Psalm 140:2–5 भजन संहिता 140:2–5क्योंकि उन्हों ने मन में बुरी कल्पनाएं की हैं; वे लगातार लड़ाइयां मचाते हैं। उनका बोलना सांप का काटना सा है, उनके मुंह में नाग का सा विष रहता है।। हे यहोवा, मुझे दुष्ट के हाथों से बचा ले; उपद्रवी पुरूष से मेरी रक्षा कर, क्योंकि उन्हों ने मेरे पैरों के उखाड़ने की युक्ति की है। घमण्डियों ने मेरे लिये फन्दा और पासे लगाए, और पथ के किनारे जाल बिछाया है; उन्हों ने मेरे लिये फन्दे लगा रखे हैं।।
- Matthew 12:24 मत्ती 12:24परन्तु फरीसियों ने यह सुनकर कहा, यह तो दुष्टात्माओं के सरदार शैतान की सहायता के बिना दुष्टात्माओं को नहीं निकालता।
- Matthew 12:19 मत्ती 12:19वह न झगड़ा करेगा, और न धूम मचाएगा; और न बाजारों में कोई उसका शब्द सुनेगा।
- Psalm 38:12 भजन संहिता 38:12मेरे प्राण के ग्राहक मेरे लिये जाल बिछाते हैं, और मेरी हाति के यत्न करनेवाले दुष्टता की बातें बोलते, और दिन भर छल की युक्ति सोचते हैं।
- Psalm 31:13 भजन संहिता 31:13मैं ने बहुतों के मुंह से अपना अपवाद सुना, चारों ओर भय ही भय है! जब उन्हों ने मेरे विरूद्ध आपस में सम्मति की तब मेरे प्राण लेने की युक्ति की।।
- Psalm 64:4–6 भजन संहिता 64:4–6ताकि छिपकर खरे मनुष्य को मारें; वे निडर होकर उसको अचानक मारते भी हैं। वे बुरे काम करने को हियाव बान्धते हैं; वे फन्दे लगने के विषय बातचीत करते हैं; और कहते हैं, कि हम को कौन देखेगा? वे कुटिलता की युक्ति निकालते हैं; और कहते हैं, कि हम ने पक्की युक्ति खोजकर निकाली है। क्योंकि मनुष्य का मन और हृदय अथाह हैं!
- Psalm 36:3–4 भजन संहिता 36:3–4उसकी बातें अनर्थ और छल की हैं; उस ने बुद्धि और भलाई के काम करने से हाथ उठाया है। वह अपने बिछौने पर पड़े पड़े अनर्थ की कल्पना करता है; वह अपने कुमार्ग पर दृढ़ता से बना रहता है; बुराई से वह हाथ नहीं उठाता।।