Psalms · chapter 72 · verse 3
Psalm 72:3 in Hindi
पहाडों और पहाड़ियों से प्रजा के लिये, धर्म के द्वारा शान्ति मिला करेगी
Pahaadom aur pahaadiyom se prajaa ke liye, dharm ke dvaaraa shaanti milaa karegee
Psalm 72:3 in English
- King James Version (KJV)
- The mountains shall bring peace to the people, and the little hills, by righteousness.
- World English Bible (WEB)
- The mountains shall bring prosperity to the people. The hills bring the fruit of righteousness.
- American Standard Version (ASV)
- The mountains shall bring peace to the people, And the hills, in righteousness.
- Bible in Basic English (BBE)
- May the mountains give peace to the people, and the hills righteousness.
- Darby Translation (DBY)
- The mountains shall bring peace to the people, and the hills, by righteousness.
- Webster's Bible (WBS)
- The mountains shall bring peace to the people, and the little hills, by righteousness.
- Young's Literal Translation (YLT)
- The mountains bear peace to the people, And the heights by righteousness.
Read in context
- 1हे परमेश्वर, राजा को अपना नियम बता, राजपुत्रा को अपना धर्म सिखला!
- 2वह तेरी प्रजा का न्याय धर्म से, और तेरे दी लोगों का न्याय ठीक ठीक चुकाएगा।
- 3पहाडों और पहाड़ियों से प्रजा के लिये, धर्म के द्वारा शान्ति मिला करेगी
- 4वह प्रजा के दीन लोगों का न्याय करेगा, और दरिद्र लोगों को बचाएगा; और अन्धेर करनेवालों को चूर करेगा।।
- 5जब तक सूर्य और चन्द्रमा बने रहेंगे तब तक लोग पीढ़ी- पीढ़ी तेरा भय मानते रहेंगे।
Cross references
- Isaiah 52:7 यशायाह 52:7पहाड़ों पर उसके पांव क्या ही सुहावने हैं जो शुभ समाचार लाता है, जो शान्ति की बातें सुनाता है और कल्याण का शुभ समाचार और उद्धार का सन्देश देता है, जो सिरयोन से कहता हे, तेरा परमेश्वर राज्य करता है।
- 2 Corinthians 5:19–21 2 कुरिन्थियों 5:19–21अर्थात् परमेश्वर ने मसीह में होकर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उस ने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।। सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जाएं।।
- Daniel 9:24 दानिय्येल 9:24तेरे लोगों और तेरे पवित्रा नगर के लिये सत्तर सप्ताह ठहराए गए हैं कि उनके अन्त तक अपराध का होना बन्द हो, और पापों को अन्त और अधर्म का प्रायश्चित्त किया जाए, और युगयुग की धार्मिकता प्रगट होए; और दर्शन की बात पर और भविष्यवाणी पर छाप दी जाए, और परमपवित्रा का अभिषेक किया जाए।
- Psalm 72:16 भजन संहिता 72:16देश में पहाड़ों की चोटियों पर बहुत से अन्न होगा; जिसकी बालें लबानोन के देवदारूओं की नाईं झूमेंगी; और नगर के लोग घास की नाई लहलहाएंगे।
- Joel 3:18 योएल 3:18और उस समय पहाड़ों से नया दाखमधु टपकने लगेगा, और टीलों से दूध बहने लगेगा, और यहूदा देश के सब नाले जल से भर जाएंगे; और यहोवा के भवन में से एक सोता फूट निकलेगा, जिस से शित्तीम का नाम नाला सींचा जाएगा।।
- Psalm 65:12 भजन संहिता 65:12वे जंगल की चराइयों में पाए जाते हैं; और पहाड़ियां हर्ष का फेंटा बान्धे हुए है।।
- Psalm 85:10–11 भजन संहिता 85:10–11करूणा और सच्चाई आपस में मिल गई हैं; धर्म और मेल ने आपस में चुम्बन किया हैं। पृथ्वी में से सच्चाई उगती और स्वर्ग से धर्म झुकता है।
- Psalm 96:11–13 भजन संहिता 96:11–13आकाश आनन्द करे, और पृथ्वी मगन हो; समुद्र और उस में की सब वस्तुएं गरज उठें; मैदान और जो कुछ उस में है, वह प्रफुल्लित हो; उसी समय वन के सारे वृक्ष जयजयकार करेंगे। यह यहोवा के साम्हने हो, क्योंकि वह आनेवाला है। वह पृथ्वी का न्याय करने को आने वाला है, वह धर्म से जगत का, और सच्चाई से देश देश के लोगों का न्याय करेगा।।
- Psalm 98:8–9 भजन संहिता 98:8–9नदियां तालियां बजाएं; पहाड़ मिलकर जयजयकार करें। यह यहोवा के साम्हने हो, क्योंकि वह पृथ्वी का न्याय करने को आनेवाला है। वह धर्म से जगत का, और सीधाई से देश देश के लोगों का न्याय करेगा।।
- Ezekiel 34:13–14 यहेजकेल 34:13–14और मैं उन्हें देश देश के लोगों में से निकालूंगा, और देश देश से इकट्ठा करूंगा, और उन्हीं के निज भूमि में ले आऊंगा; और इस्राएल के पहाड़ों पर ओर नालों में और उस देश के सब बसे हुए स्थानों में चराऊंगा। मैं उन्हें अच्छी चराई में चराऊंगा, और इस्राएल के ऊंचे ऊंचे पहाड़ों पर उन को चराई मिलेगी; वहां वे अच्छी हरियाली में बैठा करेंगी, और इस्राएल के पहाड़ों पर उत्तम से उत्तम चराई चरेंगी।
- Isaiah 32:16–17 यशायाह 32:16–17तब उस जंगल में न्याय बसेगा, और उस फलदायक बारी में धर्म रहेगा। और धर्म का फल शांति और उसका परिणाम सदा का चैन और निश्चिन्त रहना होगा।