Zechariah · chapter 7 · verse 9
Zechariah 7:9 in Hindi
खराई से न्याय चुकाना, और एक दूसरे के साथ कृपा और दया से काम करना,
Kharaaee se nyaay chukaanaa, aur ek doosare ke saath krupaa aur dayaa se kaam karanaa,
Zechariah 7:9 in English
- King James Version (KJV)
- Thus speaketh the LORD of hosts, saying, Execute true judgment, and shew mercy and compassions every man to his brother:
- World English Bible (WEB)
- “Thus has the LORD of Armies spoken, saying, ‘Execute true judgment, and show kindness and compassion every man to his brother.
- American Standard Version (ASV)
- Thus hath Jehovah of hosts spoken, saying, Execute true judgment, and show kindness and compassion every man to his brother;
- Bible in Basic English (BBE)
- This is what the Lord of armies has said: Let your judging be upright and done in good faith, let every man have mercy and pity for his brother:
- Darby Translation (DBY)
- Thus speaketh Jehovah of hosts, saying, Execute true judgment, and shew loving-kindness and mercies one to another,
- Webster's Bible (WBS)
- Thus speaketh the LORD of hosts, saying, Execute true judgment, and show mercy and compassions every man to his brother:
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'Thus spake Jehovah of Hosts, saying: True judgment judge ye, And kindness and mercy do one with another.
Read in context
- 7क्या यह वही वचन नहीं है, जो यहोवा अगले भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा उस समय पुकारकर कहता रहा जब यरूशलेम अपने चारों ओर के नगरों समेत चैन से बसा हुआ था, और दक्खिन देश और नीचे का देश भी बसा हुआ था?
- 8फिर यहोवा का यह वचन जकर्याह के पास पहुंचा, सेनाओं के यहोवा ने यों कहा है,
- 9खराई से न्याय चुकाना, और एक दूसरे के साथ कृपा और दया से काम करना,
- 10न तो विधवा पर अन्धेर करता, न अनाथों पर, न परदेशी पर, और न दीन जन पर; और न अपने अपने मन में एक दूसरे की हानि की कल्पना करना।
- 11परन्तु उन्हों ने चित्त लगाना न चाहा, और हठ किया, और अपने कानों को मूंद लिया ताकि सुन न सकें।
Cross references
- Micah 6:8 मीका 6:8हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है; और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चले?
- Psalm 82:2–4 भजन संहिता 82:2–4तुम लोग कब तक टेढ़ा न्याय करते और दुष्टों का पक्ष लेते रहोगे? कंगाल और अनाथों का न्याय चुकाओ, दीन दरिद्र का विचार धर्म से करो। कंगाल और निर्धन को बचा लो; दुष्टों के हाथ से उन्हें छुड़ाओ।।
- Proverbs 21:3 नीतिवचन 21:3धर्म और न्याय करना, यहोवा को बलिदान से अधिक अच्छा लगता है।
- Jeremiah 7:5 यिर्मयाह 7:5यदि तुम सचमुच अपनी अपनी चाल और काम सुधारो, और सचमुच मनुष्य- मनुष्य के बीच न्याय करो,
- Luke 11:42 लूका 11:42पर हे फरीसियों, तुम पर हाय! तुम पोदीने और सुदाब का, और सब भांति के साग- पात का दसवां अंश देते हो, परन्तु न्याय को और परमेश्वर के प्रेम को टाल देते हो: चाहिए तो था कि इन्हें भी करते रहते और उन्हें भी न छोड़ते।
- Jeremiah 21:12 यिर्मयाह 21:12हे दाऊद के घराने! यहोवा यों कहता है, भोर को न्याय चुकाओ, और लुटे हुए को अंधेर करनेवाले के हाथ से छुड़ाओ, नहीं तो तुम्हारे बुरे कामों के कारण मेरे क्रोध की आग भड़केगी, और ऐसी जलती रहेगी कि कोई उसे बुझा न सकेगा।
- Deuteronomy 10:18–19 व्यवस्थाविवरण 10:18–19वह अनाथों और विधवा का न्याय चुकाता, और परदेशियों से ऐसा प्रेम करता है कि उन्हें भोजन और वस्त्रा देता है। इसलिये तुम भी परदेशियों से प्रेम भाव रखना; क्योंकि तुम भी मि देश में परेदशी थे।
- James 2:13–17 याकूब 2:13–17क्योंकि जिस ने दया नहीं की, उसका न्याय बिना दया के होगा: दया न्याय पर जयवन्त होती है।। हे मेरे भाइयों, यदि कोई कहे कि मुझे विश्वास है पर वह कर्म न करता हो, तो उस से क्या लाभ? क्या ऐसा विश्वास कभी उसका उद्धार कर सकता है? यदि कोई भाई या बहिन नगें उघाड़े हों, और उन्हें प्रति दिन भोजन की घटी हो। और तुम में से कोई उन से कहे, कुशल से जाओ, तुम गरम रहो और तृप्त रहो; पर जो वस्तुएं देह के लिये आवश्यक हैं वह उन्हें न दे, तो क्या लाभ? वैसे ही विश्वास भी, यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्वभाव में मरा हुआ है।
- Leviticus 19:35–37 लैव्यव्यवस्था 19:35–37तुम न्याय में, और परिमाण में, और तौल में, और नाप में कुटिलता न करना। सच्चा तराजू, धर्म के बटखरे, सच्चा एपा, और धर्म का हीन तुम्हारे पास रहें; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुम को मि देश से निकाल ले आया। इसलिये तुम मेरी सब विधियों और सब नियमों को मानते हुए निरन्तर पालन करो; मैं यहोवा हूं।।
- Zechariah 7:7 जकर्याह 7:7क्या यह वही वचन नहीं है, जो यहोवा अगले भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा उस समय पुकारकर कहता रहा जब यरूशलेम अपने चारों ओर के नगरों समेत चैन से बसा हुआ था, और दक्खिन देश और नीचे का देश भी बसा हुआ था?
- Isaiah 58:6–10 यशायाह 58:6–10जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूं, वह क्या यह नहीं, कि, अन्याय से बनाए हुए दासों, और अन्धेर सहनेवालों का जुआ तोड़कर उनको छुड़ा लेना, और, सब जुओं को टूकड़े टूकड़े कर देना? क्या वह यह नहीं है कि अपनी रोटी भूखों को बांट देना, अनाथ और मारे मारे फिरते हुओं को अपने घर ले आना, किसी को नंगा देखकर वस्त्रा पहिनाना, और अपने जातिभाइयों से अपने को न छिपाना? तब तेरा प्रकाश पौ फटने की नाईं चमकेगा, और तू शीघ्र चंगा हो जाएगा; तेरा धर्म तेरे आगे आगे चलेगा, यहोवा का तेज तेरे पीछे रक्षा करते चलेगा। तब तू पुकारेगा और यहोवा उत्तर देगा; तू दोहाई देगा और वह कहेगा, मैं यहां हूं। यदि तू अन्धेर करना और उंगली मटकाना, और, दुष्ट बातें बोलना छोड़ दे, उदारता से भूखे की सहायता करे और दीन दु:खियों को सन्तुष्ट करे, तब अन्धियारे में तेरा प्रकाश चमकेगा, और तेरा घोर अन्धकार दोपहर का सा उजियाला हो जाएगा।
- John 7:51 यूहन्ना 7:51क्या हमारी व्यवस्था किसी व्यक्ति को जब तक पहिले उस की सुनकर जान न ले, कि वह क्या करता है; दोषी ठहराती है?