2 Corinthians · chapter 2 · verse 4
2 Corinthians 2:4 in Hindi
बड़े क्लेश, और मन के कष्ट से, मैं ने बहुत से आंसु बहा बहाकर तुम्हें लिखा, इसलिये नहीं, कि तुम उदास हो, परन्तु इसलिये कि तुम उस बड़े प्रेम को जान लो, जो मुझे तुम से है।।
Bade klesh, aur man ke kasht se, maim ne bahut se aansu bahaa bahaakar tumhem likhaa, isaliye naheem, ki tum udaas ho, parantu isaliye ki tum us bade prem ko jaan lo, jo mujhe tum se hai..
2 Corinthians 2:4 in English
- King James Version (KJV)
- For out of much affliction and anguish of heart I wrote unto you with many tears; not that ye should be grieved, but that ye might know the love which I have more abundantly unto you.
- World English Bible (WEB)
- For out of much affliction and anguish of heart I wrote to you with many tears, not that you should be made to grieve, but that you might know the love that I have so abundantly for you.
- American Standard Version (ASV)
- For out of much affliction and anguish of heart I wrote unto you with many tears; not that ye should be made sorry, but that ye might know the love which I have more abundantly unto you.
- Bible in Basic English (BBE)
- For out of much trouble and pain of heart and much weeping I sent my letter to you; not to give you sorrow, but so that you might see how great is the love which I have to you.
- Darby Translation (DBY)
- For out of much tribulation and distress of heart I wrote to you, with many tears; not that ye may be grieved, but that ye may know the love which I have very abundantly towards you.
- Webster's Bible (WBS)
- For out of much affliction and anguish of heart I wrote to you with many tears; not that ye should be grieved, but that ye might know the love which I have more abundantly to you.
- Young's Literal Translation (YLT)
- for out of much tribulation and pressure of heart I wrote to you through many tears, not that ye might be made sorry, but that ye might know the love that I have more abundantly toward you.
Read in context
- 2क्योंकि यदि मैं तुम्हें उदास करूं, तो मुझे आनन्द देनेवाला कौन होगा, केवल वही जिस को मैं ने उदास किया?
- 3और मैं ने यही बात तुम्हें इसलिये लिखी, कि कहीं ऐसा न हो, कि मेरे आने पर जिन से आनन्द मिलना चाहिए, मैं उन से उदास होऊं; क्योंकि मुझे तुम सब पर इस बात का भरोसा है, कि जो मेरा आनन्द है, वही तुम सब का भी है।
- 4बड़े क्लेश, और मन के कष्ट से, मैं ने बहुत से आंसु बहा बहाकर तुम्हें लिखा, इसलिये नहीं, कि तुम उदास हो, परन्तु इसलिये कि तुम उस बड़े प्रेम को जान लो, जो मुझे तुम से है।।
- 5और यदि किसी ने उदास किया है, तो मुझे ही नहीं बरन (कि उसके साथ बहुत कड़ाई न करूं) कुछ कुछ तुम सब को भी उदास किया है।
- 6ऐसे जन के लिये यह दण्ड जो भाइयों में से बहुतों ने दिया, बहुत है।
Cross references
- 2 Corinthians 7:12 2 कुरिन्थियों 7:12फिर मैं ने जो तुम्हारे पास लिखा था, वह न तो उसके कारण लिखा, जिस ने अन्याय किया, और न उसके कारण जिस पर अन्याय किया गया, परन्तु इसलिये कि तुम्हारी उत्तेजना जो हमारे लिये है, वह परमेश्वर के साम्हने तुम पर प्रगट हो जाए।
- Proverbs 27:5–6 नीतिवचन 27:5–6खुली हुई डांट गुप्त प्रेम से उत्तम है। जो घाव मित्रा के हाथ से लगें वह विश्वासयोग्य है परन्तु बैरी अधिक चुम्बन करता है।
- Leviticus 19:17–18 लैव्यव्यवस्था 19:17–18अपने मन में एक दूसरे के प्रति बैर न रखना; अपने पड़ोसी को अवश्य डांटना नहीं, तो उसके पाप का भार तुझ को उठाना पड़ेगा। पलटा न लेना, और न अपने जाति भाइयों से बैर रखना, परन्तु एक दूसरे से अपने समान प्रेम रखना; मैं यहोवा हूं।
- Luke 19:41–44 लूका 19:41–44जब वह निकट आया तो नगर को देखकर उस पर रोया। और कहा, क्या ही भला होता, कि तू; हां, तू ही, इसी दिन में कुशल की बातें जानता, परन्तु अब वे तेरी आंखों से छिप गई हैं। क्योंकि वे दिन तुझ पर आएंगे कि तेरे बैरी मोर्चा बान्धकर तुझे घेर लेंगे, और चारों ओर से तुझे दबाएंगे। और तुझे और तेरे बालकों को जो तुझ में हैं, मिट्टी में मिलाएंगे, और तुझ में पत्थर पर पत्थर भी न छोड़ेंगे; क्योंकि तू ने वह अवसर जब तुझ पर कृपा दृष्टि की गई न पहिचाना।।
- Philippians 3:18 फिलिप्पियों 3:18क्योंकि बहुतेरे ऐसी चाल चलते हैं, जिन की चर्चा मैं ने तुम से बार बार किया है और अब भी रो रोकर कहता हूं, कि वे अपनी चालचलन से मसीह के क्रूस के बैरी हैं।
- 2 Corinthians 11:2 2 कुरिन्थियों 11:2क्योंकि मैं तुम्हारे विषय मे ईश्वरीय धुन लगाए रहता हूं, इसलिये कि मैं ने एक ही पुरूष से तुम्हारी बात लगाई है, कि तुम्हें पवित्रा कुंवारी की नाई मसीह को सौंप दूं।
- 2 Corinthians 7:8–9 2 कुरिन्थियों 7:8–9क्योकि यद्यपि मैं ने अपनी पत्री से तुम्हें शोकित किया, परन्तु उस से पछताता नहीं जैसा कि पहिले पछताता था क्योंकि मैं देखता हूं, कि उस पत्री से तुम्हें शोक तो हुआ परन्तु वह थोड़ी देर के लिये था। अब मैं आनन्दित हूं पर इसलिये नहीं कि तुम को शोक पहुंचा बरन इसलिये कि तुम ने उस शोक के कारण मन फिराया, क्योंकि तुम्हारा शोक परमेश्वर की इच्छा के अनुसार था, कि हमारी ओर से तुम्हें किसी बात में हानि न पहुंचे।
- Psalm 119:136 भजन संहिता 119:136मेरी आंखों से जल की धारा बहती रहती है, क्योंकि लोग तेरी व्यवस्था को नहीं मानते।।
- Jeremiah 13:15–17 यिर्मयाह 13:15–17देखो, और कान लगाओ, गर्व मत करो, क्योंकि यहोवा ने यों कहा है। अपने परमेश्वर यहोवा की बड़ाई करो, इस से पहिले कि वह अन्धकार लाए और तुम्हारे पांव अन्धेरे पहाड़ों पर ठोकर खाएं, और जब तुम प्रकाश का आसरा देखो, तब वह उसको मृत्यु की छाया से बदल और उसे घोर अन्धकार बना दे। और यदि तुम इसे न सुनो, तो मैं अकेले में तुम्हारे गर्व के कारण रोऊंगा, और मेरी आंखों से आंसुओं की धारा बहती रहेगी, क्योंकि यहोवा की भेड़ें बंधुआ कर ली गई हैं।
- Romans 9:2–3 रोमियों 9:2–3कि मुझे बड़ा शोक है, और मेरा मन सदा दुखता रहता है। क्योंकि मैं यहां तक चाहता था, कि अपने भाईयों, के लिये जो शरीर के भाव से मेरे कुटुम्बी हैं, आप ही मसीह से शापित हो जाता।
- 2 Corinthians 12:15 2 कुरिन्थियों 12:15मैं तुम्हारी आत्माओं के लिये बहुत आनन्द से खर्च करूंगा, बरन आप भी खर्च हो जाऊंगा: क्या जितना बढ़कर मैं तुम से प्रेम रखता हूं, उतना ही घटकर तुम मुझ से प्रेम रखोगे?
Original words (Greek)
- For · G1063γάρ gár
- of · G1537ἐκ ek
- much · G4183πολύς polýs
- affliction · G2347θλῖψις thlîpsis
- and · G2532καί kaí
- anguish · G4928συνοχή synochḗ
- heart · G2588καρδία kardía
- wrote · G1125γράφω gráphō
- you · G5213ὑμῖν hymîn
- with · G1223διά diá
- many · G4183πολύς polýs
- tears · G1144δάκρυ dákry
- not · G3756οὐ ou
- that · G2443ἵνα hína
- grieved · G3076λυπέω lypéō
- but · G235ἀλλά allá
- that · G2443ἵνα hína
- know · G1097γινώσκω ginṓskō
- love · G26ἀγάπη agápē
- which · G3739ὅς hós
- have · G2192ἔχω échō
- abundantly · G4056περισσοτέρως perissotérōs
- unto · G1519εἰς eis
- you · G5209ὑμᾶς hymâs