2 Thessalonians · chapter 1 · verse 3
2 Thessalonians 1:3 in Hindi
हे भाइयो, तुम्हारे विषय में हमें हर समय परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहिए, और यह उचित भी है इसलिये कि तुम्हारा विश्वास बहुत बढ़ता जाता है, और तुम सब को प्रेम आपस में बहुत ही होता जाता है।
He bhaaiyo, tumhaare vishay mem hamem har samay parameshvar kaa dhanyavaad karanaa chaahie, aur yah uchit bhee hai isaliye ki tumhaaraa vishvaas bahut badhataa jaataa hai, aur tum sab ko prem aapas mem bahut hee hotaa jaataa hai.
2 Thessalonians 1:3 in English
- King James Version (KJV)
- We are bound to thank God always for you, brethren, as it is meet, because that your faith groweth exceedingly, and the charity of every one of you all toward each other aboundeth;
- World English Bible (WEB)
- We are bound to always give thanks to God for you, brothers, even as it is appropriate, because your faith grows exceedingly, and the love of each and every one of you toward one another abounds,
- American Standard Version (ASV)
- We are bound to give thanks to God always for you, brethren, even as it is meet, for that your faith groweth exceedingly, and the love of each one of you all toward one another aboundeth;
- Bible in Basic English (BBE)
- It is right for us to give praise to God at all times for you, brothers, because of the great increase of your faith, and the wealth of your love for one another;
- Darby Translation (DBY)
- We ought to thank God always for you, brethren, even as it is meet, because your faith increases exceedingly, and the love of each one of you all towards one another abounds;
- Webster's Bible (WBS)
- We are bound to thank God always for you, brethren, as it is meet, because your faith groweth exceedingly, and the charity of every one of you all towards each other aboundeth;
- Young's Literal Translation (YLT)
- We ought to give thanks to God always for you, brethren, as it is meet, because increase greatly doth your faith, and abound doth the love of each one of you all, to one another;
Read in context
- 1पौलुस और सिलवानुस और तीमुथियुस की ओर से थिस्सलुनीकियों की कलीसिया के नाम, जो हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह में है।।
- 2हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह में तुम्हें अनुग्रह और शान्ति मिलती रहे।।
- 3हे भाइयो, तुम्हारे विषय में हमें हर समय परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहिए, और यह उचित भी है इसलिये कि तुम्हारा विश्वास बहुत बढ़ता जाता है, और तुम सब को प्रेम आपस में बहुत ही होता जाता है।
- 4यहां तक कि हम आप परमेश्वर की कलीसिया में तुम्हारे विषय में घमण्ड करते हैं, कि जितने उपद्रव और क्लेश तुम सहते हो, उन सब में तुम्हारा धीरज और विश्वास प्रगट होता है।
- 5यह परमेश्वर के सच्चे न्याय का स्पष्ट प्रमाण है; कि तुम परमेश्वर के राज्य के योग्य ठहरो, जिस के लिये तुम दुख भी उठाते हो।
Cross references
- 2 Peter 3:18 2 पतरस 3:18पर हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ। उसी की महिमा अब भी हो, और युगानुयुग होती रहे। आमीन।।
- 2 Peter 1:5–10 2 पतरस 1:5–10और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्न करके, अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ। और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति। और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ। क्योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्फल न होने देंगी। और जिस में ये बातें नहीं, वह अन्धा है, और धुन्धला देखता है, और अपने पूर्वकाली पापों से धुलकर शुद्ध होने को भूल बैठा है। इस कारण हे भाइयों, अपने बुलाए जाने, और चुन लिये जाने को सिद्ध करने का भली भांति यत्न करते जाओ, क्योंकि यदि ऐसा करोगे, तो कभी भी ठोकर न खाओगे।
- Proverbs 4:18 नीतिवचन 4:18परन्तु धर्मियों की चाल उस चमकती हुई ज्योति के समान है, जिसका प्रकाश दोपहर तक अधिक अधिक बढ़ता रहता है।
- Philippians 1:9 फिलिप्पियों 1:9और मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए।
- Isaiah 40:29–31 यशायाह 40:29–31वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है। तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं; परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाई उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।।
- 1 Thessalonians 4:1 1 थिस्सलुनीकियों 4:1निदान, हे भाइयों, हम तुम से बिनती करते हैं, और तुम्हें प्रभु यीशु में समझाते हैं, कि जैसे तुम ने हम से योग्य चाल चलना, और परमेश्वर को प्रसन्न करना सीखा है, और जैसा तुम चलते भी हो, वैसे ही और भी बढ़ते जाओ।
- 1 Thessalonians 4:9–10 1 थिस्सलुनीकियों 4:9–10किन्तु भाईचारे की प्रीति के विषय में यह अवश्य नहीं, कि मैं तुम्हारे पास कुछ लिखूं; क्योंकि आपस में प्रेम रखना तुम ने आप ही परमेश्वर से सीखा है। और सारे मकिदुनिया के सब भाइयों के साथ ऐसा करते भी हो, पर हे भाइयों, हम तुम्हें समझाते हैं, कि और भी बढ़ते जाओ।
- 2 Thessalonians 2:13 2 थिस्सलुनीकियों 2:13पर हे भाइयो, और प्रभु के प्रिय लोगो चाहिये कि हम तुम्हारे विषय में सदा परमेश्वर का धन्यवाद करते रहें, कि परमेश्वर ने आदि से तुम्हें चुन लिया; कि आत्मा के द्वारा पवित्रा बनकर, और सत्य की प्रतीति करके उद्धार पाओ।
- 1 Thessalonians 1:2–3 1 थिस्सलुनीकियों 1:2–3हम अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण करते और सदा तुम सब के विषय में परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं। और अपने परमेश्वर और पिता के साम्हने तुम्हारे विश्वास के काम, और प्रेम का परिश्रम, और हमारे प्रभु यीशु मसीह में आशा की धीरता को लगातार स्मरण करते हैं।
- 1 Thessalonians 3:12 1 थिस्सलुनीकियों 3:12और प्रभु ऐसा करे, कि जेसा हम तुम से प्रेम रखते हैं; वैसा ही तुम्हारा प्रेम भी आपस में, और सब मनुष्यों के साथ बढ़े, और उन्नति करता जाए।
- John 15:2 यूहन्ना 15:2जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छांटता है ताकि और फले।
- Romans 1:8 रोमियों 1:8पहिले मैं तुम सब के लिये यीशु मसीह के द्वारा अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं, कि तुम्हारे विश्वास की चर्चा सारे जगत में हो रही है।
Original words (Greek)
- bound · G3784ὀφείλω opheílō
- thank · G2168εὐχαριστέω eucharistéō
- God · G2316θεός theós
- always · G3842πάντοτε pántote
- for · G4012περί perí
- you · G5216ὑμῶν hymōn
- brethren · G80ἀδελφός adelphós
- as · G2531καθώς kathṓs
- is · G2076ἐστί estí
- meet · G514ἄξιος áxios
- that · G3754ὅτι hóti
- your · G5216ὑμῶν hymōn
- faith · G4102πίστις pístis
- exceedingly · G5232ὑπεραυξάνω hyperauxánō
- and · G2532καί kaí
- charity · G26ἀγάπη agápē
- every · G1538ἕκαστος hékastos
- one · G1520εἷς heîs
- you · G5216ὑμῶν hymōn
- all · G3956πᾶς pâs
- toward · G1519εἰς eis
- other · G240ἀλλήλων allḗlōn
- aboundeth · G4121πλεονάζω pleonázō