Ephesians · chapter 4 · verse 1
Ephesians 4:1 in Hindi
सो मैं जो प्रभु में बन्धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो।
So maim jo prabhu mem bandhuaa hoom tum se binatee karataa hoom, ki jis bulaahat se tum bulaae gae the, usake yogy chaal chalo.
Ephesians 4:1 in English
- King James Version (KJV)
- I therefore, the prisoner of the Lord, beseech you that ye walk worthy of the vocation wherewith ye are called,
- World English Bible (WEB)
- I therefore, the prisoner in the Lord, beg you to walk worthily of the calling with which you were called,
- American Standard Version (ASV)
- I therefore, the prisoner in the Lord, beseech you to walk worthily of the calling wherewith ye were called,
- Bible in Basic English (BBE)
- I then, the prisoner in the Lord, make this request from my heart, that you will see that your behaviour is a credit to the position which God's purpose has given you,
- Darby Translation (DBY)
- I, the prisoner in [the] Lord, exhort you therefore to walk worthy of the calling wherewith ye have been called,
- Webster's Bible (WBS)
- I therefore, the prisoner of the Lord, beseech you that ye walk worthy of the vocation by which ye are called,
- Young's Literal Translation (YLT)
- Call upon you, then, do I — the prisoner of the Lord — to walk worthily of the calling with which ye were called,
Read in context
- 1सो मैं जो प्रभु में बन्धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो।
- 2अर्थात् सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे को सह लो।
- 3और मेल के बन्ध में आत्मा की एकता रखने का यत्न करो।
Cross references
- Colossians 1:10 कुलुस्सियों 1:10ताकि तुम्हारा चाल- चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ।
- Philippians 1:27 फिलिप्पियों 1:27केवल इतना करो कि तुम्हारा चाल- चलन मसीह के सुसमाचार के योग्य हो कि चाहे मैं आकर तुम्हें देखूं, चाहे न भी आऊं, तुम्हारे विषय में यह सुनूं, कि तुम एक ही आत्मा में स्थिर हो, और एक चित्त होकर सुसमाचार के विश्वास के लिये परिश्रम करते रहते हो।
- 1 Thessalonians 2:12 1 थिस्सलुनीकियों 2:12कि तुम्हारा चाल चलन परमेश्वर के योग्य हो, जो तुम्हें अपने राज्य और महिमा में बुलाता है।।
- 1 Thessalonians 4:1–2 1 थिस्सलुनीकियों 4:1–2निदान, हे भाइयों, हम तुम से बिनती करते हैं, और तुम्हें प्रभु यीशु में समझाते हैं, कि जैसे तुम ने हम से योग्य चाल चलना, और परमेश्वर को प्रसन्न करना सीखा है, और जैसा तुम चलते भी हो, वैसे ही और भी बढ़ते जाओ। क्योंकि तुम जानते हो, कि हम ने प्रभु यीशु की ओर से तुम्हें कौन कौन सी आज्ञा पहुंचाई।
- 2 Peter 1:3 2 पतरस 1:3क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिस ने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है।
- 2 Timothy 1:9 2 तीमुथियुस 1:9जिस ने हमारा उद्धार किया, और पवित्रा बुलाहट से बुलाया, और यह हमारे कामों के अनुसार नहीं; पर अपनी मनसा और उस अनुग्रह के अनुसार है जो मसीह यीशु में सनातन से हम पर हुआ है।
- 1 Corinthians 4:16 1 कुरिन्थियों 4:16सो मैं तुम से बिनती करता हूं, कि मेरी सी चाल चलो।
- 2 Thessalonians 1:11 2 थिस्सलुनीकियों 1:11इसी लिये हम सदा तुम्हारे निमित्त प्रार्थना भी करते हैं, कि हमारा परमेश्वर तुम्हें इस बुलाहट के योग्य समझे, और भलाई की हर एक इच्छा, और विश्वास के हर एक काम को सामर्थ सहित पूरा करे।
- Ephesians 4:17 इफिसियों 4:17इसलिये मैं यह कहता हूं, और प्रभु में जताए देता हूं कि जैसे अन्यजातीय लोग अपने मन की अनर्थ की रीति पर चलते हैं, तुम अब से फिर ऐसे न चलो।
- Genesis 17:1 उत्पत्ति 17:1जब अब्राम निन्नानवे वर्ष का हो गया, तब यहोवा ने उसको दर्शन देकर कहा मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर हूं; मेरी उपस्थिति में चल और सिद्ध होता जा।
- Romans 12:1 रोमियों 12:1इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरो कों जीवित, और पवित्रा, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।
- Romans 8:28–30 रोमियों 8:28–30और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात् उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। क्योंकि जिन्हें उस ने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्रा के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे। फिर जिन्हें उन से पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।।