Genesis · chapter 39 · verse 8
Genesis 39:8 in Hindi
पर उस ने अस्वीकार करते हुए अपने स्वामी की पत्नी से कहा, सुन, जो कुछ इस घर में है मेरे हाथ में है; उसे मेरा स्वामी कुछ नहीं जानता, और उस ने अपना सब कुछ मेरे हाथ में सौप दिया है।
Par us ne asveekaar karate hue apane svaamee kee patnee se kahaa, sun, jo kuchh is ghar mem hai mere haath mem hai; use meraa svaamee kuchh naheem jaanataa, aur us ne apanaa sab kuchh mere haath mem saup diyaa hai.
Genesis 39:8 in English
- King James Version (KJV)
- But he refused, and said unto his master’s wife, Behold, my master wotteth not what [is] with me in the house, and he hath committed all that he hath to my hand;
- World English Bible (WEB)
- But he refused, and said to his master’s wife, “Behold, my master doesn’t know what is with me in the house, and he has put all that he has into my hand.
- American Standard Version (ASV)
- But he refused, and said unto his master’s wife, Behold, my master knoweth not what is with me in the house, and he hath put all that he hath into my hand:
- Bible in Basic English (BBE)
- But he would not, and said to her, You see that my master keeps no account of what I do in his house, and has put all his property in my control;
- Darby Translation (DBY)
- But he refused, and said to his master's wife, Behold, my master takes cognizance of nothing with me: what is in the house, and all that he has, he has given into my hand.
- Webster's Bible (WBS)
- But he refused, and said to his master's wife, Behold, my master knoweth not what [is] with me in the house, and he hath committed all that he hath to my hand:
- Young's Literal Translation (YLT)
- and he refuseth, and saith unto his lord's wife, 'Lo, my lord hath not known what [is] with me in the house, and all that he hath he hath given into my hand;
Read in context
- 6सो उस ने अपना सब कुछ यूसुफ के हाथ में यहां तक छोड़ दिया: कि अपने खाने की रोटी को छोड़, वह अपनी सम्पत्ति का हाल कुछ न जानता था। और यूसुफ सुन्दर और रूपवान् था।
- 7इन बातों के पश्चात् ऐसा हुआ, कि उसके स्वामी की पत्नी ने यूसुफ की ओर आंख लगाई; और कहा, मेरे साथ सो।
- 8पर उस ने अस्वीकार करते हुए अपने स्वामी की पत्नी से कहा, सुन, जो कुछ इस घर में है मेरे हाथ में है; उसे मेरा स्वामी कुछ नहीं जानता, और उस ने अपना सब कुछ मेरे हाथ में सौप दिया है।
- 9इस घर में मुझ से बड़ा कोई नहीं; और उस ने तुझे छोड़, जो उसकी पत्नी है; मुझ से कुछ नहीं रख छोड़ा; सो भला, मैं ऐसी बड़ी दुष्टता करके परमेश्वर का अपराधी क्योंकर बनूं?
- 10और ऐसा हुआ, कि वह प्रति दिन यूसुफ से बातें करती रही, पर उस ने उसकी न मानी, कि उसके पास लेटे वा उसके संग रहे।
Cross references
- Proverbs 23:26–28 नीतिवचन 23:26–28हे मेरे पुत्रा, अपना मन मेरी ओर लगा, और तेरी दृष्टि मेरे चालचलन पर लगी रहे। वेश्या गहिरा गड़हा ठहरती है; और पराई स्त्री सकेत कुंए के समान है। वह डाकू की नाई घात लगाती है, और बहुत से मनुष्यों को विश्वासघाती कर देती है।।
- Proverbs 22:14 नीतिवचन 22:14पराई स्त्रियों का मुंह गहिरा गड़हा है; जिस से यहोवा क्रोधित होता, सोई उस में गिरता है।
- Proverbs 1:10 नीतिवचन 1:10हे मेरे पुत्रा, यदि पापी लोग तुझे फुसलाए, तो उनकी बात न मानना।
- Proverbs 9:13–18 नीतिवचन 9:13–18मूर्खतारूपी स्त्री हौरा मचानेवाली है; वह तो भोली है, और कुछ नहीं जानती। वह अपने घर के द्वार में, और नगर के ऊंचे स्थानों में मचिया पर बैठी हुई जो बटोही अपना अपना मार्ग पकड़े हुए सीधे चले जाते हैं, उनको यह कह कहकर पुकारती है, जो कोई भोला है, वह मुड़कर यहीं आए; जो निर्बुद्धि है, उस से वह कहती है, चोरी का पानी मीठा होता है, और लुके छिपे की रोटी अच्छी लगती है। और वह नहीं जानता है, कि वहां मरे हुए पड़े हैं, और उस स्त्री के नेवतहारी अधोलोक के निचले स्थानों में पहुंचे हैं।।
- Proverbs 7:5 नीतिवचन 7:5तब तू पराई स्त्री से बचेगा, जो चिकनी चुपड़ी बातें बोलती है।।
- Proverbs 6:20–25 नीतिवचन 6:20–25हे मेरे पुत्रा, मेरी आज्ञा को मान, और अपनी माता की शिक्षा का न तज। इन को अपने हृदय में सदा गांठ बान्धे रख; और अपने गले का हार बना ले। वह तेरे चलने में तेरी अगुवाई, और सोते समय तेरी रक्षा, और जागते समय तुझ से बातें करेगी। आज्ञा तो दीपक है और शिक्षा ज्योति, और सिखानेवाले की डांट जीवन का मार्ग है, ताकि तुझ को बुरी स्त्री से बचाए और पराई स्त्री की चिकनी चुपड़ी बातों से बचाए। उसकी सुन्दरता देखकर अपने मन में उसकी अभिलाषा न कर; वह तुझे अपने कटाक्ष से फंसाने न पाए;
- Proverbs 18:24 नीतिवचन 18:24मित्रों के बढ़ाने से तो नाश होता है, परन्तु ऐसा मित्रा होता है, जो भाई से भी अधिक मिला रहता है।
- Proverbs 6:29 नीतिवचन 6:29जो पराई स्त्री के पास जाता है, उसकी दशा ऐसी है; वरन जो कोई उसको छूएगा वह दण्ड से न बचेगा।
- Proverbs 5:3–8 नीतिवचन 5:3–8क्योंकि पराई स्त्री के ओठों से मधु टपकता है, और उसकी बातें तेल से भी अधिक चिकनी होती हैं; परन्तु इसका परिणाम नागदौना सा कडुवा और दोधारी तलवार सा पैना होता है। उसके पांव मृत्यु की ओर बढ़ते हैं; और उसके पग अधोलोक तक पहुंचते हैं।। इसलिये उसे जीवन का समथर पथ नहीं मिल पाता; उसके चालचलन में चंचलता है, परन्तु उसे वह आप नहीं जानती।। इसलिये अब हे मेरे पुत्रों, मेरी सुनो, और मेरी बातों से मुंह न मोड़ो। ऐसी स्त्री से दूर ही रह, और उसकी डेवढ़ी के पास भी न जाना;
- Proverbs 2:10 नीतिवचन 2:10क्योंकि बुद्धि तो तेरे हृदय में प्रवेश करेगी, और ज्ञान तुझे मनभाऊ लगेगा;
- Proverbs 7:25–27 नीतिवचन 7:25–27तेरा मन ऐसी स्त्री के मार्ग की ओर न फिरे, और उसकी डगरों में भूल कर न जाना; क्योंकि बहुत लोग उस से मारे पड़े हैं; उसके घात किए हुओं की एक बड़ी संख्या होगी। उसका घर अधोलोक का मार्ग है, वह मृत्यु के घर में पहुंचाता है।।
- Proverbs 6:32–33 नीतिवचन 6:32–33परनतु जो परस्त्रीगमन करता है वह निरा निर्बुद्ध है; जो अपने प्राणों को नाश करना चाहता है, वह ऐसा करता है।। उसको घायल और अपमानित होना पड़ेगा, और उसकी नामधराई कभी न मिटेगी।