James · chapter 1 · verse 14
James 1:14 in Hindi
परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंचकर, और फंसकर परीक्षा में पड़ता है।
Parantu pratyek vyakti apanee hee abhilaashaa mem khinchakar, aur phansakar pareekshaa mem padataa hai.
James 1:14 in English
- King James Version (KJV)
- But every man is tempted, when he is drawn away of his own lust, and enticed.
- World English Bible (WEB)
- But each one is tempted when he is drawn away by his own lust and enticed.
- American Standard Version (ASV)
- but each man is tempted, when he is drawn away by his own lust, and enticed.
- Bible in Basic English (BBE)
- But every man is tested when he is turned out of the right way by the attraction of his desire.
- Darby Translation (DBY)
- But every one is tempted, drawn away, and enticed by his own lust;
- Webster's Bible (WBS)
- But every man is tempted, when he is drawn away by his own lust, and enticed.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and each one is tempted, by his own desires being led away and enticed,
Read in context
- 12धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकलकर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करनेवालों को दी है।
- 13जब किसी ही परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्वर की ओर से होती है; क्योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वही किसी की परीक्षा आप करता है।
- 14परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंचकर, और फंसकर परीक्षा में पड़ता है।
- 15फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जनता है और पाप बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्पन्न करता है।
- 16हे मेरे प्रिय भाइयों, धोखा न खाओ।
Cross references
- Mark 7:21–22 मरकुस 7:21–22क्योंकि भीतर से अर्थात् मनुष्य मे मन से, बुरी बुरी चिन्ता व्यभिचार। चोरी, हत्या, परस्त्रीगमन, लोभ, दुष्टता, छल, लुचपन, कुदृष्टि, निन्दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं।
- Ephesians 4:22 इफिसियों 4:22कि तुम अगले चालचलन के पुराने मनुष्यत्व को जो भरमानेवाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्ट होता जाता है, उतार डालो।
- Matthew 15:18 मत्ती 15:18पर जो कुछ मुंह से निकलता है, वह मन से निकलता है, और वही मनुष्य को अशुद्ध करता है।
- Hebrews 3:13 इब्रानियों 3:13बरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए।
- Romans 7:13 रोमियों 7:13तो क्या वह जो अच्छी थी, मेरे लिये मृत्यु ठहरी? कदापि नहीं! परन्तु पाप उस अच्छी वस्तु के द्वारा मेरे लिये मृत्यु का उत्पन्न करनेवाला हुआ कि उसका पाप होना प्रगट हो, और आज्ञा के द्वारा पाप बहुत ही पापमय ठहरे।
- Proverbs 4:23 नीतिवचन 4:23सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल द्दॊत वही है।
- James 4:1–2 याकूब 4:1–2तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख- विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते- भिड़ते हैं? तुम लालसा रखते हो, और तुम्हें मिलता नहीं; तुम हत्या और डाह करते हो, ओर कुछ प्राप्त नहीं कर सकते; तुम झगड़ते और लड़ते हो; तुम्हें इसलिये नहीं मिलता, कि मांगते नहीं।
- Matthew 5:28 मत्ती 5:28परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि जो कोई किसी स्त्री पर कुदृष्टि डाले वह अपने मन में उस से व्यभिचार कर चुका।
- Isaiah 44:20 यशायाह 44:20वह राख खाता है; भरमाई हुई बुद्धि के कारण वह भटकाया गया है और वह न अपने को बचा सकता और न यह कह सकता है, क्या मेरे दहिने हाथ में मिथ्या नहीं?
- Genesis 6:5 उत्पत्ति 6:5और यहोवा ने देखा, कि मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ गई है, और उनके मन के विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है सो निरन्तर बुरा ही होता है।
- Romans 7:11 रोमियों 7:11क्योंकि पाप ने अवसर पाकर आज्ञा के द्वारा मुझै बहकाया, और उसी के द्वारा मुझे मार भी डाला।
- Job 31:27 अय्यूब 31:27मैं मन ही मन मोहित हो गया होता, और अपने मुंह से अपना हाथ चूम लिया होता;