Jeremiah · chapter 12 · verse 13
Jeremiah 12:13 in Hindi
उन्हों ने गेहूं तो बोया, परन्तु कटीले पेड़ काटे, उन्हों ने कष्ट तो उठाया, परन्तु उस से कुछ लाभ न हुआ। यहोवा के क्रोध के भड़कने के कारण तुम अपने खेतों की उपज के विषय में लज्जित हो।
Unhom ne gehoom to boyaa, parantu kateele ped kaate, unhom ne kasht to uthaayaa, parantu us se kuchh laabh na huaa. Yahovaa ke krodh ke bhadakane ke kaaran tum apane khetom kee upaj ke vishay mem lajjit ho.
Jeremiah 12:13 in English
- King James Version (KJV)
- They have sown wheat, but shall reap thorns: they have put themselves to pain, [but] shall not profit: and they shall be ashamed of your revenues because of the fierce anger of the LORD.
- World English Bible (WEB)
- They have sown wheat, and have reaped thorns. They have exhausted themselves, and profit nothing. You will be ashamed of your fruits, because of the LORD’s fierce anger.”
- American Standard Version (ASV)
- They have sown wheat, and have reaped thorns; they have put themselves to pain, and profit nothing: and ye shall be ashamed of your fruits, because of the fierce anger of Jehovah.
- Bible in Basic English (BBE)
- Though good grain was planted, they have got in thorns: they have given themselves pain without profit: they will be shamed on account of their produce, because of the burning wrath of the Lord.
- Darby Translation (DBY)
- They have sown wheat, and they reap thorns; they have put themselves to pain, [and] do not profit. Be ye therefore ashamed of your revenues, because of the fierce anger of Jehovah.
- Webster's Bible (WBS)
- They have sown wheat, but shall reap thorns: they have put themselves to pain, [but] shall not profit; and they shall be ashamed of your revenues because of the fierce anger of the LORD.
- Young's Literal Translation (YLT)
- They sowed wheat, and have thorns reaped, They have become sick — they profit not, And they have been ashamed of your increases, Because of the fierceness of the anger of Jehovah.
Read in context
- 11उन्हों ने उसको उजाड़ दिया; वह उजड़कर मेरे साम्हने विलाप कर रहा है। सारा देश उजड़ गया है, तौभी कोई नहीं सोचता।
- 12जंगल के सब मुंडे टीलों पर नाशक चढ़ आए हैं; क्योंकि यहोवा की तलवार देश के एक छोर से लेकर दूसरी छोर तक निगलती जाती है; किसी मनुष्य को शांन्ति नहीं मिलती।
- 13उन्हों ने गेहूं तो बोया, परन्तु कटीले पेड़ काटे, उन्हों ने कष्ट तो उठाया, परन्तु उस से कुछ लाभ न हुआ। यहोवा के क्रोध के भड़कने के कारण तुम अपने खेतों की उपज के विषय में लज्जित हो।
- 14मेरे दुष्ट पड़ोसी उस भाग पर हाथ लगाते हैं, जिसका भागी मैं ने अपनी प्रजा इस्राएल को बनाया है। उनके विष्य यहोवा यों कहता है कि मैं उनको उनकी भूमि में से उखाड़ डालूंगा, और यहूदा के घराने को भी उनके बीच में से उखड़ूंगा।
- 15उन्हें उखाड़ने के बाद मैं फिर उन पर दया करूंगा, और उन में से हर एक को उसके निज़ भाग और भूमि में फिर से लगाऊंगा।
Cross references
- Micah 6:15 मीका 6:15तू बोएगा, परन्तु लवेगा नहीं; तू जलपाई का तेल निकालेगा, परन्तु लगाने न पाएगा; और दाख रौंदेगा, परन्तु दाखमधु पीने न पाएगा।
- Leviticus 26:16 लैव्यव्यवस्था 26:16तो मैं तुम से यह करूंगा; अर्थात् मैं तुम को बेचैन करूंगा, और क्षयरोग और ज्वर से पीड़ित करूंगा, और इनके कारण तुम्हारी आंखे धुंधली हो जाएंगी, और तुम्हारा मन अति उदास होगा। और तुम्हारा बीच बोना व्यर्थ होगा, क्योंकि तुम्हारे शत्रु उसकी उपज खा लेंगे;
- Haggai 1:6 हाग्गै 1:6तुम ने बहुत बोया परन्तु थोड़ा काटा; तुम खाते हो, परन्तु पेट नहीं भरता; तुम पीते हो, परन्तु प्यास नहीं बुझती; तुम कपड़े पहिनते हो, परन्तु गरमाते नहीं; और जो मजदूरी कमाता है, वह अपनी मजदूरी की कमाई को छेदवाली थैली में रखता है।।
- Deuteronomy 28:38 व्यवस्थाविवरण 28:38तू खेत में बीज तो बहुत सा ले जाएगा, परन्तु उपज थोड़ी ही बटोरेगा; क्योंकि टिडि्डयां उसे खा जाएंगी।
- Isaiah 55:2 यशायाह 55:2जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।
- Jeremiah 25:37–38 यिर्मयाह 25:37–38और यहोवा के क्रोध भड़कने के कारण शान्ति के स्थान नष्ट हो जाएंगे, जिन वासस्थानों में अब शान्ति है, वे नष्ट हो जाएंगे। युवा सिंह की नाई वह अपने ठौैर को छोड़कर निकलता है, क्योंकि अंधेर करनेहारी तलवार और उसके भड़के हुए कोप के कारण उनका देश उजाड़ हो गया है।
- Jeremiah 4:26 यिर्मयाह 4:26फिर मैं क्या देखता हूँ कि यहोवा के प्रताप और उस भड़के हुए प्रकोप के कारण उपजाऊ देश जंगल, और उसके सारे नगर खण्डहर हो गए थे।
- Habakkuk 2:13 हबक्कूक 2:13देखो, क्या सेनाओं के यहोवा की ओर से यह नहीं होता कि देश देश के लोग परिश्रम तो करते हैं परन्तु वे आग का कौर होते हैं; और राज्य- राज्य के लोगों का परिश्रम व्यर्थ ही ठहरता है?
- Romans 6:21 रोमियों 6:21सो जिन बातों से अब तुम लज्जित होते हो, उन से उस समय तुम क्या फल पाते थे?
- Isaiah 30:1–6 यशायाह 30:1–6यहोवा की यह वाणी है, हाय उन बलवा करनेवाले लड़कों पर जो युक्ति तो करते परन्तु मेरी ओर से नहीं; वाचा तो बान्धते परन्तु मेरे आत्मा के सिखाये नहीं; और इस प्रकार पाप पर पाप बढ़ाते हैं। वे मुझ से बिन पूछे मि को जाते हैं कि फिरौन की रक्षा में रहे और मि की छाया में शरण लें। इसलिये फिरौन का शरणस्थान तुम्हारी लज्जा का, और मि की छाया में शरण लेना तुम्हारी निन्दा का कारण होगा। उसके हाकिम सोअन में आए तो हैं और उसके दूत अब हानेस में पहुंचे हैं। वे सब एक ऐसी जाति के कारण लज्जित होंगे जिस से उनका कुछ लाभ न होगा, जो सहायता और लाभ के बदले लज्जा और नामधराई का कारण होगी।। दक्खिन देश के पशुओं के विषय भारी वचन। वे अपनी धन सम्पति को जवान गदहों की पीठ पर, और अपने खजानों को ऊंटों के कूबड़ों पर लादे हुए, संकट और सकेती के देश में होकर, जहां सिंह और सिंहनी, नाग और उड़नेवाले तेज विषधर सर्प रहते हैं, उन लोगों के पास जा रहे हैं जिन से उनको लाभ न होगा।
- Isaiah 31:1–3 यशायाह 31:1–3हाय उन पर जो सहायता पाने के लिये मि को जाते हैं और घोड़ों का आसरा करते हैं; जो रथों पर भरोसा रखते क्योंकि वे बहुत हैं, और सवारों पर, क्योंकि वे अति बलवान हैं, पर इस्राएल के पवित्रा की ओर दृष्टि नहीं करते और न यहोवा की खोज करते हैं! परन्तु वह भी बुद्धिमान है और दु:ख देगा, वह अपने वचन न टालेगा, परन्तु उठकर कुकर्मियों के घराने पर और अनर्थकारियों के सहायकों पर भी चढ़ाई करेगा। मिद्दी लोग ईश्वर नहीं, मनुष्य ही हैं; और उनके घोड़े आत्मा नहीं, मांस ही हैं। जब यहोवा हाथ बढ़ाएगा, तब सहायता करनेवाले और सहायतक चाहनेवाले दोनों ठोकर खाकर गिरेंगे, और वे सब के सब एक संग नष्ट हो जाएंगे।
- Haggai 2:16–17 हाग्गै 2:16–17उन दिनों में जब कोई अन्न के बीस नपुओं की आशा से जाता, तब दास ही पाता था, और जब कोई दाखरस के कुण्ड के पास इस आशा से जाता कि पचास बर्तन भर निकालें, तब बीस ही निकलते थे। मैं ने तुम्हारी सारी खेती को लू और गरूई और ओलों से मारा, तौभी तुम मेरी ओर न फिरे, यहोवा की यही वाणी है।